Home » इंटरनेशनल » IKEA designed a unique refugee camp
 

आइकिया ने बनाया शरणार्थियों के लिए किफायती और टिकाऊ टेंट

असद अली | Updated on: 28 November 2015, 21:32 IST
QUICK PILL
  • दुनिया भर में शरणार्थियों के आवास की समस्या को सुलझाने के लिए आइकिया फॉउंडेशन ने तैयार किया बेहतरीन, सस्ता और आसान विकल्प .
  • यूएन के टेंट की तुलना में आइकिया के टेंट किफायती और टिकाऊ हैं. नेपाल में आए भीषण भूकंप के बाद इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ है.

घरेलू फर्नीचर और होम अप्लायंस बनाने वाली मल्टीनेशनल कंपनी आइकिया ने संकटग्रस्त मुल्कों के शरणार्थियों के लिए एक नई पहली की है. कंपनी की नॉन-प्रॉफिट इकाई आइकिया फाउंडेशन ने हाल ही में एक नया टेंट डिजाइन किया है. ये टेंट शरणार्थी परिवारों को रहने के लिए एक बेहतर आवास मुहैया कराएंगे. 

2015 की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) ने दुनिया भर के शरणार्थियों को बेहतर आवास मुहैया कराने के लिए बेहतर डिजाइन और शानदार कार्यक्षमता वाले 10 हजार टेंटों का ऑर्डर दिया था. संयुक्त राष्ट्र के कैंपों की तुलना में ये कैंप, किफायती, बड़े और तीन सालों तक चलने वाले हैं. संयुक्त राष्ट्र के टेंट करीब छह महीने तक ही चलते हैं.

ikea-tent-embed-better-shelter-nepal-web

नेपाल में लगा टेंट/गेटी इमेजेज

कैसा है टेंट

टेंट के अंदर तकरीबन 57 वर्गफीट स्थान है जिसकी ऊंचाई छह फीट है. सोलर पैनल लगे इन टेंटों में मच्छरदानी, रोशनी और वेंटिलेशन की बेहतरीन व्यवस्था है. 

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन टेंटों में बंद करने लायक दरवाजे हैं. इससे युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में यौन उत्पीड़न की संभावना कम हो सकती है. 

बेहद हल्के और फोम के पैनलों से बने इन टेंटों की बाहरी परत की वजह से बारिश, हवा, बर्फ और गर्मी का असर नहीं होता. इन टेंटों को बनाने या जोड़ने में केवल चार से आठ घंटे का ही वक्त लगता है. आइकिया एक टेंट को दो बड़े आकार के गत्ते के डिब्बों में भेजती है. जिन्हें चार लोग आसानी से उठा सकते हैं. 

टेंटों की सप्लाई का लंबा ऑर्डर लेने से पहले कंपनी इराक और इथियोपिया में 40 शरणार्थी परिवारों को इनके सैंपल टेंटों में रखकर इनका परीक्षण कर चुकी है. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब आइकिया ने शरणार्थियों के जीवन में सुधार की कोशिश की है. 

2010 से लेकर अब तक कंपनी करीब 1095 करोड़ रुपये यूएनएचसीआर को दे चुकी है. 2014 में कंपनी ने 'द ब्राइटर लाइव्स फॉर रिफ्यूजीस' नामक अभियान शुरू किया. इसके जरिये कंपनी की सोच थी कि, 'शरणार्थी शिविरों को कई परिवारों के रहने के लिए सुरक्षित, अधिक उपयुक्त बनाने के लिए अक्षय ऊर्जा स्रोतों के जरिये रोशनी और ऊर्जा प्रदान की जा सके.'

कैसे जुटाया फंड?


कंपनी अपने स्टोर या ऑनलाइन पर एक एलईडी बल्ब बिकने पर एक पाउंड यूएनएचसीआर को दान देती है.

कंपनी ने घोषणा की है कि वे 29 नवंबर से 19 दिसंबर तक अपना यह अभियान फिर से शुरू करेगी और इससे मिलने वाली रकम का एक हिस्सा  यूएनएचसीआर को देगी.

First published: 28 November 2015, 21:32 IST
 
असद अली @asadali1989

Asad Ali is another cattle class journalist trying to cover Current affairs and Culture when he isn't busy not saving the world.

पिछली कहानी
अगली कहानी