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हेग ट्रिब्यूनल: दक्षिण चीन सागर पर चीन का ऐतिहासिक हक़ नहीं

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
(पत्रिका)

हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट (कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन) ने मंगलवार को दक्षिण चीन सागर पर अध‍िकार के मामले में चीन के खिलाफ फैसला सुनाया है. ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि नाइन डैश लाइन से घिरे समुद्री क्षेत्र के संसाधनों पर चीन का कोई ऐतिहासिक अधिकार नहीं है.

हेग ट्रिब्यूनल ने कहा कि चीन का ये दावा करना कि दक्षिण चीन सागर पर उसका ऐतिहासिक हक है, कतई सही नहीं कहा जा सकता. चीन ने आइलैंड के स्कारबरो शोल (उथले पानी)-स्प्रैटली आइलैंड ग्रुप पर फिलीपींस के फिशिंग राइट्स में बाधा डाली है'. कोर्ट ने कहा कि चीन को स्प्रैटली आइलैंड पर एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन बनाने का भी कोई हक़ नहीं है.

कोर्ट का निर्णय आने के बाद चीन की सरकारी न्‍यूज एजेंसी ने खबर दी है कि कम्‍युनिस्‍ट राष्‍ट्र ने हेग कोर्ट के फैसले को मानने से इन्‍कार कर दिया है. चीन ने इस फैसले को खारिज करते हुए कहा, 'हम हेग ट्रिब्यूनल के फैसले को स्वीकार नहीं करते और न ही मान्यता देते हैं.

गौरतलब है कि दक्षिण चीन सागर विवाद में फिलीपींस ने इंटरनेशनल कोर्ट में चीन के दावे को चुनौती देते हुए 2013 में याचिका दायर की थी. फिलीपींस का आरोप है कि इस इलाके में चीन ने संसाधनों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया है. वहीं चीन लगभग समूचे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा जताता रहा है. फिलीपींस, मलेश‍िया, ताइवान और वियतनाम भी दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करते हैं.

चीन, दक्षिण चीन सागर में अपने कब्जे को 'नाइन-डैश लाइन' बताता है. फिलीपींस का दावा है कि बीते 69 साल से चीन का दक्षिण चीन सागर के 85% हिस्से पर कब्जा हो चुका है.

दक्षिण चीन सागर को लेकर अमेरिका और चीन में भी तनातनी चली रही है. अमेरिका चीन के दावे का लगातार विरोध करता रहा है.

First published: 12 July 2016, 7:49 IST
 
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