Home » इंटरनेशनल » in turkey: army coup attempt by army
 

तुर्की में तख्तापलट की कोशिश नाकाम, संघर्ष में अब तक 161 की मौत

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 July 2016, 16:38 IST
(गेट्टी)

तुर्की में सेना के एक गुट के द्वारा तख्तापलट की कोशिश के दौरान झड़पों में 161 लोगों की मौत हुई है. प्रधानमंत्री बिनाली युल्दरम ने आधिकारिक बयान देते हुए इसकी पुष्टि की है. मारे गए ज्यादातर लोग आम नागरिक हैं. इसके साथ ही सेना ने एलान किया है कि तख्तापलट की कोशिश नाकाम हो गई है.

इस बीच इस्तांबुल में बॉसपोरस पुल को कब्जे में लिए सैनिकों की टुकड़ी ने आत्मसमर्पण कर दिया. ये लोग सेना के उस विद्रोही समूह का हिस्सा हैं, जिसने मुल्क में तख्तापलट की कोशिश की थी. 

इस्तांबुल में बागी सैनिकों के गुट का सरेंडर

तुर्की के सरकारी टीवी में वो लोग हाथों को सर पर रखकर चलते नजर आए. इन लोगों ने फौजी लिबास पहन रखे थे. सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक 50 जवानों को गिरफ्तार किया गया.

प्रधानमंत्री ने एक टीवी चैनल से कहा, "ये सच है कि तख्तापलट का प्रयास किया गया है. सेना की बगावत को नाकाम किया जाएगा और देश में प्रजातंत्र कायम रहेगा." 

सेना प्रमुख को बनाया था बंधक

तुर्की के राष्ट्रपति रैचेप तैयप एर्दोआन ने तख्तापलट के प्रयास को देशद्रोह करार दिया है. वो पुलिस सुरक्षा में सुरक्षित इस्तांबुल पहुंच गए हैं. इस्तांबुल पहुंचने पर राष्ट्रपति ने कहा कि कोई भी तानाशाह ताकत देश की मर्जी के आगे नहीं खड़ी हो सकती है.

पढ़ें: तस्वीरें: जब राष्ट्रपति की अपील पर रात भर जागा तुर्की और जीता लोकतंत्र

सत्तापलट की कोशिश करने वाले सेना के एक समूह ने शुक्रवार रात को सेना प्रमुख को भी बंधक बना लिया था. समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक कार्यवाहक सेना प्रमुख ने कहा है कि तख्तापलट की कोशिश को नाकाम कर दिया गया है.

तुर्की की सेना के मुताबिक हिंसक झड़पों में 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज किया जा रहा है.

प्रधानमंत्री ने इस्लामी धर्मगुरु फतेहउल्लाह गुलेन समर्थकों पर तख्तापलट की कोशिश का आरोप लगाया (एजेंसी)

भारतीयों के लिए इमरजेंसी नंबर जारी

वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बताया कि अंकारा में भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों को स्थिति सामान्य होने तक घरों के अंदर रहने और बाहर न जाने की सलाह दी है.

उन्होंने भारतीय नागरिकों के लिए राजधानी अंकारा में इमरजेंसी नंबर +905303142203, जबकि इस्तांबुल में इमरजेंसी नंबर +905305671095 जारी किए हैं.

भारत में तुर्की के राजदूत बुराक अक्कपार ने कहा कि तुर्की में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को हटाने के लिए तख्तापलट की कोशिश की गई थी, यह प्रयास नाकाम हो गया है.

साथ ही तुर्की के राजदूत ने उम्मीद जताई कि वहां जल्द ही हालात सामान्य हो जाएंगे. उनका कहना है कि हालात अब पूरी तरह से नियंत्रण में हैं.

पढ़ें: तुर्की में तख्तापलट की कोशिश के बाद फतेहउल्लाह गुलेन चर्चा में

पीस काउंसिल के नियंत्रण का एलान

इससे पहले एक अप्रत्याशित घटनाक्रम के तहत सेना के एक धड़े के ज़रिए टीवी पर प्रसारित बयान में कहा गया था कि देश पर 'पीस काउन्सिल' का नियंत्रण है. कर्फ़्यू और मार्शल लॉ लागू कर दिया गया है. इस बयान में ये भी कहा गया कि तुर्की में नया संविधान होगा.

तुर्की के प्रधानमंत्री बिनाली युल्दरम ने इसकी निंदा की थी और कहा था कि सत्ता पर सरकार का पूरी तरह से नियंत्रण है. तुर्की के एनटीवी पर जारी एक बयान में कहा गया, "देश की सत्ता पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया गया है." एक रिपोर्ट के मुताबिक अंकारा में तुर्की के सरकारी टीवी के दफ़्तर में सैनिक घुस गए थे.

बदलते घटनाक्रम के बीच इस्तांबुल में पुल को बंद कर दिया गया. बॉस्फ़ोरस और फ़तिह सुल्तान मेहमत ब्रिज पर ट्रैफ़िक को रोक दिया गया. टीवी पर जारी एक बयान में कहा गया था कि सेना ने लोकतंत्र को बचाने के लिए ये कदम उठाया है.

तुर्की की संसद के पास सेना के द्वारा विस्फोट किये जाने के कारण 12 पुलिसकर्मी घायल हो गए. वहीं तुर्की की खुफिया एजेंसी एमआईटी ने दावा किया है कि हालात अब सामान्य हो गए हैं.

फतहउल्लाह गुलेन समर्थकों पर आरोप

पीएम बिनाली युल्दरम ने कहा कि ये अमेरिका के मुस्लिम मौलवी फतेहउल्लाह गुलेन के समर्थकों की ओर से तख्ता पलट का प्रयास था. हालांकि गुलेन से जुड़े संगठन ने पीएम के इन आरोपों का खंडन किया है.

बगावत करते हुए सेना के एक गुट ने पुलिस स्पेशल फोर्स के मुख्यालय पर हवाई हमला किया, जिसमें 17 पुलिस अधिकारियों की मौत हो गई थी. तुर्की की संसद के सामने भी सेना के बागी गुट ने अपने टैंक तैनात कर दिए थे.

इसके बाद इस्तांबुल शहर में जनता राष्ट्रपति रैचप तैयप एर्दोआन और सरकार के समर्थन में सड़कों पर उतर गई. इससे बौखलाए सेना के बागी गुट ने सड़कों पर जमा भीड़ पर गोलियां बरसाईं.

अब सेना के कब्जे में इस्तांबुल एयरपोर्ट

वहीं बगावत के मद्देनजर तुर्की में फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब समेत पूरे सोशल मीडिया पर बैन लगा दिया गया है. इसके अलावा कई चैनलों को ऑफ एयर कर दिया गया.

शुक्रवार को सेना के एक समूह ने दावा किया था कि उसने सत्ता पर कब्जा कर लिया है. इस बीच बताया जा रहा है कि इस्तांबुल का हवाई अड्डा सेना के कब्जे में है और विमानों की आवाजाही शुरू हो चुकी है. हालात बिगड़ने पर उड़ानें कुछ देर के लिए रद्द हो गई थीं.

तुर्की के कार्यकारी सेना प्रमुख ने कहा है कि तख्तापलट की कोशिश नाकाम कर दी गई है
First published: 16 July 2016, 16:38 IST
 
अगली कहानी