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व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान के ग्वादार तट से पहला चीनी पोत रवाना

सादिक़ नक़वी | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST
(एएफ़पी)
QUICK PILL
  • चीन और पाकिस्तान के बीच महत्वाकांक्षी आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का पाकिस्तान में व्यापक विरोध हो रहा है. इस बीच पिछले 13 नवम्बर को ग्वादार तट पर पहला चीनी पोत पहुंच गया. 
  • इस पोत को चीन और पाकिस्तान में निर्मित सामानों को लादकर दक्षिण एशिया, और खाड़ी देशों और अफ्रीका के लिए रवाना किया गया. 

यह परियोजना 50 बिलियन डॉलर से ज्यादा की है. इसको चीन-पाकिस्तान के लिए रणनीतिक कदम के रूप में देखा जाता है. यह चीनी पोत ऐसे समय रवाना हुआ है जब पाकिस्तान में ही इसे परियोजना को लेकर काफी विरोध हो रहा है. विशेषकर बलोचिस्तान, नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रॉविन्स और खैबर पख्तूनख्वा प्रान्तों में.

पाकिस्तान के अखबार डॉन की ताजा खबर के मुताबिक पाकिस्तान को लग रहा है कि अब यह कॉरिडोर भारत को फायदा पहुंचाएगा. पाकिस्तानी सांसदों ने संदेह जताया है कि चीन सीपीईसी का प्रयोग भारत और यूरोप एवं मध्य एशिया के दूसरे देशों के साथ अपने व्यापारिक सम्बंधों के लिए कर सकता है. 

खैबर पख्तूनख्वा की प्रान्तीय परिषद ने तो भूमि अधिग्रहण को लेकर हो रहे प्रदर्शनों समेत परियोजना के क्रियान्वयन मुद्दे पर कोर्ट में जाने की धमकी तक दे दी है. भारत पहले ही सीपीईसी का इस आधार पर विरोध कर चुका है कि वह पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है.

वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने ग्वादार तट पर आयोजित समारोह का उद्घाटन करते हुए कहा है कि हम सीपीईसी के उद्देश्यों को सुनिश्चित करने की दिशा में पीछे नहीं रहेंगे. इसके तहत आने वाली सभी परियोजनाएं समय के भीतर पूरी कर ली जाएंगी.

हालांकि इसके एक दिन बाद ही प्रान्त की शेख नूरानी मस्जिद में भयानक विस्फोट हो गया. इस विस्फोट में 50 से ज्यादा लोगों की जान चली गई. उद्घाटन समारोह में सेना प्रमुख राहिल शरीफ ने भी हिस्सा लिया. राहिल इसी महीने रिटायर्ड हो रहे हैं.

नए वादे?

शरीफ ने पाकिस्तान के लिए परियोजना का महत्व बताते हुए कहा कि इस परियोजना का विचार सिर्फ दो साल पहले ही आया था. और आज नए युग की शुरुआत हो रही है. यह काम ऐसे समय हुआ है जब भारत, ईरान और अफगानिस्तान पड़ोसी बलोचिस्तान में चाबहार पोर्ट को विकसित करने में सहयोग कर रहे हैं.

ऐसे में यह परियोजना देश के व्यापारिक हितों के लिए 'गेम चेन्जर' साबित होगी. शरीफ ने साफ़ किया कि सीपीईसी पूरे पाकिस्तान के लिए है और कोई भी क्षेत्र या प्रान्त इससे अछूता नहीं रहेगा. उनके इस बयान का महत्व इसी से लगाया जा सकता है कि परियोजना के क्रियान्वयन के साथ ही इसका विरोध हो रहा है.

पोर्ट खुलने के साथ ही चीन के शिप्स की पश्चिम एशिया और अफ्रीका तक आवाजाही शुरू हो गई. इस मौके पर चीन का एक शिप सामान लेकर रवाना हुआ. खबर है कि विदेशों में बेचे जाने वाले सामान को लेकर 150 चीनी ट्रकों का पहला काफिला कड़ी सुरक्षा के बीच ग्वादर को चीन के उत्तर-पश्चिमी शिनजियांग क्षेत्र से जोड़ने वाली सड़क के रास्ते पहुंचा. 

कंटेनरों में भरे सामान को सस्ट बॉर्डर क्रासिंग (यह चीनी सीमा से पहले काराकोरम हाईवे पर पाकिस्तान में पड़ने वाला अंतिम गांव है) पर पाकिस्तान के ट्रकों में लादा गया. ये ट्रक जुंड (खैबर पख्तूनखवा में एटक से 100 किमी की दूरी पर है) में पूर्व की तरफ मुड़ गए. इसके बाद में पाकिस्तान के भीतर ही दो और काफिले आकर मिल गए.

सही संदेश

एक सुरक्षा विशेषज्ञ के मुताबिक इसका मकसद नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रॉविन्स और बलोचिस्तान जैसे प्रान्तों को यही संदेश देना था कि उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है. हालांकि विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि यह ट्रायल रन है और यह देखना रुचिकर होगा कि क्या झिनझियांग में चीनी लौटते समय इसी मार्ग को उपयोग में लाएंगे. पाकिस्तान की सीनेट कमेटी ने इस पर गहरी चिन्ताएं जताई हैं. विशेषकर बलोचिस्तान में परियोजनाओं की प्लानिंग और क्रियान्वयन को लेकर. 

विपक्षी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के वरिष्ठ नेता ताज हैदर, जो कमेटी के मुखिया भी हैं, ने डॉन अखबार को बताया है कि ग्वादार तट के पूरा हो जाने को लेकर किया जाने वाला सरकार का दावा सिर्फ दिल बहलाने का साधन है. अखबार ने खबर दी है कि सीपीईसी पर हैदर कमेटी ने अपनी तीसरी रिपोर्ट में ग्वादार परियोजना को 'गैर जरूरी' बताया है और कहा है कि पश्चिमी इलाके का 1,674 लम्बा कॉरिडोर जो बुरहान हाकला, क्वेटा, शोहराब, बिस्मा, पंजगुर, तुरबत और ग्वादार को कवर करता है, सरकार की सबसे निचली प्राथमिकता में था.

यह भी आरोप लगाया है कि ग्वादार पोर्ट को विकसित करने की बजाए सरकार उसके संसाधनों को इस्तेमाल कर कराची पोर्ट का विकास कर रही है. सुरक्षा विशेषज्ञ का मानना है कि इस समय चीन के लिए सभी विकल्प खुले हुए हैं, यहां तक कि कराची के पोर्ट को अपने इस्तेमाल में लाने का भी. कराची पोर्ट को पूर्वी मार्ग रेखा भी कहा जाता है.

इस बात का है डर

बलोचिस्तान में एक्टिविस्टों ने सीपीईसी का विरोध किया है. इन एक्टिविस्टों ने चीन को 21वीं सदी की ईस्ट इंडिया कम्पनी के रूप में निरुपित किया है. बहुत हाल ही में, लंदन में चीनी दूतावास के बाहर प्रदर्शन भी हुआ है. एक्टिविस्टों ने कहा है कि परियोजना बलूच लोगों के संसाधनों की लूट का षडयंत्र है.

बलूच लोगों को डर है कि सीपीईसी से उनके जीवन-यापन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाएगा. उनका अनुमान है कि तीस से चालीस लाख लोग, जिनमें पंजाबी, पख्तून और चीनी कामगार होंगे, बलूचिस्तान आ जाएंगे और देश के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करेंगे. 

इस बीच एक अग्रणी चीनी दैनिक ने मस्जिद के बाहर हुए विस्फोट पर पूरा एक पेज का ओपेड निकाला है और कहा है कि इससे खतरे की घंटी बज गई है. सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाल में मस्जिद पर जो हमला हुआ है, वह पिछले के तीन हमलों से कम भयावह था. इन हमलों के बार में कहा जाता है कि ये हमले प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-झांगवी या आईएसआईएस की करतूत थे. 

विशेषज्ञ का यह भी कहना  कि लश्कर-ए-झांगवी को सीपीईसी के अमल में आने से कोई समस्या नहीं है. उसका शियाओं और अन्य अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ और ज्यादा कड़ा एजेण्डा है. इससे यही लगता है कि राहिल शरीफ खराब छवि लेकर विदा हो रहे हैं और जिस नेशनल एक्शन प्लान की वे प्रशंसा कर रहे हैं, वह हिंसा को फैलने से रोकने में विफल हो रहा है.

First published: 19 November 2016, 7:24 IST
 
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