Home » इंटरनेशनल » former pak minister told that the tens atmosfiar of kashmir is making a terorrist activiti
 

पूर्व पाक विदेश मंत्री का आरोप, कश्मीर में तनाव से पनप रहा है आतंकवाद

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 July 2016, 19:18 IST
(एजेंसी)

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी ने कहा है कि कश्मीर संकट पाकिस्तान में एक प्रमुख मुद्दा है और कश्मीर के तनावपूर्ण माहौल की वजह से जिहाद की स्थिति बनी हुई है.

घाटी में तनावपूर्ण माहौल के कारण चरमपंथी तत्व ‘भाई मुस्लिमों को मुक्त कराने के वास्ते जिहाद छेड़ने के लिए’ उकसाते हैं.

इसके साथ ही कसूरी ने यह भी कहा कि कश्मीर संकट से पाकिस्तानियों का गहरा लगाव है. जिसकी वजह से जिहादियों की गतिविधियों से सहानुभूति का एक समूह पाकिस्तान में हमेशा जिंदा रहेगा.

उन्होंने कहा, ‘यदि ऐसा मामला नहीं होता तो जिहाद के लिए लोग अपनी मर्जी से भर्ती होने न जाते.’

पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के वरिष्ठ नेता कसूरी ने कहा कि हालांकि जनता के बीच कुछ प्रभावशाली तबकों और सत्ता के गलियारों में इस बात का अहसास हो गया है कि पाकिस्तान की कश्मीर मसले में हस्तक्षेप की नीति का उल्टा असर हुआ है.

उन्होंने दोनों मुल्कों के आपसी संबंधों के बारे में कहा, ‘पाकिस्तान और भारत के संबंध का पाकिस्तान में मुस्लिमों के बीच चरमपंथी तत्वों पर एक असर पड़ता है. इसके अलावा कश्मीर घाटी की तनावपूर्ण स्थिति भी एक प्रलोभन का काम करती है और चरमपंथी तत्वों को ‘अपने साथी मुस्लिमों को मुक्त कराने के लिए जिहाद करने’ को प्रोत्साहित करती है.’

कसूरी का यह भी मानना है कि मुजाहिदीन की गतिविधियों के प्रति शुरुआती समर्थन के बावजूद पश्चिम और खास तौर पर पाकिस्तान को इस जिहाद के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ी है.

इक्वेटर लाइन पत्रिका के हालिया अंक में प्रकाशित एक लेख में उन्होंने लिखा है कि, ‘समय के साथ पश्चिम और पाकिस्तान को विभिन्न मतों वाले आतंकी समूहों के बीच बढ़ रहे संबंधों से निपटना पड़ा है. पाकिस्तान को यह भी पता चला कि कश्मीर में लड़ रहे कुछ समूह उसके अपने नागरिकों और सुरक्षा बलों पर भी आसानी से हमले बोल सकते हैं.’

कसूरी ने पत्रिका में लिखा है कि, ‘कई मामलों में खुफिया एजेंसी और कानूनी एजेंसियों को भी निशाना बनाया गया. पाकिस्तान में जनता की राय अब हिंसक समूहों की गतिविधियों के खिलाफ होने लगी है फिर चाहे यह हिंसा किसी भी कारण से क्यों न की जा रही हो.’

कसूरी ने कहा कि पाकिस्तान के मध्यवर्ग के लोग और मीडिया के बड़े तबकों में अब एक बात साफ तौर पर मानी जाने लगी है कि भारत के साथ कश्मीर संकट को हिंसा के जरिए नहीं सुलझाया जा सकता है.

हालांकि इन गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान खींचा है, लेकिन 9/11 के हमलों के बाद यह स्पष्ट हो गया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा.

First published: 7 July 2016, 19:18 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी