Home » इंटरनेशनल » How the Pakistani press reacted to Sushma swaraj pak visit
 

सुषमा स्वराज की यात्रा: थोड़ा सशंकित, थोड़ा संयमित पाकिस्तानी मीडिया

लमट र हसन | Updated on: 10 December 2015, 7:46 IST
QUICK PILL
  • पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से द नेशन ने लिखा है कि जल्द ही दोनों देशों के बीच क्रिकेट की शुरुआत हो सकती है.
  • डॉन और द न्यूज बताता है कि स्वराज की यात्रा से अफगानिस्तान पर होने वाली बहुपक्षीय बातचीत को झटका लग सकता है.

भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की पाकिस्तान यात्रा पर दोनों देशों की निगाहें लगी हुई हैं. हाल के दिनों में सुषमा स्वराज अफगानिस्तान मसले पर होने वाली बहुपक्षीय बैठक में भाग लेने के लिए पाकिस्तान गई हुई थीं. 

पाकिस्तानी मीडिया में उनकी यात्रा को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है. पाकिस्तानी मीडिया का एक हिस्सा इस यात्रा को दोनों देशों के बीच रुकी पड़ी द्विपक्षीय बातचीत की अड़चनों को दूर करने में मददगार बताया है. स्वराज की पाकिस्तान यात्रा से क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा. 

हार्ट ऑफ एशिया कॉन्फ्रेंस में भारत की तरफ से सुषमा स्वराज को पाकिस्तान भेजे जाने के फैसले को सभी पाकिस्तानी अखबारों ने अपनी सुर्खी बनाया है. द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने यात्रा शुरू होने से पहले लिखा, 'यह अब आधिकारिक है. सुषमा स्वराज पाकिस्तान की यात्रा पर आएंगी.' द नेशन ने लिखा है, 'पेरिस की मुलाकात के बाद अब शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का वक्त है.'

डॉन लिखता है कि हॉर्ट ऑफ एशिया कॉन्फ्रेंस में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ घानी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की मौजूदगी इसलिए 'अहम है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान दोनों देशों के साथ पाकिस्तान के संबंध ठीक नहीं रहे हैं.' घानी और स्वराज ने सोमवार तक अपनी पाकिस्तान यात्रा के बारे में खुलासा नहीं किया था.

पेरिस में बना माहौल

स्वराज की अचानक पाकिस्तान यात्रा के सूत्र पेरिस जलवायु सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच हुई छोटी सी मुलाकात में छिपे हैं. माना जा रहा है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को पाकिस्तान भेजे जाने का फैसला लिया उसी के बाद हुआ.

डॉन के मुताबिक, 'पिछले हफ्ते पेरिस में जलवायु सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री शरीफ के प्रेसिडेंट घानी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात ने इस बैठक में दोनों देशों की भागीदारी का रास्ता साफ किया.'

बैंकॉक में भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की गुप्त बैठक के एक दिन बाद भारत ने आधिकारिक तौर पर सुषमा स्वराज को पाकिस्तान भेजे जाने के फैसले के एलान किया.

द नेशन लिखता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय दबाव में पाकिस्तान के साथ बातचीत कर रहा है

अपने मुखपृष्ट पर इस संबंध में प्रकाशित खबर में द नेशन लिखता है, 'भारत के रुख में आया अप्रत्याशित बदलाव उसके ऊपर बन रहे अंतरराष्ट्रीय दबाव को बताता है जिसकी वजह से वह इस्लामाबाद से बातचीत कर रहा है. इस्लामाबाद में तैनात यूरोप के एक राजनयिक ने बताया कि ऐसी बैठक से भविष्य में होने वाली बातचीत का रास्ता निकलता है.' 

रिपोर्ट बताती है, 'पाकिस्तानी अधिकारियों के कश्मीरी नेताओं से मुलाकात के बाद पिछले साल अगस्त में नई दिल्ली ने दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत को रद्द कर दिया था. इसके कई महीनों बाद फिर से दोनों देशों के बीच बातचीत की शुरुआत हुई है.'

भारत  का दावा था कि पाकिस्तान ने जुलाई के उफा घोषणापत्र के मुताबिक केवल आतंकवाद पर बात करने की प्रतिबद्धता जताई थी जबकि इस्लामाबाद ने इस बातचीत में कश्मीर को भी शामिल किए जाने की बात की थी.

द न्यूज सरताज अजीज के हवाले से बताता है कि स्वराज की यात्रा दोनों देशों के बीच मौजूदा अड़चनों को दूर करने की दिशा में अच्छी शुरुआत है. अजीज नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार हैं. वह बताते हैं कि स्वराज शरीफ से भी मुलाकात करेंगी. अजीज ने कहा कि भारत के साथ होने वाली बातचीत का भविष्य स्वराज के साथ होने वाली बातचीत पर निर्भर करता है.

