Home » इंटरनेशनल » india not extended visa of china journalist
 

तीन पत्रकारों को भारत से वापस भेजने पर भड़का चीन, कहा भुगतने होंगे गंभीर नतीजे

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 July 2016, 13:22 IST
(एजेंसी)

भारत सरकार के द्वारा चीन के तीन पत्रकारों के वीजा की अवधि बढ़ाने से इनकार किए जाने पर चीन ने एक बार फिर धमकी दी है.

चीन के एक सरकारी समाचार पत्र के लेख में भारत को चेतावनी दी गई है कि अगर यह कदम एनएसजी में भारत की सदस्यता हासिल करने की कोशिश में चीन द्वारा उसका साथ न दिए जाने की प्रतिक्रिया है, तो उसे इस बात के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक चीनी समाचार पत्र ‘द ग्लोबल टाइम्स’ के संपादकीय में कहा गया है, "ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि चूंकि चीन ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत के शामिल होने का विरोध किया, इसलिए भारत चीन से उस बात का बदला ले रहा है. यदि नयी दिल्ली वाकई एनएसजी सदस्यता के मुद्दे के चलते बदला ले रही है तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे."

बताया जा रहा है कि भारत ने चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिनहुआ के तीन पत्रकारों के रहने की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया है.

इन तीन पत्रकारों में दिल्ली स्थित ब्यूरो के प्रमुख वू कियांग और मुंबई स्थित दो संवाददाता- तांग लू और मा कियांग शामिल हैं. इन तीन पत्रकारों के वीजा की अवधि इस महीने के आखिर में पूरी हो रही है. इन तीनों ने ही उनके बाद इन पदों को संभालने वाले पत्रकारों के यहां पहुंचने तक के लिए वीजा अवधि में विस्तार की मांग की थी.

संपादकीय में कहा गया कि भारत के इस कदम को कुछ विदेशी मीडिया संस्थानों ने एक ‘निष्कासन’ करार दिया है. ‘ग्लोबल टाइम्स’ में छपे संपादकीय में कहा गया है, "भारत की ओर से पत्रकारों की वीजा अवधि नहीं बढ़ाए जाने के लिए कोई आधिकारिक कारण नहीं दिया गया."

इस मामले में कुछ भारतीय मीडिया संस्थानों का दावा है कि इन तीन पत्रकारों पर फर्जी नामों का इस्तेमाल कर दिल्ली और मुंबई के कई प्रतिबंधित विभागों में पहुंच बनाने का संदेह है. ऐसी रिपोर्ट भी है कि इन पत्रकारों ने निर्वासित तिब्बती कार्यकर्ताओं से मुलाकात की.

समाचार पत्र ने भारत में अपने पूर्व संवाददाता लु पेंगफेई के हवाले से कहा कि चीनी पत्रकारों को साक्षात्कार लेने के लिए फर्जी नामों का इस्तेमाल करने की कतई आवश्यकता नहीं है और संवाददाताओं के लिए दलाई लामा समूूह का साक्षात्कार लेने का अनुरोध करना पूरी तरह सामान्य बात है.

'भारत द्वारा संवाददाताओं का निष्कासन एक तुच्छ कार्य है' शीर्षक से छपे अखबार के संपादकीय में कहा गया है, "इस कदम ने नकारात्मक संदेश भेजे हैं और इससे चीन एवं भारत के बीच मीडिया संवाद पर निस्संदेह नकारात्मक असर पड़ेगा."

इसमें दावा किया गया है कि एनएसजी में भारत की सदस्यता का विरोध करके चीन ने कुछ अनुचित नहीं किया. उसने ऐसा करके इस नियम का पालन किया कि सभी एनएसजी सदस्यों के लिए अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करना आवश्यक है.

First published: 25 July 2016, 13:22 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी