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भारत बना एमटीसीआर का 35वां सदस्य, उच्च मिसाइल तकनीक तक पहुंच

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 June 2016, 12:56 IST
(एमईए ट्विटर )

भारत आज मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) का पूर्ण सदस्य बन गया है. इस अहम ग्रुप का भारत पैंतीसवां सदस्य देश है. तीन दिन पहले चीन और कुछ अन्य देशों के कड़े विरोध के कारण भारत एनएसजी (परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह) की सदस्यता हासिल करने से वंचित रह गया था.

एमटीसीआर में भारत की सदस्यता किसी भी बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था में भारत का पहला प्रवेश है. विदेश सचिव एस जयशंकर ने फ्रांस, नीदरलैंड्स और लक्जमबर्ग के राजदूतों की मौजूदगी में एमटीसीआर में शामिल होने के दस्तावेज पर दस्तखत किया.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने ट्वीट करके इस बारे में जानकारी दी. विकास स्वरूप ने कहा, "हमने पिछले साल एमटीसीआर की सदस्यता के लिए आवेदन किया था. सारी प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं. विदेश सचिव एस जयशंकर ने फ्रांस, नीदरलैंड और लक्जमबर्ग के राजदूतों की मौजूदगी में एमटीसीआर में शामिल होने के दस्तावेज हासिल किए."

समूह का 35वां सदस्य भारत

चीन ने हाल ही में सियोल में संपन्न 48 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की पूर्ण सत्र की बैठक में भारत के प्रवेश की राह में रोड़ा अटकाया. हालांकि चीन 34 सदस्यीय एमटीसीआर का सदस्य नहीं है.

चूंकि, भारत का असैन्य परमाणु करार अमेरिका के साथ है. इसलिए वह एनएसजी, एमटीसीआर, ऑस्ट्रेलिया समूह और वेसेनार अरेंजमेंट जैसे निर्यात नियंत्रण व्यवस्था में शामिल होने का प्रयास कर रहा है.

ये समूह पारंपरिक, परमाणु, जैविक और रासायनिक हथियारों के साथ ही प्रौद्योगिकी का नियमन करते हैं.

उच्च मिसाइल प्रौद्योगिकी की खरीद में सक्षम

पिछले साल इटली ने एमटीसीआर में भारत की सदस्यता का विरोध किया था. वह मरीन विवाद को लेकर भारत से नाखुश था.

हालांकि, केरल तट के पास दो मछुआरों की हत्या के आरोपी दो इतालवी मरीनों को अपने मुल्क वापस लौटने की इजाजत मिलने के बाद इटली ने अपने विरोध के स्वर को नरम कर लिया.

एमटीसीआर में प्रवेश के भारत के प्रयासों को तब प्रोत्साहन मिला, जब उसने इस महीने की शुरुआत में हेग आचार संहिता का हिस्सा बनने पर सहमति जताई. हेग आचार संहिता बैलिस्टिक मिसाइल की अप्रसार व्यवस्था से संबंधित है.

एमटीसीआर की सदस्यता हासिल करने के साथ ही भारत उच्चस्तरीय मिसाइल प्रौद्योगिकी की खरीद करने में सक्षम होगा और रूस के साथ इसके संयुक्त उपक्रम को भी बढ़ावा मिलेगा.

First published: 27 June 2016, 12:56 IST
 
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