Home » इंटरनेशनल » Catch Hindi: german muslim woman lastly agreed to lift her veil in court
 

जर्मनीः मुस्लिम महिला ने अदालत में उठाया नक़ाब

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 March 2016, 15:10 IST

जर्मनी में नस्ली भेदभाव से जुड़े एक मामले में वादी मुस्लिम महिला गुरुवार को अपना नकाब हटाने को राजी हो गयी. इससे पहले महिला ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था.

ये मामला पिछले साल मार्च का है जब 43 वर्षीय अमीरा बहरी ने एक 59 वर्षीय व्यक्ति पर नस्ली टिप्पणी करने का आरोप लगाया.

बहरी का आरोप था कि अभियुक्त ने शहर के सेंट्रल ट्रेन स्टेशन पर उनसे चिल्लाकर कहा था, "तुम लोग पाजी हो. तुम यहां के नहीं हो."

बहरी ने उस व्यक्ति के खिलाफ म्यूनिख की अदालत में मामला दर्ज कराया. मामले की सुनवाई करते समय अदालत ने बहरी से कहा था कि वो नकाब हटाकर चेहरा दिखाएं ताकि जज उनकी भावनाओं को समझ सकें.

उस समय मामले की सुनवाई करते समय जज थॉमस म्यूलर ने कहा था, "मैं आपका चेहरा देखना चाहता हूं, नहीं तो मुझे आपके मामले पर विचार करने में काफी दिक्कत होगी."

लेकिन उन्होंने नकाब हटाने से इनकार कर दिया. बहरी के नक़ाब से केवल उनकी आंखें दिख रही थीं. उन्होंने अपने हाथों में दास्ताने पहन रखे थे.

उसके बाद जज म्यूलर ने पिछले साल नवंबर में अभियुक्त को बरी कर दिया.

बहरी ने उन फैसले के खिलाफ आगे अपील की. पिछले हफ्ते मामले की दोबारा शुरू हुई सुनवाई में बहरी अदालत में नक़ाब पहन कर पहुंची. जज क्लॉडिया ने उनसे कहा कि अगर वो नक़ाब नहीं हटाना चाहतीं तो मुक़दमा वापस ले लें.

बहरी ने जज की सलाह मानने से इनकार करते हुए कहा कि "उसने मुझपर हमला किया था."

जज ने उन्हें चेतावनी भी दी थी कि अगर वो ऐसा नहीं करती हैं तो उन्हें सजा मिल सकती है.

बहरी ने अदालत से कहा था, "मेरा एक खुदा है जो इस दुनिया के बाद मुझे देखेगा. मैं ऐसा नहीं करूंगी."

इस मामले में आखिरी सुनवाई गुरुवार को हुई. इस बार बहरी ने अदालत में अपने चेहरे से नक़ाब हटा दिया. उनका चेहरा केवल जज ही देख सकते थे.

जज ने उनसे पूछा कि "क्या आपको अक्सर राह चलते अपमानित होना पड़ता है?" तो बहरी ने कहा, "इससे आपको क्या मतलब?" फिर उन्होंने अदालत को बताया कि उनपर अक्सर राह चलते छींटाकशी होती है.

जज ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अभियुक्त को बरी कर दिया.

अगर बहरी इस बार भी सुनवाई में नक़ाब नहीं हटातीं तो उन्हें जुर्माना या जेल की सजा हो सकती थी.

म्यूनिख अदालत के अभियोजकों ने कुरआन के जानकारों से इस मुद्दे पर राय ली थी. जिनके अनुसार कोई महिला न्यायपालिका के अधिकारियों (जज, पुलिस, वकील) के सामने जरूरत और सुरक्षा के मद्देनजर नक़ाब उठा सकती है.

First published: 18 March 2016, 15:10 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी