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अमेरिका के ख़िलाफ़ सबसे बुलंद आवाज़ ख़ामोश, नहीं रहे फिदेल कास्त्रो

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 February 2017, 8:19 IST
(फाइल फोटो)

अमेरिका के खिलाफ सबसे सशक्त आवाज आज हमेशा के लिए खामोश हो गई. क्यूबा के फिदेल एलेजैंड्रो कास्त्रो का 90 साल की उम्र में शुक्रवार की रात निधन हो गया है.

स्थानीय समय के मुताबिक रात के करीब साढ़े दस बजे उनकी मौत हुई. क्यूबा के सरकारी टीवी ने क्यूबा के राष्ट्रपति और फिदेल कास्त्रो के छोटे भाई राउल कास्त्रो के हवाले से कास्त्रो के निधन की पुष्टि की है.

4 दिसंबर को अंतिम संस्कार

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक क्यूबा सरकार का कहना है कि दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो का अंतिम संस्कार 4 दिसंबर को होगा.

इसके साथ ही क्यूबा में उनके निधन पर 9 दिन के राष्ट्रीय शोक का एलान किया गया है.

अमेरिका समर्थित बतिस्ता के खिलाफ मुहिम

13 अगस्त 1926 को जन्मे कास्त्रो क्यूबा की क्रांति के जनक और क्यूबा की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रथम सचिव थे. कास्त्रो ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अमेरिका समर्थित फुल्गेंकियो बतिस्ता शासन के खिलाफ आवाज उठाने के साथ की.

संयुक्त राज्य अमेरिका का क्यूबा के राष्ट्रहित में राजनीतिक और कॉरपोरेट कंपनियों के प्रभाव के आलोचक के रूप में कास्त्रो ने बतिस्ता का विरोध शुरू किया. उन्हें एक उत्साही, लेकिन सीमित समर्थक मिले. धीरे-धीरे फिदेल कास्त्रो ने अपना प्रभाव बढ़ाते हुए अधिकारियों का भी ध्यान आकर्षित किया.

क्यूबा की क्रांति के जनक

उन्होंने मोंकाडा बैरकों पर 1953 में असफल हमले का नेतृत्व किया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. इस मामले में उन पर मुकदमा चला, वो जेल गए और बाद में रिहा कर दिए गए.

इसके बाद बतिस्ता के खिलाफ क्यूबा पर हमले के लिए लोगों को संगठित और प्रशिक्षित करने के लिए कास्त्रो मैक्सिको के लिए रवाना हुए. वे और उनके क्रांतिकारी साथियों ने दिसम्बर 1956 में मेक्सिको छोड़ दिया और पूर्वी क्यूबा के लिए चल पड़े.

गेवारा-कास्त्रो की जुगलबंदी

कास्त्रो क्यूबा की क्रांति के जरिये अमेरिका समर्थित फुल्गेंकियो बतिस्ता की तानाशाही को उखाड़ फेंक सत्ता में आये और उसके बाद शीघ्र ही क्यूबा के प्रधानमंत्री बने. चे गेवारा के साथ कास्त्रो की जुगलबंदी दुनिया के इतिहास में महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है.

1965 में वे क्यूबा की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रथम सचिव बन गए और क्यूबा को एक-दलीय समाजवादी गणतंत्र बनाने में नेतृत्व दिया. 1976 में वे राज्य परिषद और मंत्रिपरिषद के अध्यक्ष (राष्ट्रपति) बन गए. कास्त्रो की सरकार में चे गेवारा को उद्योग मंत्री बनाया गया था.

32 साल तक क्यूबा के राष्ट्रपति

उन्होंने क्यूबा के सशस्त्र बलों के कमांडर इन चीफ का पद भी अपने पास ही रखा. कास्त्रो द्वारा तानाशाही की आलोचना के बावजूद उन्हें एक तानाशाह के रूप में दर्शाया गया.

कास्त्रो 1976 से 2008 की अवधि के दौरान तकरीबन 32 साल तक क्यूबा के राष्ट्रपति रहे. उन्होंने फरवरी 2008 में अपने पद से इस्तीफा दिया, जिसके बाद उनके भाई राउल कास्त्रो को जिम्मेदारी सौंपी गई.

First published: 26 November 2016, 11:13 IST
 
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