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भारत ने की अमेरिका के 'संरक्षणवाद व्यापार' की आलोचना, चीन को मिला भारत का साथ

न्यूज एजेंसी | Updated on: 15 April 2018, 10:57 IST

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध की बढ़ते संकट के बीच भारत ने रविवार को चीन सोयाबीन और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात की पेशकश की है. अमेरिका ने उत्पादों पर प्रतिशोधी कार्रवाई करते हुए आयात शुल्क बढ़ा दिया है. भारत ने इसके अलावा अमेरिका के व्यापार संरक्षणवाद की आलोचना करते हुए कहा कि 'अनुचित' प्रथा से दुनिया की पटरी पर लौट रही अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी.

बीजिंग में 5वें भारत-चीन सामरिक आर्थिक वार्ता में, नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि चीन और भारत 'संरक्षणवादी कदम' से नाराज थे और विश्व अर्थव्यवस्था की गिरावट को थामने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं. कुमार ने चीन अमेरिका व्यापार युद्ध पर कहा, "हमने देखा है कि आप शायद 20 अरब डॉलर या उससे भी अधिक कृषि उत्पादों का आयात करते हैं."

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उन्होंने कहा, "शायद भारत सोयाबीन और चीनी जैसी कुछ चीजों का विकल्प बना सकता है और यह हमारे किसानों के लिए बहुत उपयोगी हो सकता है." अप्रैल के पहले सप्ताह में, अमेरिकी ने चीनी उत्पादों पर 50 अरब डॉलर के शुल्क की घोषणा की थी और कहा था कि यह इसलिए लगाया गया है, क्योंकि चीन ने अमेरिकी कंपनियों को अपनी प्रौद्योगिकी चीनी कंपनियों को हस्तांतरित करने के लिए मजबूर किया है.

इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिका के 106 उत्पादों पर कर बढ़ा दिया. इस विवाद से पूरी दुनिया चिंतित हो गई है और इसे आर्थिक विकास के राह में रोड़ा के रूप में देख रही है. मार्च में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को भी धमकी दी थी कि अगर अमेरिकी उत्पादों पर भारत द्वारा लगाए गए कर को कम नहीं किया जाता है, तो बदले की कार्रवाई करते हुए अमेरिका भी कर की दर को बढ़ा देगा.

कुमार ने चीन में कहा, "विश्व अर्थव्यवस्था में लंबे समय बाद तेजी लौट रही है, लेकिन संरक्षणवादी रुख से इसमें अड़चन पैदा हो सकती है. लेकिन शुक्र है कि एशिया की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं ने इन संरक्षणवादी शोरों को नजरअंदाज किया है और चीन के साथ-साथ अपनी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर उच्च बनाए हुए है. इनमें चीन 6.8 फीसदी की दर से तो भारत 7-7.2 फीसदी की दर से बढ़ रहा है."

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First published: 15 April 2018, 10:57 IST
 
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