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लाल मस्जिद मामले में पाकिस्तानी टालमटोल से भारत को सीखना चाहिए

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 January 2016, 15:32 IST
QUICK PILL
  • भारत पाकिस्तानी षडयंत्रकारियों के खिलाफ चाहे कितने भी पुख्ता सबूत जुटा लें और उन पर कार्रवाई की उम्मीद करें, लेकिन जब तक पाकिस्तान के हितों के अनुकूल नहीं होगा तब तक वो किसी तरह की कार्रवाई नहीं करेगा.
  • मुंबई हमलों के संबंध में दिए गए सबूतों पर पाकिस्तान ने बेहद सुस्ती दिखाई है. कैसे लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हफीज सईद की ही तरह \'सबूतों के अभाव\' में 26/11 के मास्टरमाइंड जकीउर रहमान लखवी को भी रिहा कर दिया गया.

हम सब जानते हैं कि मुंबई हमलों के संबंध में दिए गए सबूतों पर पाकिस्तान ने कितना सुस्त रफ्तार से कार्रवाई की. लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हफीज सईद की ही तरह 'सबूतों के अभाव' में 26/11 के मास्टरमाइंड जकीउर रहमान लखवी को रिहा कर दिया गया.

कुछ लोगों को उम्मीद है कि पठानकोट हमले में स्थिति अलग है. इस बार पाकिस्तान गंभीर है, तत्काल कार्रवाई करता दिख रहा है. पाकिस्तान का रुख पहली बार सकारात्मक है.

जानकारों ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सुरक्षा बैठकों की ओर इशारा किया जिसमें सेना प्रमुख जनरल राहिल शरीफ भी उनके साथ बैठे थे. दोनों यह संदेश देने की कोशिश कर रहे थे कि सरकार और सेना इस मामले में एकराय है, कोई मतभेद नहीं है.

इसके तहत हमले की जांच के लिए पाकिस्तान ने एक विशेष संयुक्त जांच दल (एसआईटी/जेआईटी) का गठन किया. जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से संबंधित व्यक्तियों की पंजाब में कुछ गिरफ्तारियां और जैश सुप्रीमो मसूद अजहर को 'हिरासत' में लिया गया.

हालांकि यह देखना बाकी है कि यह कार्रवाई कितनी आगे जाती है और इनका कुछ ठोस परिणाम निकलता है या नहीं. यहां इस बात पर गौर करना जरूरी है कि अतीत में जब पाकिस्तान के साममने इस तरह की स्थितियां उत्पन्न हुई हैं तब पेश सबूतों के साथ उसने क्या रुख अपनाया, उन मामलों अब तक क्या प्रगति हुई.

लाल मस्जिद और अब्दुल अजीज के खिलाफ मामला

इस्लामाबाद स्थित सरकार के स्वामित्व और वित्त पोषित लाल मस्जिद और इसके मौलवी अब्दुल अजीज के मामले से हम काफी कुछ सीख सकते हैं. अजीज ने खुले तौर पर पाकिस्तान में आत्मघाती हमलावर छोड़ देने की धमकी दी थी, ऐसे में उसे गिरफ्तार करना चाहिए था. 

उसने जानलेवा इस्लामिक स्टेट (आईएस) की भी जमकर प्रशंसा की थी. उसने 16 दिसंबर 2014 को आर्मी स्कूल में 130 से अधिक स्कूली बच्चों की नृशंस तरीके से की गई हत्या को जायज ठहराते हुए इसे सेना की कार्रवाई के बाद हुई 'प्रतिक्रिया' कहा था.

इसके बावजूद गृहमंत्री चौधरी निसार अली खान ने 30 दिसंबर 2015 को पाकिस्तान की संसद को सूचित किया कि अजीज के खिलाफ कोई सबूत नहीं था, और अगर कोई था भी तो उसे सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए.

प्रतिष्ठित पाक विद्वान आयशा सिद्दीका ने बताया कि अजीज और उनके परिवार के मामले में पाकिस्तानी सरकार की तरफ से कई बार आंखें मूंदने का इतिहास रहा है. वो भी तब जब पाकिस्तानी दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत उसकी आपराधिक गतिविधियों में भागीदारी की कई रिपोर्टें हैं.

हैरत की बात है कि सात सैन्य अधिकारियों की मौत की जिम्मेदार लाल मस्जिद ब्रिगेड को आज तक दंडित नहीं किया गया. इकलौती निर्णायक कार्रवाई का उदाहरण 2007 का सैन्य अभियान है जब जनरल परवेज मुशर्रफ सत्ता में थे.

