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आतंकवाद पर पाकिस्तान को मिलकर घेरेंगे भारत और अफगानिस्तान

सादिक़ नक़वी | Updated on: 17 September 2016, 7:08 IST
QUICK PILL
  • भारत और अफगानिस्तान ने दक्षिण एशिया में अपने राजनीतिक हितों को हासिल करने के लिए आतंकवाद और हिंसा के निरन्तर इस्तेमाल पर गहरी चिन्ता जताई है.
  • आतंकवाद से मुकाबले और सुरक्षा तथा रक्षा सहयोग मजबूत करने के प्रति दोनों देशों ने संकल्प जताया है. भारत-अफगानिस्तान रणनीतिक साझेदारी समझौते में इसकी विस्तार से परिकल्पना दी गई है.

भारत और अफगानिस्तान ने दक्षिण एशिया में अपने राजनीतिक हितों को हासिल करने के लिए आतंकवाद और हिंसा के निरन्तर इस्तेमाल पर गहरी चिन्ता जताई है.आतंकवाद से मुकाबले और सुरक्षा तथा रक्षा सहयोग मजबूत करने के प्रति दोनों देशों ने संकल्प जताया है. भारत-अफगानिस्तान रणनीतिक साझेदारी समझौते में इसकी विस्तार से परिकल्पना दी गई है.

यह बात संयुक्त घोषणापत्र में कही गई है. संयुक्त घोषणापत्र भारत की यात्रा पर आए अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद जारी किया गया. यह घोषणापत्र ऐसे समय में आया है जब भारत आतंकी संगठनों को पनाह देने और बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन पर पाकिस्तान को घेरने की कोशिश कर रहा है.

गनी की यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि भारत और अफगानिस्तान दोनों ही अपनी पाकिस्तान के प्रति नीतियों पर फिर से विचार करने को मजबूर हुए हैं. दोनों ही देश,सीमापार आतंकवाद से जूझ रहे हैं और अपने बिगड़ैल पड़ोसी के खिलाफ एकजजुट होकर सामने आए हैं. भारत भी अफगानिस्तान में अपनी बढ़ती भूमिका को लेकर चौकस है.

चाबहार परियोजना पर ईरान और अफगानिस्तान के साथ त्रिपक्षीय समझौते की सफलता के बाद न्यूयार्क में होने जा रहे संयुक्त राष्ट्र महासभा सम्मेलन से इतर भारत,अफगानिस्तान और अमरीका तीनों देशों की एक अन्य बैठक भी होगी.

बुधवार को जारी संयुक्त घोषणापत्र में गनी और मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा है कि अपने राजनीतिक हितों के लिए आतंकवाद और हिंसा का इस्तेमाल क्षेत्र में और इससे आगे भी स्थिरता, तरक्की और शांति के लिए मुख्य खतरा है. और आतंकवाद के सभी रूपों को बिना किसी भेदभाव के नेस्तनाबूद करना जरूरी है.

दोनों देशों ने आतंकवादियों के लिए सभी तरह का समर्थन, प्रायोजन और सुरक्षित पनाहगाह को खत्म करने का आह्वान किया जो अफगानिस्तान और भारत को निशाने पर रखते हैं. विदेश सचिव एस जयशंकर ने बाद में कहा कि किसी विशेष आतंकी संगठन के बारे में चर्चा नहीं हुई. 

दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खतरे पर विचार-विमर्श किया कि अफगानिस्तान अपने पूर्व में खतरे का सामना कर रहा है. यह संदर्भ साफ तौर पर पाकिस्तान के लिए है. जयशंकर ने यह भी कहा कि दोनों नेताओं ने आतंकवाद के बदलते रूपों पर भी व्यापक चर्चा की है.

गनी, जो दो दिन की भारत यात्रा पर आए थे, ने आहत करने वाली कोई बात नहीं कही. उन्होंने रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान (आईडीएसए) में एक कार्यक्रम में कहा कि पाकिस्तान एक अदूरदर्शी देश है, जो अपनी प्रत्येक हार का जश्न जीत के तौर पर मनाता है और अपनी हर खुफिया विफलता को साजिश के रूप में पेश करता है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा सम्मेलन से इतर भारत,अफगानिस्तान और अमरीका तीनों देशों की एक अन्य बैठक भी होगी.

उनसे जब यह पूछा गया कि क्या वह स्वतंत्र बलूचिस्तान के गठन का समर्थन करते हैं, तो गनी ने चिन्ता जताते हुए कहा कि अफगानिस्तान अपनी सीमा का उपयोग अस्थिरतापैदा करने के लिए कभी नहीं देगा. यह पाकिस्तान के आरोपों पर अस्पष्ट प्रतिक्रिया है कि भारतीय एजेंसियां बलूचिस्तान में संकट उभारने के लिए अफगानिस्तान का इस्तेमाल कर रही हैं.

