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ISIS को तबाह करने के लिए पूर्व सेक्स गुलाम महिलाओं ने फीमेल बटालियन बनाई

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 February 2016, 18:22 IST

आईएसआईएस की पूर्व सेक्स गुलाम रहीं सैकड़ों महिलाओं ने एक ऑल फीमेल बटालियन का गठन किया है. इसमें शामिल होकर यह सभी महिलाएं ईराक में अपना शारीरिक शोषण करने वालों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमला करने की तैयारी कर रही हैं. 

खुद को "फोर्स ऑफ सन लेडीज या सूर्य देवियों की सेना" पुकारने वाली इन यजीदी महिलाओं ने उन आतंकियों से बदला लेने के लिए इस सेना का गठन किया है जिन्होंने उनके साथ बलात्कार किया था.

किसी तरह बचकर भाग निकलीं तकरीबन 2,000 महिलाएं उन बंदियों में से हैं, जिन्हें 2014 की गर्मियों में उनके गांवों में परिजनों को मारने के बाद बंदी बना लिया गया था. इसके बाद आंतकवादियों ने इनके साथ तरह-तरह के जुल्म और बलात्कार किया.

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ओवेन होल्डवे/अलआलम.आईआर

अब बदला लेने की सामूहिक इच्छा से प्रेरित यह बटालियन आईएसआईएस के गढ़ मोसुल में बड़े आक्रमण की तैयारी में जुटी हैं. मोसुल में ही इन महिलाओं की सेक्स गुलाम के रूप में आतंकियों द्वारा अदला-बदली की जाती थी.

सन लेडीज की सदस्या कैप्टन खातून ने मीडिया से कहा, "जब भी कोई युद्ध होता था तो इसका अंत महिलाओं को पीड़िता बना देता है. अब हम इस बुराई से खुद का बचाव कर रहे हैं. हम इस क्षेत्र में अल्पसंख्यकों का बचाव कर रहे हैं. हमसे जो भी कुछ बन पड़ेगा हम करेंगे."

खातून उन 100 से अधिक यजीदी महिलाओं में से हैं जिन्हें मोसुल में हमला करने की तैयारी कर रही कुर्द-पेशमेर्गा सेना के साथ प्रशिक्षित किया गया है. जबकि 500 अन्य इस प्रशिक्षण की प्रतीक्षा में हैं.

करीब 5,000 यजीदी पुरुषों और महिलाओं को आतंकवादियों द्वारा कब्जे में ले लिया गया था. इनमें से करीब 2,000 ऐसे थे जो भागने में कामयाब हो गए या उनकी इराक और सीरिया में आईएसआईएस के खलीफा क्षेत्र से बाहर तस्करी कर दी गई. लेकिन संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि अभी भी करीब 3500 लोग ईराक में आईएसआईएस के कब्जे में हैं. इनमें से अधिकांश लड़कियां और महिलाएं यजीदी समुदाय की हैं.

इनके चंगुल से बच कर निकल आईं महिलाओं के पास यौन शोषण और अत्याचार की तमाम भयावह कहानियां हैं.

एक यजीदी मां जिसने सेक्स गुलाम रहने के दौरान एक बच्चे को जन्म दिया था, बताती हैं कि उन्हें अपने नवजात शिशु को दूध तक नहीं पिलाने दिया जाता था. एक बार जब उनका नवजात शिशु रोया तो उसके मालिक ने उसका सिर कलम कर दिया.

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ओवेन होल्डवे/अलआलम.आईआर

आईएसआईएस आतंकवादियों का मानना है कि याजीदी लोग शैतान के उपासक होते हैं. प्राचीन यजीदी आस्था में ईसाई, पारसी और इस्लाम के तत्वों का मिश्रण है.

यजीदियों की अधिकांश आबादी तकरीबन पांच लाख लोग इराक के कुर्दिस्तान में शिविरों में विस्थापित हो चुके हैं.

डेली मेल के मुताबिक पिछले महीने ईराक स्थित संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय के निदेशक फ्रांसेस्को मोट्टा ने कहा था कि आतंकवादी गुट 'यजीदी लोगों के पूरे या कुछ हिस्से को नष्ट' करना चाहते हैं.

First published: 19 February 2016, 18:22 IST
 
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