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माउंट एवरेस्ट नहीं है दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत!

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 21 May 2016, 18:25 IST

हम सभी अब तक सुनते आए हैं कि दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत नेपाल स्थित माउंट एवरेस्ट है. लेकिन वैज्ञानिकों की मानें तो यह सही नहीं है. वैज्ञानिक इक्वाडोर स्थित चिंबोरैजो को दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत बताते हैं.

वैज्ञानिकों के मुताबिक इसका मतलब कि अब तक जिन्होंने भी दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी को फतह करने के लिए माउंट एवरेस्ट की कठिन चढ़ाई की वो व्यर्थ गई.

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http://www.lavoz.com.ar

उनका मानना है कि हिमालय पर्वत श्रंखला स्थित माउंट एवरेस्ट को हकीकत में इक्वाडोर के चिंबोरैजो ने पीछे छोड़ दिया है. लेकिन अगर पारंपरिक मापन पद्धति का प्रयोग करें तो एवरेस्ट अभी भी सबसे ऊंची चोटी होगी. अपने निकटतम प्रतिद्वंदियों के मुकाबले 8,850 मीटर ऊंचा यह पर्वत अभी भी करीब 1,000 मीटर ऊंचा है.

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लेकिन वास्तव में एवरेस्ट ऊपर की ओर बहुत दूर तक या आसमान के ज्यादा नजदीक हो ऐसा भी नहीं. इस पैमाने पर देखें तो इक्वाडोर स्थित चिंबोरैजो सबसे ऊंचा साबित होता है और इसकी वजह पृथ्वी का अजीब सा आकार है.

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साभारः www.topwasaviral.com

माउंट एवरेस्ट केवल उस स्थिति में ही विजेता साबित होता है जब इसे समुद्र के स्तर से मापा जाता है. लेकिन अगर इसके बजाय आप इसे पृथ्वी के केंद्र मापें तो चिंबोरैजो आसानी से जीत जाएगा. इतना ही नहीं एवरेस्ट का नाम टॉप 20 पर्वतों में भी नहीं आएगा.

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चिंबोरैजो (साभारः विकीपीडिया)

यह नतीजे इसलिए निकलते हैं क्योंकि पृथ्वी का आकार एक पूर्ण गोलाकार नहीं है, बल्कि यह एक पिचकी हुई गेंद की तरह है जो ऊपर और नीचे तो तकरीबन सपाट है जबकि बीच में थोड़ा बाहर की ओर निकली हुई है. इसे एक संतरे के आकार जैसा माना जा सकता है.

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पृथ्वी का संतरानुमा आकार (साभारः www.esri.co)

पृथ्वी का यह संतरेनुमा आकार उन पर्वतों को ज्यादा ऊंचा बनाता है जो इसकी भूमध्य रेखा (इक्वेटर) पर या इसके नजदीक पड़ते हैं. इस मामले में चिंबोरैजो को फायदा मिलता है क्योंकि यह पृथ्वी के निकले हुए बीच के हिस्से के नजदीक स्थित है जबकि माउंट एवरेस्ट इससे करीब एक तिहाई दूरी पर ऊपर की ओर है.

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द न्यूयॉर्क टाइम्स की मानें तो फ्रांस में इंस्टीट्यूट ड रिचर्चे पौर ले डेवलपमेंट के पर्वतारोहियों ने हाल ही में चढ़ाई के दौरान चिंबोरैजो की ऊंचाई को पहले की तुलना में 15 फुट कम पाया. 

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साभारः http://rootstraveler.com/

कुछ अन्य माप में भी माउंट एवरेस्ट दुनिया की सबसे ऊंची चोटी नहीं है. हवाई का मौना किया ऊपर से नीचे तक की लंबाई के मामले में काफी बड़ा है लेकिन क्योंकि इसकी तली और काफी हिस्सा समुद्र के नीचे हैं, इसलिए जब बात समुद्र स्तर से ऊंचाई की आती है तो यह पीछे रह जाता है.

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साभारः www.radioloja977.com

एवरेस्ट की प्रसिद्धि और बदनामी का वास्तविक तथ्य यह है कि इसकी चढ़ाई सबसे ज्यादा होने के चलते यह सबसे कठिन भी है.

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इसकी तुलना में चिंबोरैजो की चढ़ाई काफी आसान है. माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई में लगने वाले तकरीबन दो माह के कुल वक्त की तुलना में यह दो सप्ताह में ही पूरी हो जाती है. 

First published: 21 May 2016, 18:25 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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