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हैदराबाद की 'मुन्नी' का अमेरिका में चला जादू, बनी पहली मुस्लिम भारतीय-अमेरिकी सीनेटर

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 November 2019, 15:49 IST

ग़ज़ल हाशमी जब चार साल की थी तब वो अपने परिवार के साथ अमेरिका चली गई थी. उनके परिवार वाले उन्हें बचपन में मुन्नी के नाम से पुकारते थे. हैदराबाद की रहने वाली ग़ज़ल हाशमी पहली मुस्मिल महिला बन गई हैं जो वर्जीनिया राज्य सीनेट के लिए चुनी गई हैं. इतना ही नहीं हाशमी वर्जीनिया राज्य की सीनेट चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी भी हैं. ग़ज़ल हाशमी सीनेट बनने से पूर्व एक सामुदायिक कॉलेज में प्रोफेसर थी. बता दें, हाशमी ने वर्जीनिया के 10वें सीनेट जिले में रिपब्लिकन सीनेटर ग्लेन स्टुरटेवेंट को पीछे छोड़ा हैं.

ग़ज़ल हाशमी के चुनावी अभियान की वेबसाइट के अनुसार, वह जॉर्जिया के एक छोटे से शहर में पली-बढ़ी हैं जहाँ उन्होंने पहली बार देखा कि कैसे सामुदायिक-निर्माण और खुले संवाद सांस्कृतिक और सामाजिक विभाजन को पाट सकते हैं. ग़ज़ल हाशमी 10वें सीनेट जिले में आप्रवासियों की लगभग 30% वयस्क आबादी का हैं. यह भारतीयों, हिस्पैनिक्स और कोरियाई लोगों की एक बड़ी आबादी है और आप्रवासियों को वहां एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दे के रूप में देखा जाता है.

'ग़ज़ला हाशमी एक अमेरिकी नाम है' उन्होंने अपने अभियान के दौरान 5 नवंबर को होने वाले चुनावों से पहले इस बात पर जोर देते हुए कहा था. उनका यह सीनेटर पद पर चुनाव के लिए पहली चुनावी रैली थी. हाशमी ने हाल ही में रेनॉल्ड्स कम्युनिटी कॉलेज में सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन टीचिंग एंड लर्निंग के निदेशक के रूप में अपनी नौकरी छोड़ कर पूरे समय अभियान चलाया. वह दो दशक से अधिक समय तक बतौर शिक्षिका रही है.

साल में 1991 हाशमी ने जॉर्जिया दक्षिणी विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की इसके बाद उन्होंने एमोरी विश्वविद्यालय से पीएचडी की. वहीं इसके बाद वो अपने पति के साथ रिचमंड वर्जीनिया चली गईं. पिछले 25 वर्षों से, उसने राज्य में बतौर शिक्षक अपना करियर समर्पित किया.

दो बच्चों की मां ग़ज़ल हाशमी ने अपने चुनाव अभियान में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बंदूक हिंसा रोकथाम, पर्यावरण संरक्षण और कार्यबल विकास के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. ग़ज़ल हाशमी ने सीनेटर का चुनाव जीतने के बाद कहा,'वह वर्जीनिया में एक पेड फैमिली लीव और मेडिकल लीव प्रोग्राम स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रही हैं जो "उन श्रमिकों के लिए सुरक्षा प्रदान करेगा जिन्हें अस्थायी रूप से खुद की या किसी प्रियजन की देखभाल के लिए समय निकालने की आवश्यकता होती है.'

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First published: 7 November 2019, 15:11 IST
 
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