बताया गया है कि गनी अपने साथ एक मांगों की एक लंबी-चौड़ी सूची लेकर आए थे जिसमें अपनी रक्षा क्षमताओं में बढ़ोतरी करने के लिए भारत का समर्थन मांगना भी शामिल था. इस महीने की शुरुआत में अफगान सेना प्रमुख भी हेलिकॉप्टर और अन्य सैन्य उपकरणों की मांग लेकर दिल्ली आए थे. 

हालांकि जयशंकर ने दोनों नेताओं के बीच चर्चा के बिन्दुओं का तो खुलासा नहीं किया, अलबत्ता यह जरूर कहा कि संयुक्त घोषणापत्र में अफगानिस्तान की जरूरतों के लिए भारत की तत्परता और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर रजामंदी जताई गई है.

भारत ने अफगानिस्तान को एक अरब डॉलर (करीब 67 अरब रुपए) की अतिरिक्त मदद देने का एलान किया है और सौर ऊर्जा, छोटे बांधों पर ध्यान में रखते हुए जल प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने तथा सस्ती दवाइयां देने पर सहमत हुआ है.

भारत पहले ही अफगानिस्तान में तीन बड़ी विकास परियोजनाओं- सलमा बांध और संसद के नए भवन का निर्माण तथा स्टोरे पैलेस के पुनर्निर्माण का काम पूरा कर चुका है. 

दोनों देश तीन नए समझौतों- प्रत्यर्पण समझौता, नागरिक और वाणिज्यिक मामलों में सहयोग और वाह्य जगत के शांतिपूर्ण इस्तेमाल में सहयोग के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने के अलावा वीजा सुविधा को उदार करने पर सहमत हुए हैं.

भारत पहले ही अफगानिस्तान में तीन बड़ी विकास परियोजनाओं का काम पूरा कर चुका है.

भारत के ध्यान में यह बात रही है कि बहुत से अफगानी इलाज के लिए भारत आते हैं. जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि किस तरह वस्तुओं की आवाजाही एक बड़ा मुद्दा है.

जयशंकर ने यह भी कहा कि किस तरह से अनाज की किल्लत झेल रहे अफगानिस्तान को 1.75 लाख टन गेहूं आपूर्ति करने में पाकिस्तान के अवरोधों के चलते बाधा आई है.

उन्होंने कहा कि भारत गेहूं की आपूर्ति करना चाहता है और उसने महीनों पहले पाकिस्तान से पारगमन के लिए अनुरोध किया था. साथ ही यह भी कहा कि हमें कोई जवाब नहीं मिला.

अफगानिस्तान भी इस्लामाबाद के साथ ठीक इसी तरह की समस्या का सामना कर रहा है. आईडीएसए में बोलते हुए गनी ने बताया कि किस तरह से पाकिस्तान ने भारत और अफगानिस्तान के एक-दूसरे के साथ व्यापार करने में अड़ंगा लगा दिया है और किस तरह से उसकी यह मोनोपॉली चाबहार तट के निर्माण के साथ खत्म होगी.

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान एक चौराहे पर खड़ा है. लम्बे समय तक उसकी भूमि को अवरुद्ध नहीं किया जा सकेगा. जो हमारे अवरोधक बनेंगे, खुद ही अवरुद्ध हो जाएंगे. 

गनी ने जब अपना पद संभाला था, उनका झुकाव पाकिस्तान की तरफ था. उन्हें उम्मीद थी कि पाकिस्तान आतंकवाद से निपटने में अपना वादा निभाएगा. बाद में उन्हें समझ में आया कि उनका पड़ोसी कुछ नहीं कर रहा है.

इस बात के साक्ष्य हैं कि काबुल में अमेरिकी विश्वविद्यालय कैम्पस में जब दुस्साहसी आतंकी हमला हुआ तो गनी ने पाक सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ को सीधे फोन किया और उनसे कहा कि इस हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी.

उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोहम्मद हनीफ अत्मार, जिन्होंने कभी आईएसआई और अफगान की खुफिया एजेंसी एनडीएस के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान के विचार को आगे बढ़ाया था, इसका अफगानिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान के एक बड़े समूह ने खुलकर विरोध किया था और गनी सरकार को इस योजना को रद्द करना पड़ा था.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने तालिबान को वार्ता की मेज पर लाने और अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने के वचन का पालन नहीं किया है. 

अत्मार ने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान के साथ झूठ बोलने का भी आरोप लगाया है. वह कहते हैं कि हमने उनसे साफ तौर पर कहा था कि आप झूठ क्यों बोल रहे हैं? यह (शांति प्रक्रिया) आपका अनुमोदन नहीं करेगी. आतंकवाद आपके खिलाफ जवाबी हमला करेगा और यह पहले से ही मौजूद है.

First published: 17 September 2016, 7:08 IST
 
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