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भारतीयों की उपनिवेशवाद विरोध की मानसिकता गलत: एंड्रीसन

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2016, 17:03 IST

सोशल साइट्स फेसबुक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के मेंबर मार्क एंड्रीसन ने ट्वीटर पर फ्री बेसिक्स के मामले में एक विवादास्पद बयान दिया है. एंड्रीसन ने अपने बयान में कहा है कि भारत के फैसले से उपनिवेशवाद विरोधी सोच जाहिर होती है.

मार्क एंड्रीसन ने मंगलवार को एक ट्वीट करके कहा कि 'दशकों से उपनिवेशवाद का विरोध भारतीयों के लिए आर्थिक तौर पर पिछड़े रहने का एक बड़ा कारण है'.

एंड्रीसन का यह ट्वीट दूरसंचार नियामक (ट्राई) के उस फैसले के बाद आया है जिसके तहत इंटरनेट डेटा को अलग-अलग कीमत पर उपलब्ध कराने पर ट्राई ने गलत बताते हुए प्रतिबंध लगाने की बात कही है. ट्राई के इस फैसले से भारत में फेसबुक की फ्री इंटरनेट सेवा लागू नहीं हो सकेगी.

एंड्रीसन के इस ट्वीट पर भारतीयों की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है. इस मामले में गायत्री जयरमन ने ट्वीट किया है कि, 'हां... जाहिर है एंड्रीसन और फेसबुक खुद को बेचारे ब्राउन भारतीयों के लिए नए ईस्ट इंडिया की तरह औपनिवेशिक मसीहाओं के तौर पर देखते हैं.'

एक अन्य भारतीय ने अपने ट्वीट में लिखा है कि,'एंड्रीसन पते की बात कर रहे हैं. अब तो गोरे ही हमारी हर बात को तय करें, इस विचार को हमें लागू करना चाहिए.'

भारतीयों की तरफ से इस तरह की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए एंड्रीसन ने अपने ट्वीट को वापिस लेते हुए लिखा कि 'वह किसी भी देश में उपनिवेशवाद के खिलाफ हैं और वह इस बहस से खुद को अलग कर रहे हैं.'

इसके बाद एंड्रीसन ने अपने उस विवादित ट्वीट को डिलीट कर दिया. हालांकि उसका स्क्रीनशॉट अब भी ट्विटर पर पोस्ट किया जा रहा है. एंड्रीसन ने इस मामले में बढ़ते विवाद को देखते हुए मांफी भी मांग ली है.

PDP Screen Shot

एंड्रीसन ने दूरसंचार नियामक के द्वारा फेसबुक के फ्री बेसिक्स के साथ-साथ अन्य योजनाओं पर प्रतिबंध लगाए जाने के विरोध में ट्वीटर पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी.

गौरतलब है कि ट्राई ने इस मामले में दिये अपने फैसले में कहा था कि कोई सेवा प्रदाता इंटरनेट की सामग्री के आधार पर ग्राहकों के लिए डाटा की दरों को अलग-अलग नहीं रख सकता.

ट्राई ने इसके खिलाफ जाने वाले सेवा प्रदाताओं पर जुर्माने का प्रावधान भी किया है.

First published: 11 February 2016, 17:03 IST
 
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