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ICJ में भारत की दलील- कुलभूषण को फांसी की सज़ा वियना संधि का उल्लंघन

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 May 2017, 15:33 IST

पाकिस्तान में कुलभूषण जाधव को फांसी की सज़ा के मुद्दे पर हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत में सुनवाई चल रही है. वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने इस मामले में भारत का पक्ष रखा है. साल्वे को 90 मिनट का समय दिया गया. इस दौरान साल्वे ने मजबूती से जाधव की सज़ा के ख़िलाफ़ दलीलें कोर्ट के सामने रखीं.

इसके बाद पाकिस्तान की विदेश सचिव फहमीना जंजुआ को मौका दिया जा रहा है. हॉलैंड के हेग में 11 जजों की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है. अप्रैल 2017 में पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट ने कुलभूषण जाधव को फांसी की सज़ा सुनाई थी. 

फांसी पर रोक लगाने की अपील

वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने मांग की है कि इस केस की अंतरराष्ट्रीय अदालत में सुनवाई चलने तक कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगाई जाए. उन्होंने इस दौरान आरोप लगाया कि कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई ने फंसाया है.

साल्वे ने कहा कि उनका जो भी कुबूलनामा पब्लिक डोमेन में मौजूद है, वह पाकिस्तानी सेना की हिरासत में लिया गया है. साल्वे ने पाकिस्तान की इस कार्रवाई को वियना संधि का उल्लंघन भी क़रार दिया है.

बिना भारत का पक्ष सुने सज़ा का एलान

90 मिनट के दौरान हरीश साल्वे ने पाकिस्तान को ख़ूब खरी-खोटी सुनाई. उन्होंने साफ कहा कि जाधव पर लगाए गए आरोप गलत हैं. पाकिस्तान ने कुलभूषण की मां की अपील भी ख़ारिज कर दी.

हरीश साल्वे ने कहा कि जाधव के परिवार को पाकिस्तान जाने का वीज़ा नहीं दिया गया और 16 बार इजाजत मांगने के बावजूद कुलभूषण से मिलने के लिए काउंसलर एक्सेस नहीं दी गई, जो सरासर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. 

साल्वे ने इंटरनेशनल कोर्ट में कहा कि पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने बिना भारत का पक्ष सुने उन्हें सज़ा सुनाई है. यही नहीं इस केस की चार्जशीट तक भारत को अभी नहीं सौंपी गई है. 

क्या है कुलभूषण जाधव का विवाद?

पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षा बलों ने 3 मार्च, 2016 को बलूचिस्तान से कुलभूषण जाधव को गिरफ्तार किया. पाकिस्तान का दावा था कि जाधव बलूचिस्तान और कराची में आतंकवाद फैलाने का काम कर रहे थे.

वहीं, भारत का दावा था कि जाधव को अगवा किया गया है. गिरफ्तारी के बाद भारतीय उच्चायोग ने दर्जनों बार उनसे मिलने की इजाजत मांगी थी. लेकिन पाकिस्तान ने सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों को दरकिनार करते हुए इसकी इजाजत नहीं दी. 10 अप्रैल 2017 को अचानक खबर आई कि पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा दे दी है.

कुलभूषण जाधव को फांसी मिलने के बाद भारत ने इस मसले पर कड़ा रुख़ अपनाया था. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में कहा था कि जाधव को छुड़वाने के लिए भारत किसी भी हद तक जाएगा. भारत ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त को कई बार तलब कर जाधव से मिलने की इजाजत मांगी थी. भारत की सरकार जाधव को बचाने के लिए पाकिस्तान की कानूनी व्यवस्था में मौजूद विकल्पों पर भी गौर कर रही थी.

10 अप्रैल को पाकिस्तान के सैन्य मुख्यालय रावलपिंडी से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया, "भारतीय रॉ एजेंट/नेवल ऑफिसर 41558Z कमांडर कुलभूषण सुधीर जाधव उर्फ हुसैन मुबारक पटेल को 3 मार्च, 2016 को बलूचिस्‍तान के मश्‍केल क्षेत्र से काउंटर इंटेलिजेंस ऑपरेशन के जरिए गिरफ्तार किया गया था. उसे पाकिस्तान में जासूसी करने और गड़बड़ी फैलाने वाली गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में पकड़ा गया था."

आईएसपीआर के बयान में कहा गया है, "उन्होंने एक मजिस्ट्रेट कोर्ट के सामने ये स्वीकार किया है कि रॉ की योजना के तहत जासूसी और गड़बड़ी की गतिविधियों के साथ ही पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ते हुए उसे अस्थिर करने की कोशिश की थी. बलूचिस्तान और कराची में कानून व्यवस्था और शांति को बरकरार रखने वाली एजेंसियों के रास्ते में जाधव ने रोड़ा अटकाया."

पाकिस्तान हमेशा ये कहता रहा है कि कुलभूषण जाधव भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के एजेंट हैं. हालांकि भारत पाकिस्तान के आरोपों को नकारता आया है. भारत ने कुलभूषण जाधव को इंडियन नेवी का रिटायर्ड ऑफिसर माना है. इससे पहले पाकिस्तानी जांच एजेंसियों ने कुलभूषण जाधव का एक 6 मिनट का वीडियो भी जारी किया था.

First published: 15 May 2017, 15:20 IST
 
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