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जानिए क्या है तुर्की में कुछ सैनिकों की असफल बगावत की कहानी

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 July 2016, 18:23 IST

तुर्की में शुक्रवार की रात सेना के बागी गुट के द्वारा तख्तापलट की नाकाम कोशिश की गई. सेना के विद्रोही गुट राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन के 13 साल की गद्दी को उखाड़ फेंकना चाहते थे, लेकिन तुर्की की आठ करोड़ की जनसंख्या ने पूरी रात आखों में काटकर इस बगावत को धूल चटा दी.

इससे पहले भी तुर्की में वर्ष 1960, 1971 और वर्ष 1980 में भी सरकारों का तख़्तापलट हो चुका है.

बगावत नाकाम होने के बाद राष्ट्रपति एर्दोआन ने शनिवार शाम दावा किया था कि अब सत्ता पर उनका दोबारा नियंत्रण हो गया है. इस बीच मृतकों की तादाद बढ़कर 250 तक पहुंच गई है.

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शहर के प्रसिद्ध तकसीम स्क्वायर पर बागी सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई जिससे अनेक लोग घायल हुए. ये लोग सेना के विद्रोही गुट के तख्तापलट के प्रयासों का विरोध कर रहे थे.

ये वही तकसीमा स्क्वायर है, जहां पर आज से तीन साल पहले एर्दोगन के खिलाफ जनता ने भारी विरोध प्रदर्शन किया था.

हजारों सैनिक हिरासत में, जज हटाए गए

तुर्की पुलिस के द्वारा तख्तापलट की कोशिश में 2,839 बागी सैनिकों को हिरासत में लिया गया है. टेलीविजन पर तख्तापलट की विफलता के बाद बड़ी संख्या में सैनिक आत्मसमर्पण करते हुए नजर आए. कुछ ने अपने हाथ उठा रखे थे जबकि कुछ जमीन पर लेटे थे.

तुर्की मीडिया के हवाले से इस बात की भी खबर आ रही है कि सरकार ने देश के करीब 2,745 जजों को उनके काम से हटा दिया है.

वहीं तुर्की सरकार ने इस साजिश के लिए अमेरिका में बैठे राष्ट्रपति एर्दोगन के प्रतिद्वंद्वी धर्मगुरू फतहुल्ला गुलेन को जिम्मेदार ठहराया.

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प्रधानमंत्री बिनाली यिलदीरिम ने कहा कि, हालात अब पूरी तरह नियंत्रण में हैं. उनके साथ तुर्की के शीर्ष जनरल भी थे, जिन्हें बागियों ने बंधक बना लिया था.

तुर्की के पीएम यिलदीरिम ने देश में सेना के विद्रोही गुट के द्वारा तख्तापलट के प्रयासों को लोकतंत्र के लिए काला धब्बा बतया.

राष्ट्रपति ने की थी अपील

सैन्य विद्रोहियों के द्वारा तख्तापलट की कोशिश के दौरान एर्दोगन की जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी के समर्थकों ने बड़ी संख्या में झंडा लहराते हुए कर्फ्यू का उल्लंघन किया और तख्तापलट की कोशिश रोकने के लिए उन्होंने पूरी रात सड़कों पर मार्च किया.

एर्दोगन ने सड़कों पर उतरे लोगों से अपील में कहा कि, हमें आज रात सड़कों पर कब्जा बनाए रखना चाहिए चाहे कोई भी स्थिति हो क्योंकि नया प्रयास किसी भी समय हो सकता है.

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जानकारों के मुताबिक तुर्की की सेना को उस धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र का रक्षक माना जाता है, जिसकी स्थापना वर्ष 1923 में मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने की थी.

सेना ने वर्ष 1960 के बाद से तुर्की में तीन बार तख्तापलट की कोशिश की और वर्ष 1997 में इस्लामी सरकार को बेदखल कर दिया था.

गुलेन पर लगाया आरोप

एर्दोगन ने तख्तापलट के लिए तत्काल समानांतर सरकार और पेंसिलवानिया को जिम्मेदार ठहराया. उनका इशारा पेंसिलवानिया आधारित फतहुल्ला गुलेन की ओर था.

गुलेन उनके धुर विरोधी हैं तथा एर्दोगन ने उन पर हमेशा सत्ता से बेदखल करने के प्रयास का आरोप लगाया, परंतु राष्ट्रपति के पूर्व सहयोगी गुलेन ने इससे इनकार करते हुए कहा कि उनका तख्तापलट की इस कोशिश से कोई लेना देना नहीं है और उन पर आरोप लगाना अपमानजनक है.

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तुर्की के प्रधानमंत्री यिलदीरिम ने गुलेन को आतंकवादी नेता करार देते हुए उसे शरण देने के लिए अमेरिका पर भी निशाना साधा.

उन्होंने कहा कि, उसके पीछे जो भी देश है, वह तुर्की का मित्र नहीं है और उसने तुर्की के खिलाफ गंभीर युद्ध छेड़ रखा है.

वहीं दूसरी ओर तुर्की के इन आरोपों पर सफाई देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री जान केरी ने कहा कि यदि तुर्की के पास गुलेन के खिलाफ कोई सबूत है तो वह उसे सौंपे.

सामान्य हो रहा जनजीवन

विद्रोह के बाद इस्तांबुल में अब जनजीवन सामान्य हो रहा है. यातायात के लिए सड़कों और रेलमार्गों को फिर से खोला जा रहा है.

विद्रोहियों द्वारा बंद किए गए अतार्कुक हवाई अडडे को भी फिर से खोला दिया गया है, लेकिन अमेरिका ने कहा है कि तख्तापलट की कोशिश के बाद फैली अनिश्चितता के कारण उसने तुर्की की अपनी सारी उड़ानें निलंबित कर दी हैं और तुर्की से अमेरिका आने वाली सभी एयरलाइनों पर रोक लगा दी है.

तुर्की के हालात की वजह से इस्तांबुल हो रही यूनेस्को की विश्व धरोहर बैठक को भी स्थगित कर दिया गया है.

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तमाम मुल्कों ने किया समर्थन

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने तुर्की सरकार के समर्थन का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि वह लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई है. इस मामले में नाटो प्रमुख जेंस स्टोनटेनबर्ग ने कहा कि तुर्की में लोकतंत्र और लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार के प्रति लोगों और राजनीतिक दलों ने मजबूत समर्थन दिखाया गया.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने तुर्की में तख्तापलट के प्रयास की निंदा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और स्थिर तुर्की में पाकिस्तान का हित है.

भारतीय नागरिकों के लिए इमरजेंसी नंबर +905303142203, +905305671095 जारी किए गए

वहीं ईरान और इस्राइल के संबंध तुर्की की एर्दोगन सरकार से बहुत अच्छे नहीं है, लेकिन उसके बावजूद उन्होंने कल रात के घटनाक्रम की निंदा की है.

ब्रिटेन ने तुर्की में मौजूद अपने नागरिकों से कहा है कि वे बाहर नहीं निकलें. ब्रिटिश विदेश मंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि वह तुर्की के घटनाक्रम से बहुत चिंतित हैं और ब्रिटेन का दूतावास स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

इसके साथ ही भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी तुर्की में रह रहे भारतीय नागरिकों को स्थिति सामान्य होने तक घरों के अंदर रहने और बाहर न जाने की सलाह दी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने भारतीय नागरिकों के लिए अंकारा में इमरजेंसी नंबर +905303142203 जबकि इस्तांबुल में इमरजेंसी नंबर +905305671095 जारी किए हैं.

First published: 17 July 2016, 18:23 IST
 
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