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56 साल पुराना सिंधु जल समझौता तोड़कर पाकिस्तान की कमर तोड़ेगा भारत!

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 September 2016, 10:53 IST
(सिंधु नदी)
QUICK PILL
  • उरी हमले के बाद पाकिस्तान को जवाब देने के लिए भारत 1960 में हुआ सिंधु जल समझौता तोड़ सकता है.
  • भारत ने वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में पाकिस्तान के साथ 19 सितंबर 1960 को कराची में यह संधि की थी.
  • संधि पर देश के पहले पीएम नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने दस्तखत किए थे.
  • समझौते के मुताबिक, भारत पाकिस्तान को अपनी सिंधु, झेलम, चिनाब, सतलुज, व्यास और रावी नदी का पानी देता है.
  • इसके तहत पाकिस्तान को 80.52 फीसदी पानी यानी 167.2 अरब घन मीटर पानी सालाना दिया जाता है.
  • 18 सितंबर को नियंत्रण रेखा के पास उरी में सेना बटालियन मुख्यालय पर हमले में 18 जवान शहीद हुए हैं.

उरी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ भारत बेहद सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है. खबर है कि पाकिस्तान को झटका देते हुए भारत 56 साल पुराना सिंधु जल समझौता तोड़ सकता है. अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाएगी.

विदेश मंत्रालय की तरफ से जो संकेत मिल रहे हैं, उससे साफ है कि भारत पाकिस्तान को करारा जवाब देने के लिए 1960 में हुआ नदियों के पानी के बंटवारे से जुड़ा यह समझौता तोड़ सकता है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने इसके साफ संकेत दिए हैं. गुरुवार को विकास स्वरूप ने सिंधु जल समझौते पर कहा, "किसी भी समझौते के दो देशों में आपसी भरोसा और सहयोग होना जरूरी है. यह एकतरफा नहीं हो सकता."

18 सितंबर को हुए उरी हमले के बाद भारत में पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है. (पीटीआई)

'पाकिस्तान को दुनिया जानती है'

उरी हमले के बाद से पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग के तेज होते सुरों के बीच विकास स्वरूप ने कहा, "हमारा काम अपने आप बोलता है और हमारे एक्शन से नतीजे आने शुरू हो गए हैं. संयुक्त राष्ट्र महासभा में किसी भी देश ने कश्मीर के मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं कहा, लेकिन नवाज शरीफ के भाषण का 80 फीसदी कश्मीर पर केंद्रित था."

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पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ ने यूएन में दिए अपने भाषण में कहा था कि वो कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा किए जा रहे मानवाध‍िकारों के उल्लंघन को लेकर संयुक्त राष्ट्र को एक डोजियर सौंपेंगे. साथ ही नवाज ने कश्मीर हिंसा की जांच कराने की मांग की बात कही थी. 

नवाज ने अपने भाषण में खास तौर पर 8 जुलाई को मुठभेड़ में मारे गए हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी को युवा नेता बताते हुए कसीदे कढ़े थे. 

विकास स्वरूप ने कहा, "हमें यूएन महासचिव के बयान में इसका कोई जिक्र नहीं मिला. हमें डोजियर देने की जरूरत नहीं है, पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है."

पढ़ें: बुरहान, कश्मीर समेत वो सारी गैरजरूरी बातें शरीफ ने कहीं जो शांति बहाली की राह में रोड़ा हैं

क्या है सिंधु जल समझौता?

सिंधु नदी संधि को आधुनिक विश्व के इतिहास में सबसे उदार जल बंटवारे के तौर पर जाना जाता है. इसके तहत पाकिस्तान को 80.52 फीसदी पानी यानी 167.2 अरब घन मीटर पानी सालाना दिया जाता है. इस समझौते के तहत छह नदियां आती हैं. 

नदी की ऊपरी धारा के बंटवारे में उदारता की ऐसी मिसाल दुनिया में और‍ किसी जल समझौते में नहीं मिलती. 1960 में हुए सिंधु समझौते के तहत उत्तर और दक्षिण को बांटने वाली एक रेखा तय की गई है, जिसके तहत सिंधु क्षेत्र में आने वाली तीन नदियों का नियंत्रण भारत और तीन का पाकिस्तान को दिया गया है.

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भारत ने वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में पाकिस्तान के साथ 19 सितंबर 1960 को कराची में इंडस वॉटर ट्रीटी की थी. इस संधि पर देश के पहले पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने दस्तखत किए थे.

सिंधु नदी जल समझौते के मुताबिक, भारत पाकिस्तान को अपनी सिंधु, झेलम, चिनाब, सतलुज, व्यास और रावी नदी का पानी देगा. इन नदियों का 80 फीसदी से ज्यादा पानी पाकिस्तान को मिलता है. 

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान से निकलती सिंधु नदी. (विकीपीडिया )

क्या होगा असर?

अगर भारत ने पाकिस्तान को इन नदियों का पानी देना बंद कर दिया, तो पाकिस्तान की कृषि पूरी तरह तबाह हो जाएगी. दरअसल पाकिस्तान में खेती बारिश पर नहीं, बल्कि इन नदियों के पानी पर ही निर्भर है.

यही वजह है कि पाकिस्तान भारत के बगलियार और किशनगंगा पावर प्रोजेक्ट्स का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध करता है. ये प्रोजेक्ट्स बन जाने के बाद उसे मिलने वाले पानी में कमी आ जाएगी और वहां परेशानी बढ़ जाएगी.

ट्रीटी से 60 हजार करोड़ का नुकसान 

2005 में इंटरनेशल वॉटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट और टाटा वॉटर पॉलिसी प्रोग्राम भी इस ट्रीटी को खत्म करने की मांग कर चुके हैं. इनकी रिपोर्ट के मुताबिक, इस ट्रीटी की वजह से जम्मू-कश्मीर को हर साल 60 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो रहा है.

पढ़ें: जानिए उरी हमले में हिंदुस्तान के लिए कुर्बान 18 जवानों के बारे में

ऐसे में छह दशक पुरानी इस संधि के रद्द हो जाने के बाद जम्मू-कश्मीर की घाटी में 20000 मेगावाट से भी ज्यादा बिजली पैदा की जा सकती है. यानी अगर सिंधु जल समझौता टूटता है, तो पाकिस्तान की कमर टूटनी तय है.

First published: 23 September 2016, 10:53 IST
 
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