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इमैनुएल मैक्रों: जानिए फ्रांस के सबसे युवा राष्ट्रपति की अनोखी लव स्टोरी

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 May 2017, 12:01 IST
Emmanuel Macron

39 साल के इमैनुएल मैक्रों फ्रांस के नए राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं. वो एक इन्वेस्टमेंट बैंकर हैं और अब फ्रांस के सबसे युवा राष्ट्रपति बन गए हैं. मैक्रों ने अपनी प्रतिद्वंद्वी और दक्षिणपंथी नेता मरी ला पेन को हराया है. मैक्रों को कुल 66.06 प्रतिशत वोट मिले. अपनी जीत के बाद फ्रांस की जनता से उन्होंने कहा कि उनका देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे रहेगा.

मैक्रों, फ्रांस्वा ओलांद सरकार में वित्त मंत्री रह चुके हैं. मतदान से पहले सर्वे भी मैक्रों का पलड़ा भारी बता रहे थे, लेकिन यह भी कहा जा रहा था कि पेन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरह कोई बड़ा उलटफेर कर सकती हैं.  

अनूठी लव स्टोरी

मैक्रों और पेन पहले चरण में क्रमश: पहले व दूसरे स्थान पर रहे थे. प्रेम कहानी को लेकर चर्चा में रहे मैक्रों चुनावी दौर में अपनी प्रेम कहानी को लेकर चर्चा में रहे. महज 17 वर्ष की उम्र में उन्हें 25 साल बड़ी अपनी टीचर ब्रिगिट से प्यार हो गया था. तीन बच्चों की मां ब्रिगिट एक ड्रामा क्लब चलाती थीं.

मैक्रों के घरवाले इस रिश्ते से खुश नहीं थे, लेकिन 2007 में दोनों ने शादी कर ली. मैक्रों ने सार्वजनिक तौर पर हमेशा कहा कि वह ब्रिगिट से अपने रिश्ते को कभी छुपाएंगे नहीं. राजनीति में अपने उत्थान का श्रेय वह ब्रिगिट को ही देते हैं.

यूरोप समर्थक हैं मैक्रों

दक्षिणपंथी पेन को मुस्लिमों के खिलाफ, आव्रजकों का विरोधी और यूरोपीय यूनियन का विरोधी माना जाता है. इससे पहले काफी उतार-चढ़ाव वाले चुनाव प्रचार में दोनों उम्मीदवारों से जुड़े कई स्कैंडल सामने लाए गए और हैरतअंगेज कारनामों को जनता के सामने लाने की कोशिश हुई.

आखिरी दौर में मैक्रों से जुड़े कुछ ईमेल भी सार्वजनिक हुए. मैक्रों जहां अर्थव्यवस्था में सुधार की बात कर रहे थे, वहीं पेन वोटरों को संरक्षणवादी तरीकों से देश को मजबूत बनाने का आश्वासन दे रही थीं. 

फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव में रचा इतिहास

आतंकी हमले के खतरे को देखते हुए मतदान के दौरान सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे. मतदान स्थलों के नजदीक 50 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी. सेना को भी सतर्क रखा गया था, क्योंकि पहले चरण में किसी भी उम्मीदवार को राष्ट्रपति बनने के लिए जरूरी 50 फीसद वोट नहीं मिलने के कारण रविवार को दूसरे चरण का मतदान कराया गया.

फ्रांसीसी इतिहास में यह पहला मौका था जब दूसरे चरण में देश की प्रमुख पार्टियों सोशलिस्ट और रिपब्लिकंस का कोई उम्मीदवार शामिल नहीं था.

 

First published: 8 May 2017, 9:43 IST
 
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