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भारत की बड़ी जीत: ICJ ने कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगाई

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 May 2017, 9:53 IST

कुलभूषण जाधव के मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भारत की बड़ी जीत हुई है. आईसीजे ने पाकिस्तान में बंद कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगा दी है. कोर्ट का यह फैसला पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने अप्रैल में कुलभूषण को जासूसी और आतंकी गतिविधियों का दोषी क़रार देते हुए फांसी की सज़ा सुना दी थी. इसके ख़िलाफ़ भारत ने अंतरराष्ट्रीय अदालत का रुख किया था. 

परिवार में खुशी की लहर

इस फैसले के बाद कुलभूषण जाधव के परिवार में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है. उनकी सलामती के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में हवन और पूजा अर्चना की जा रही थी. मुंबई में फिलहाल जश्न जैसा माहौल है. उनके समर्थक भारत माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं. 

पाकिस्तान का कहना है कि कुलभूषण जाधव ने बलूचिस्तान और कराची में कई आतंकी गतिविधियों की साजिश रची और वह बतौर रॉ एजेंट (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) पाकिस्तान में गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल थे. आईसीजे ने फांसी की सजा पर रोक लगाते हुए कहा कि कुलभूषण के जासूस होने का पाकिस्तान का दावा सही नहीं है.

 

नीदरलैंड्स के हेग स्थित आईसीजे के 11 जजों की बेंच ने मामले की सुनवाई की.

ICJ के अध्यक्ष रॉनी अब्राहम ने सुनाया फैसला

अंतरराष्ट्रीय अदालत के अध्यक्ष रॉनी अब्राहम ने यह फैसला सुनाया है. कोर्ट ने जासूसी को वियना संधि से बाहर रखने का तर्क भी खारिज किया है. हेग में भारत की नुमाइंदगी कर रहे वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने दलील दी थी कि कुलभूषण का मामला वियना संधि के दायरे में आता है.

रॉनी अब्राहम के इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय फोरम पर भारत की बड़ी जीत हुई है. आईसीजे के आदेश के बाद अब भारत के राजनयिक पाकिस्तान की जेल में कुलभूषण जाधव से मिल सकेंगे. भारत ने आरोप लगाया था कि 16 बार कॉन्सुलर एक्सेस की इजाज़त मांगने के बावजूद पाकिस्तान ने मना कर दिया, जो कि वियना संधि का सरासर उल्लंघन है.

भारत ने बताया था वियना संधि का उल्लंघन

सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने इस मामले में भारत का पक्ष रखा था. साल्वे को 90 मिनट का समय दिया गया. इस दौरान साल्वे ने मजबूती से जाधव की सज़ा के ख़िलाफ़ दलीलें कोर्ट के सामने रखीं.

इसके बाद पाकिस्तान की विदेश सचिव फहमीना जंजुआ को मौका दिया गया था. वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने मांग की कि इस केस की अंतरराष्ट्रीय अदालत में सुनवाई चलने तक कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगाई जानी चाहिए. उन्होंने इस दौरान आरोप लगाया कि कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई ने फंसाया है.

साल्वे की मजबूत दलीलों से फ़ायदा

साल्वे ने जाधव के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि उनका जो भी कुबूलनामा पब्लिक डोमेन में मौजूद है, वह पाकिस्तानी सेना की हिरासत में लिया गया है. साल्वे ने पाकिस्तान की इस कार्रवाई को वियना संधि का उल्लंघन क़रार दिया था. 

इस मामले में सोमवार को ही पाकिस्तान को झटका लग गया था, जब आईसीजे ने जाधव के कथित कबूलनामे का वीडियो अदालत में पेश किए जाने से मना कर दिया था. 

देश के बड़े वकील हरीश साल्वे ने अंतरराष्ट्रीय अदालत में भारत का पक्ष रखा था.

भारत को नहीं सौंपी गई चार्जशीट

90 मिनट के दौरान हरीश साल्वे ने पाकिस्तान को ख़ूब खरी-खोटी सुनाई. उन्होंने साफ कहा कि जाधव पर लगाए गए आरोप गलत हैं. साल्वे ने कहा कि पाकिस्तान ने कुलभूषण की मां की अपील भी ख़ारिज कर दी.

हरीश साल्वे ने कहा कि जाधव के परिवार को पाकिस्तान जाने का वीज़ा नहीं दिया गया और 16 बार इजाजत मांगने के बावजूद कुलभूषण से मिलने के लिए कॉन्सुलर एक्सेस नहीं दी गई, जो सरासर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. 

साल्वे ने इंटरनेशनल कोर्ट में कहा कि पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने बिना भारत का पक्ष सुने उन्हें सज़ा सुनाई है. यही नहीं इस केस की चार्जशीट तक भारत को अभी नहीं सौंपी गई है. 

First published: 18 May 2017, 16:16 IST
 
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