उस समय 2007 की घटनाओं के बाद अजीज के खिलाफ ढेरों सबूत जुटा लिए गए थे. पहला, जिसमें इस्लामाबाद न्यायालय ने अनुच्छेद दो की 506 दंड संहिता के अंतर्गत दर्ज एफआईआर संख्या एफ569/14 (जान से मारने की धमकी देने के मामले) के तहत अजीज को "वांछित" घोषित कर दिया था. हालांकि इस मामले में आज तक कोई प्रगति नहीं हुई है.

दूसरा, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों ने 'मौलाना अब्दुल अजीज की गतिविधियां' शीर्षक से एक रिपोर्ट गृह मंत्रालय के पास भेजी थी. इसमें कहा गया था कि लाल मस्जिद के तमाम आतंकी संगठनों से संपर्क रहे हैं. साथ ही लाल मस्जिद के अनुयायियों द्वारा समर्थित आतंकी समूह ग़ाजी फोर्स के निर्माण में अजीज का हाथ था.

तीसरा, पेशावर स्कूल हमले के मद्देनजर तैयार की गई राष्ट्रीय कार्य योजना के कई बिंदुओं का अजीज ने उल्लंघन किया. उदाहरण के लिए उसने बिंदु पांच का उल्लंघन किया, जिसके अंतर्गत असहिष्णुता, सांप्रदायिकता और उग्रवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए थी.

साथ ही आतंकवाद की कार्रवाई की प्रशंसा पर प्रतिबंध लगाने वाले बिंदु 11 को न मानने पर भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. हालांकि ऐसा लगता है कि सरकार की राष्ट्रीय कार्य योजना के उल्लंघन के लिए अजीज को संरक्षण मिला था.

चौथा, जांच एक सरकारी जिम्मेदारी है, लेकिन "नेवर फॉरगेट" नामक एक संगठन ने अजीज के खिलाफ 78 पन्नों का दस्तावेज सभी सांसदों के पास भेजा था. 

इस दस्तावेज़ में अजीज के खिलाफ हुईं एफआईआर, उग्रवादियों और भूमि लुटेरों से संबंधों और अजीज व जामिया हफीजा के इस्लामिक स्टेट को समर्थन की जानकारी दी गई थी. इस दस्तावेज के लेखक, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता जिबरान नसीर ने मीडिया को बताया था कि उसे उम्मीद है कि कम से कम अब तो अजीज के खिलाफ चौधरी निसार कोई कार्रवाई करेंगे.

पाकिस्तान कार्रवाई क्यों नहीं करता

जब चौधरी निसार ने कहा था कि अजीज को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता क्योंकि उसके खिलाफ कोई मामला नहीं है, यह साफ होता है कि वो सच के साथ छेड़खानी कर रहे थे.

उसके खिलाफ तमाम सबूतों और देश की राष्ट्रीय कार्य योजना के उल्लंघन के बावजूद, पाकिस्तानी सरकार ने इसे अजीज के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जरूरी नहीं समझा. 

जाहिर है कहीं न कहीं पाकिस्तान सरकार ने इस बात को समझ लिया है कि अजीज के खिलाफ कोई कार्रवाई न करना उसके लिए फायदेमंद है. यही वजह रही कि वह सेना प्रमुख के आतंकवाद के खिलाफ तमाम कड़े बयानों के बावजूद प्रशासन उसे लगातार नजरअंदाज करता रहा.

जब पठानकोट हमले के संबंध में भारत को पाकिस्तान से सराकात्मक कार्रवाई की उम्मीद है तब यह नहीं भूलना चाहिए कि तमाम सबूतों के सामने होने के बावजूद लाल मस्जिद मामले में पाकिस्तान सरकार ने क्या किया था.

हमें अपनी उम्मीदें एक 'परिणाम उन्मुख' जांच पर केंद्रित करनी चाहिए. आप पाकिस्तानी षडयंत्रकारियों के खिलाफ चाहे कितने भी पुख्ता सबूत जुटा लें और उन पर कार्रवाई की उम्मीद करें, लेकिन जब तक पाकिस्तान के हितों के अनुकूल नहीं होगा तब तक वो कोई कार्रवाई नहीं करेगा.

First published: 18 January 2016, 15:32 IST
 
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