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पनामा पेपर्स ने उजागर किया पाकिस्तान के नाभिकीय हथियारों की असुरक्षा

विवेक काटजू | Updated on: 4 May 2016, 8:13 IST
QUICK PILL
  • पाकिस्तान के परमाणु हथियारों, रेडियोएक्टिव पदार्थों और मिसाइल सिस्टम की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रहा है. पाकिस्तान के ये हथियार आतंकवादियों के हाथ लगने की संभावना लगातार बनी रहती है.
  • पाकिस्तान का दावा है कि परमाणु हथियारों के उपयोग की अनुमति सिर्फ एक प्राधिकरण दे सकता है. राष्ट्रीय कमान प्राधिकरण की सहायता के लिए एक सामरिक योजना डिवीजन भी बनाई गई है. यह डिवीजन सेना द्वारा नियंत्रित होती है.

पनामा पेपर्स का एक अनजाने में हुआ खुलासा बहुत महत्वपूर्ण है. पनामा पेपर्स ने पाकिस्तान में उच्च स्तर पर फैले भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया, इससे एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि पाकिस्तान की सामरिक संपत्तियां- परमाणु हथियार और परमाणु सक्षम मिसाइलों की सुरक्षा कितनी सुरक्षित है?

यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब लगातार और गंभीर संदेहों से घिरे रहे अब्दुल कादिर खान को उस देश के परमाणु कार्यक्रम का जनक बताकर पाकिस्तान के राष्ट्रीय नायक के रूप में (सरकार प्रायोजित) स्थापित करने का प्रयास हो रहा है.

इसके आगे जो हुआ वह भी जानिए.

असल विवाद

पाकिस्तानी सेना की सामरिक बल कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उबैदुल्ला खान खट्टक को सितम्बर 2015 में उसके पद से हटा दिया गया था, क्योंकि उनके द्वारा लिए गए कुछ फैसलों में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे जिनमें उन्हें दोषी पाया गया.

पाकिस्तानी सेना के मुखिया जनरल राहील शरीफ ने उनको पद से हटाने का फैसला एक जांच रिपोर्ट के बाद लिया. रिपोर्ट में पाया गया था कि ब्लूचिस्तान में फ्रंटियर कांस्टेबलरी (एफसी) में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है. 

इस रिपोर्ट के आधार पर कई वरिष्ठ अधिकारियों को कार्रवाई का सामना करना पड़ा जिसमें ले. जनरल खट्टक भी शामिल थे, जो 2010 से 2013 तक सेना के आईजी थे. इसके बाद ही उन्हें सेना की संवेदनशील सामरिक बल कमान का कमांडर बनाया गया था.

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सेना ने ले. जनरल खट्टक और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवार्इ की बात जानबूझकर लीक की ताकि पनामा पेपर्स पर्दाफाश मामले में सख्त कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर दबाव बनाया जा सके.

पनामा पेपर्स ने खुलासा किया है कि शरीफ के बच्चे विदेशी कंपनियों के मालिक हैं और उनसे मुनाफा कमा रहे हैं. इस पर्दाफाश ने पाकिस्तान की घरेलू राजनीति पर सीधा और गंभीर असर तो डाला ही है, साथ ही नवाज शरीफ को गंभीर राजनीतिक संकट में डाल दिया है. इतना ही नहीं, इस पर्दाफाश ने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा प्रक्रिया का स्याह पहलू भी उजागर कर दिया है.

ऐसा ही कुछ पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार सैयद तलत हसन ने भी लिखा है, “इस बात पर पूरी दुनिया का ध्यान जाएगा कि बर्खास्त किए गए सैन्य अफसर किस तरह के सामरिक महत्व के पदों पर बैठे थे. ऐसे में सिविल सरकार में गड़बड़ी की अटकलों को पाकिस्तान कैसे रोक पाएगा?”

ऐसा क्यों है?

पाकिस्तान के परमाणु हथियारों, रेडियोएक्टिव पदार्थों और मिसाइल सिस्टम की सुरक्षा और संरक्षा अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रहा है. पाकिस्तान के ये हथियार आतंकवादियों के हाथ लग सकते हैं, इस डर ने ही अंतरराष्ट्रीय आशंकाओं को बढ़ावा दिया है. 

पाकिस्तान में बहुत बड़े स्तर पर धार्मिक कट्टर विचारधारा वाले आतंकवादी समूहों की मौजूदगी और उनके समर्थकों की बड़ी संख्या ने इन आशंकाओं और आरोपों को और बढ़ाने का सशक्त मौका दिया है.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस संवेदनशील पद पर तैनाती से पहले उनकी निष्ठा को जांचने के लिए किस तरह की जांच की गई थी

पिछले कुछ दशकों में, विशेषकर जनरल जिया-उल-हक के बाद से पाकिस्तान सेना के अधिकारी और सिपाही धार्मिकता से बुरी तरह ओत-प्रोत हुए हैं. इस कारण भी पाकिस्तान की परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर डर बढ़ा है.

पाकिस्तान दावा कर चुका है कि उसने अपने परमाणु हथियारों की भौतिक सुरक्षा के फुल-प्रूफ इंतजाम कर रखे हैं और सामरिक महत्व की संपत्तियों से जुड़े सभी व्यक्तियों की सही पहचान के लिए मजबूत कार्यक्रम बनाया गया है. 

