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अज़रबैजान और आर्मेनिया में कौन है भारत के ज्यादा करीब, इतिहास की ये बातें जानकर हैरान हो जाएंगे आप

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 October 2020, 20:48 IST

अज़रबैजान और आर्मेनिया के बीच इन दिनों भारी गोला बारी हो रही है और हालात जंग तक पहुंच गए है. अज़रबैजान का आरोप है कि अर्मेनिया लगातार उसके ठिकानों पर हमला कर रहा है. दूसरी तरफ शुक्रवार को अर्मेनियाई रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि अजरबैजान ने बिना किसी उकसावे के नागोर्नो-काराबाख में जबरदस्त बमबारी की. दोनों देशों के बीच विवाद की वजह नागोर्नो-काराबाख का इलाका ही है.

नागोर्नो-काराबाख की पहाड़ियों पर अज़रबैजान अपना हक जताता है, जबकि साल 1994 के बाद से ही इस पर अर्मेनिया का कब्जा है. इस विवादित हिस्से को लेकर कई बाद देनों देश एक दूसरे के आमने सामने आ चुके हैं और इस दौरान कई लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है. ऐसा नहीं है कि विश्व के बाकी देशों की निगाह इस युद्ध क्षेत्र पर नहीं है, रूस ने बीते दिनों दोनों देशों के बीच शांति वार्ता करवाई थी, लेकिन 24 घंटे बाद ही यह संघर्षविराम टूट गया और दोनों देशों ने एक दूसरे पर हमला करने का आरोप लगा दिया.


 

बात अगर भारत की करें तो वो दोनों देशों का अच्छा मित्र रहा है. मशूहर अभिनेता राज कपूर साल 1956 में अज़रबैजान गए थे तब राजधानी बाकू में उनका जबरदस्त स्वागत हुआ था, तो आर्मेनिया के लोग भारतीयों को काफी प्यार करतें हैं और वो अंग्रेंजो के भारत पर शासन करने से पहले कर भारत आया-जाया करते थे. आज भी सूरत, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई और कोलकाता के कई शहरों में आर्मेनिया के लोग रहते हैं. ऐसे में भारत इस मामले पर खुलकर किसी का साथ नहीं देता. इसकी दूसरी वजह यह भी है कि यह दोनों देश सोवियत संघ से टूटकर आजाद हुए हैं, ऐसे में रूस जो भारत का करीबी दोस्त रहा है, वो सोवियत संघ से टूटकर बने किसी देश में होने वाले किसी विवाद पर तीसरे देश की दख़लंदाज़ी बर्दाश्त नहीं करता.

आर्मेनिया भारत के ज्यादा करीब

अज़रबैजान और आर्मेनिया की बात करें तो आर्मेनिया भारत के ज्यादा करीब है और भारत और आर्मेनिया का संबंध एक तो दशक नहीं बल्कि सदियों पुराना है.

 

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साहित्यिक दस्तावेंजों के अनुसार, 149 ईसा पूर्व कन्नौज से भागने दो भारतीय राजकुमारों कृष्ण और गणेश ने आर्मेनिया में शरण ली थी और उन्होंने यहां पर भारतीय बस्तियां बसाई थीं. यह दोनों राजा अपने परिवारों के और एक बड़े दल के साथ यहां पहुंचे थे. आर्मेनिया में इन्हें टेरोन क्षेत्र में भूमि आवंटित की गई थी. बता दें, यह क्षेत्र अब तुर्की में पड़ता है.

थॉमस कैना 780 ईस्वी में मालाबार तट पर उतरने वाला पहला आर्मेनिया है. आर्मेनिया में भारतीय शहरों की पहली गाइडबुक 12 वीं शताब्दी में लिखी गई थी. मध्य युग तक, अराशिअन शहर, अराशात, मेट्सबिन और ड्विन भारत के साथ वस्तु विनिमय के लिए आवश्यक केंद्र बन गए थे, जो कीमती पत्थरों, जड़ी-बूटियों को आर्मेनिया को निर्यात करते थे.

माना जाता है कि मुगल बादशाह अकबर की पत्नी मरियम ज़मानी बेगम एक अर्मेनियाई थीं. मरियम ज़मानी बेगम अर्मेनियाई की वाणिज्यिक प्रतिभा और अखंडता के लिए काफी सराहना करती थी और उन्हें कई क्षमताओं में अपने साम्राज्य में सेवा करने के लिए कई विशेषाधिकार और काफी धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की थी. कुछ इतिहास कारों का मानना है कि 16वीं शताब्दी के दौरान अकबर ने आगरा में आर्मेनिया लोगों को बसाया था.

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First published: 17 October 2020, 13:02 IST
 
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