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पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौता: भारत समेत 171 देशों ने किए दस्तखत

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 April 2016, 13:55 IST

विश्व पृथ्वी दिवस के मौके पर शुक्रवार को ऐतिहासिक समझौता हुआ. भारत समेत 171 देशों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र में पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते पर दस्तखत किए.

समझौते के तहत सदस्य देशों ने 21वीं सदी में दुनिया के तापमान में वृद्धि को 2 डिग्री से कम स्तर तक सीमित करने का लक्ष्य रखा है. एक दिन में इतनी बड़ी संख्या में देशों की ओर से समझौते पर दस्तखत का ये रिकॉर्ड भी है.

इससे पहले 1982 में 119 देशों ने समुद्री सुरक्षा से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. अब सभी देशों को अपने देश की संसद से इस समझौते को मंजूर कराना होगा.

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ग्लोबल वार्मिंग से मुकाबला

ग्लोबल वार्मिंग से मुकाबला करने की दिशा में इस समझौते को बड़ा कदम माना जा रहा है. विकासशील और विकसित देश धरती के बढ़ते तापमान को कम करने के लिए एक साथ खड़े हुए हैं.

ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के मोर्चे पर काम शुरू करने के लिए दुनिया के देश एकजुट दिख रहे हैं. पेरिस में दिसंबर 2015 में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन हुआ था.

सम्मेलन के दौरान 150 से ज्यादा देश ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती पर सहमत हुए थे.

'बेहतर कल के लिए नया समझौता'

समारोह की मेजबानी संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने की. बान ने कहा, "ये एक ऐतिहासिक क्षण है. हम बेहतर भविष्य के नए समझौते पर हस्ताक्षर कर रहे हैं. हम समय से होड़ कर रहे हैं."

भारत की ओर से पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में समझौते पर दस्तखत किए. साथ ही जावड़ेकर ने कहा कि इस समझौते से विकसित और विकासशील देशों की परीक्षा होगी.

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जावड़ेकर का कहना है कि गैस उत्सर्जन में कटौती और गरीबी उन्मूलन पर भी देशों की गंभीरता की परख होगी. वहीं गैर सरकारी संगठन ग्रीनपीस ने भारत से इस मामले में राजनीतिक समर्थन मांगा है.

ऐतिहासिक समझौते पर दस्तखत करने के लिए जब अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी पहुंचे, तो उनकी गोद में एक प्यारी सी बच्ची थी.

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केरी अपनी पोती इसाबेल के साथ वहां आए. केरी का इशारा साफ था कि आने वाली पीढ़ियों को जलवायु में हो रहे बदलाव के विनाशकारी परिणामों से दूर रखा जा सके.

30 दिन में समझौता पक्का


दुनिया में कम से कम 55 फीसदी कार्बन उत्सर्जन के जिम्मेदार 55 देशों में मंजूरी के 30 दिनों के भीतर ही समझौता अस्तित्व में आ जाएगा.

वहीं भारत ने कहा है कि धनी देशों के दशकों के औद्योगिक विकास के बाद जलवायु परिवर्तन से लड़ने का बोझ गरीब देशों के कंधों पर नहीं डाला जा सकता.

भारत ने भी जीवश्म ईंधन के उत्सर्जन में कटौती के साथ 2022 तक 175 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है.

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First published: 23 April 2016, 13:55 IST
 
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