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पाकिस्तान: 67 सालों के बाद हिंदू विवाह विधेयक को मंजूरी

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 February 2016, 19:44 IST

पाकिस्तान में हिंदुओं के लिए विशेष विवाह अधिनियम-2015 जल्द ही कानूनी शक्ल अख्तियार कर सकता है.

इस मामले में पाकिस्तान असेंबली में कानून एवं न्याय की स्थायी समिति ने हिंदू मैरिज बिल-2015 को अपनी मंजूरी दे दी है. संसद में इस विधेयक के पारित होने के बाद हिंदू मैरिज बिल-2015 पाकिस्तान में कानूनी मान्यता प्राप्त कर लेगा.

समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया है कि पाकिस्तान असेंबली में इस कानून के मसौदे पर चर्चा के लिए विशेष तौर पर पांच हिंदू सांसदों को आमंत्रित किया गया था.

स्थायी समिति ने इस मसौदे को दो संशोधनों के बाद एकमत से पास कर दिया है. इस कानून के तहत पाकिस्तान में हिंदू लड़के और लड़की के विवाह की उम्र 18 वर्ष तय हो जायेगी.

इस विधेयक को अब नेशनल असेंबली में पेश किया जाएगा और पाकिस्तान असेंबली में इस विधेयक के पास होने की पूरी उम्मीद है, प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज को इसका समर्थन प्राप्त है.

इससे पहले इस मामले में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के रमेश लाल और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएल-नवाज) के डॉ दर्शन ने संयुक्त रूप से हिंदू मैरिज बिल-2014 और 2015 को असेंबली में एक प्राइवेट बिल के तहत पेश किया था.

मौजूदा विधेयक के मसौदे को स्वीकार करने में हुई देरी पर संसदीय समिति के अध्यक्ष चौधरी महमूद बशीर विर्क ने कहा कि, 'मसौदे को स्वीकार करने में हुई देरी अनुचित है. मुस्लिमों खासतौर पर राजनेताओं को विधेयक को तुरंत पास करना चाहिए, उसके रास्ते में रोड़े नहीं अटकाना चाहिए. यदि 99 फीसद की आबादी वाले मुस्लिम समुदाय के इस मुल्क को एक प्रतिशत से डर लगता है तो हमें अपने अंदर झांकने की जरूरत है.'

हालांकि इस विधेयक पर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की शगुफ्ता जुमानी और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के सांसद अली मुहम्मद खान ने कई सवाल उठाये थे.

वो इस बात पर सवाल उठा रहे थे कि यदि पति या पत्नी में से किसी के द्वारा इस्लाम कुबूल कर लिया जाय तो उस मामले में इस हिंदू शादी का क्या होगा.

इस विधेयक के बारे में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के रमेश लाल का कहना है कि पाकिस्तान में हिंदू मैरिज बिल-2015 के पास होने के बाद पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदूओं को उनके विवाह, पुनर्विवाह, तलाक और बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया को वैधानिकता प्राप्त होगी, जो पाकिस्तान में पिछले 67 सालों से नहीं थी.

First published: 9 February 2016, 19:44 IST
 
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