जिन पर होगी नजर

डॉन और द न्यूज बताता है कि स्वराज की यात्रा से अफगानिस्तान पर होने वाली बहुपक्षीय बातचीत को झटका लग सकता है. द न्यूज के मुताबिक स्वराज की यात्रा से अफगानिस्तान मुद्दे से ध्यान हट सकता है. डॉन बताता है कि राजनयिकों को इस बात की आशंका है कि पाकिस्तान-भारत और पाकिस्तान-अफगानिस्तान बातचीत से अफगानिस्तान की शांति प्रक्रिया पटरी से उतर सकती है.

डॉन में छपी एक रिपोर्ट कहती है, 'स्वराज की पाकिस्तान यात्रा पर उनकी सहयोगियों की तीखी प्रतिक्रिया आई है.' हालांकि अपने दक्षिणपंथी सहयोगियों को सामना करते हुए स्वराज ने पाकिस्तान की यात्रा के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया है.

इस्लामाबाद दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत में कश्मीर को शामिल किए जाने की मांग करता रहा हैपूर्व विदेश मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने कहा, 'भारत पर लगातार आतंकी हमले होते रहे हैं और भारत खुद कहता रहा है कि इन हमलों के पीछे पाकिस्तान है. तो फिर ऐसे में बातचीत का क्या मतलब बनता है?' उन्होंने कहा, 'सरकार की जिम्मेदारी जनता के प्रति बनती है और उन्हें देश को भरोसे में लेना चाहिए कि वह क्यों बातचीत बहाल कर रहे हैं.'

क्रिकेट डिप्लोमेसी

द नेशन ने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित क्रिकेट सिरीज के बारे में भी लिखा है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से द नेशन ने लिखा है कि जल्द ही दोनों देशों के बीच क्रिकेट की शुरुआत हो सकती है.

रिपोर्ट के मुताबिक सुषमा स्वराज प्रधानमंत्री शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज के साथ होने वाली बैठक में दोनों देशों के बीच टेस्ट सीरिज का प्रस्ताव रख सकती हैं. दोनों देशों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की बैठक के पहले तक भारत-पाकिस्तान के क्रिकेट सीरिज के प्रस्ताव को नकारता रहा है.

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपनी रिपोर्ट का शीर्षक दिया है- 'मोदी-नवाज भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट सिरीज को हरी झंडी दे सकते हैं'. इसके मुताबिक दोनों नेताओं ने क्रिकेट सीरिज की हामी भर दी है. अखबार बताता है कि दोनों देशों के बीच जल्द ही मैच होंगे क्योंकि भारत और पाकिस्तान सैद्धांतिक तौर पर इसके लिए राजी हैं और इसकी घोषणा मंगलवार को की जाएगी.

कहां हुई चूक

2014 में पीएम बनने के बाद से नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. सीमा पार से होने वाली गोलबारी के जवाब में भारतीय सुरक्षा बलों को आक्रामकता के साथ जवाबी कार्रवाई करने की छूट दी गई. मोदी ने भारत के खिलाफ होने वाली आतंकी कार्रवाई पर रोक लगाने की भी मांग की है. 

2012 में एस एम कृष्णा के बाद से सुषमा स्वराज की पाकिस्तान यात्रा पहली मंत्री स्तरीय वार्ता है

मोदी और शरीफ के बीच पेरिस में हुई बातचीत सार्थक रही है और इसके तुरंत बाद बैंकॉक में दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की मुलाकात हुई है. 

इससे पहले भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच 23 और 24 अगस्त को दिल्ली में बातचीत होनी थी लेकिन भारत की शिकायत के बावजूद पाकिस्तानी अधिकारियों ने कश्मीरी अलगाववादियों से मुलाकात की जिसके जवाब में भारत ने बातचीत रद्द कर दी.

पाकिस्तान ने तब कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बीच होने वाली बातचीत अगर इतनी सारी शर्तों के साथ होगी तो इसका कोई मतलब नहीं है. स्वराज ने तब जोर देकर कहा था कि एनएसए की बातचीत केवल आतंकवाद पर होगी जिस पर उफा में सहमति बनी थी. इस मामले में किसी तीसरे पक्ष को शामिल नहीं किया जाएगा.

First published: 10 December 2015, 7:46 IST
 
लमट र हसन @LamatAyub

Bats for the four-legged, can't stand most on two. Forced to venture into the world of homo sapiens to manage uninterrupted companionship of 16 cats, 2 dogs and counting... Can read books and paint pots and pay bills by being journalist.

पिछली कहानी
अगली कहानी