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अब सेना की सामरिक बल कमान के कमांडर को भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद हटा देने से उसके इस पुख्ता कार्यक्रम के प्रभाव पर सवाल उठने स्वाभाविक हैं.

ले. जनरल खट्टक को इतना संवेदनशील पद स्वाभाविक रूप से तभी दिया गया होगा, जब उनका कॅरियर रिकॉर्ड बहुत अच्छा रहा होगा. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस संवेदनशील पद पर तैनाती से पहले उनकी निष्ठा को जांचने के लिए किस तरह की जांच की गई थी? यही वह सवाल है जिसका जवाब पाकिस्तान को देने की जरूरत है.

पाकिस्तान की परमाणु संपत्तियां

इस संदर्भ में मामले की गंभीरता तय करने के लिए पाकिस्तान की परमाणु संपत्तियों की कमान और नियंत्रण ढांचे के साथ-साथ उन उपायों पर संक्षेप में प्रकाश डालने की जरूरत है, जिसका दावा पाकिस्तान करता आ रहा है कि संवेदनशील हथियारों की सुरक्षा से पहले व्यक्तिगत पहचान के लिए वे उपाय अपनाए जाते हैं.

पाकिस्तान ने अपना पहला परमाणु हथियार परीक्षण भारत के ठीक बाद मई 1998 में किया था. सामरिक महत्व की पाकिस्तान की संपत्तियों की सुरक्षा पर जब अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ने लगी तब पाकिस्तान ने बहु-स्तरीय नियंत्रण प्रणाली की घोषणा की. 

इनमें शीर्ष पर राष्ट्रीय कमान प्राधिकरण है जिसका अध्यक्ष पाकिस्तान का प्रधानमंत्री होता है और कुछ मंत्री एवं रक्षा सेवा के कुछ प्रमुख अधिकारी इसके सदस्य होते हैं.

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पाकिस्तान का दावा है कि परमाणु हथियारों के उपयोग की अनुमति सिर्फ यही प्राधिकरण दे सकता है. राष्ट्रीय कमान प्राधिकरण की सहायता के लिए एक सामरिक योजना डिवीजन भी बनाई गई है. यह डिवीजन पूरी तरह से सेना द्वारा नियंत्रित होती है और तीन सितारों वाला जनरल इसका मुखिया होता है.

इस प्रकार हथियारों का वास्तविक नियंत्रण, उनका विकास और उनकी तैनाती की रणनीतियों के साथ-साथ उनकी सुरक्षा एवं संरक्षा पूरी तरह से सेना के हाथ में हैं. इन संपत्तियों की सुरक्षा के लिए दो सितारों वालों जनरल के नीचे विशेष बल गठित किया गया है. ऐसी संभावना न के बराबर है कि सेना कभी यह नियंत्रण अपने हाथ से जाने देगी.

अब तक पाकिस्तान ने इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है कि इसकी सुरक्षा व्यवस्था से कैसे फिसल गए

इस व्यवस्था के तीसरे स्तर पर आती है सामरिक बल कमान. तीनों स्तरों में से सबसे महत्वपूर्ण और सबसे शक्तिशाली सेना के नियंत्रण वाली कमान है क्योंकि यही मिसाइलों की देखरेख और भंडारण करती है तथा हथियारों की आपूर्ति करती है. 

इस कमान के मुखिया ले. जनरल खट्टक की ईमानदारी पर सवाल लग चुके हैं, क्योंकि उन्हें गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद ही हटाया गया है, ऐसे में यह पूरी कमान की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो जाते हैं.

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ऐसा इस तथ्य के कारण भी है कि सामरिक संपत्तियों से जुड़े सभी नागरिकों और सेना के लोगों की पहचान के लिए बनाया गया पाकिस्तान का संपूर्ण कार्मिक विश्वसनीयता कार्यक्रम वहां की कुछ खुफिया एजेंसियों द्वारा पूरी तरह से पुनरीक्षित किया गया है. 

इनमें आईएसआई भी है, जिस पर शुरू से ही गंभीर संदेह रहे हैं. वास्तव में पाकिस्तानियों की बात पर भरोसा करें तो ये लोग सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने पदों पर जम रहते हैं. ऐसी प्रक्रिया पर कितना भरोसा किया जा सकता है?

अब तक पाकिस्तान ने इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है कि इसकी सुरक्षा व्यवस्था से कैसे फिसल गए. पाकिस्तान को इसका स्पष्टीकरण देने की जरूरत है. साथ ही यह भरोसा दिलाने की जरूरत भी है कि वह अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता कर रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात को लेकर संतुष्ट हो सके कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार गलत हाथों में नहीं जाएंगे.

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यह बात इसलिए भी विशेष तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्लूचिस्तान धार्मिक कट्टर आतंकवादी समूहों की सैरगाह है और इनमें से कुछ समूहों के साथ पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों के रिश्ते भी किसी से छिपे नहीं हैं. ले. जनरल खट्टक को यहां ऐसे बल में तैनात किया गया था जिससे सीमाओं की हिफाजत की उम्मीद की जाती है लेकिन वहां आतंकवादी आराम से खुले घूम सकते हैं और फ्रंटियर कांस्टेबलरी आंखें मूंदे रहती है.

First published: 4 May 2016, 8:13 IST
 
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