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LOC क्रॉस फायरिंग: राहिल शरीफ़ आख़िर क्या चाहते हैं?

सुहास मुंशी | Updated on: 31 October 2016, 2:35 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • नियंत्रण रेखा के उसपार पाक अधिकृत कश्मीर में भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक्स को पूरा एक महीना बीत चुका है. 
  • भारत में किसी को उम्मीद नहीं थी कि पाकिस्तानी सीमा में काफी अंदर तक सेना भेजने, आतंकी ठिकानों को तबाह करने और पाकिस्तानी सैनिकों व आतंकियों को मारने जैसी शेखी बघारने के बाद पाकिस्तान चुप बैठा रहेगा.  
  • अभी पाकिस्तानी सेना की शह पर भारतीय सेना के जवान को शहीद करने के बाद उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिया गया लेकिन पाकिस्तान यहीं रुकने वाला नहीं है. 

पाकिस्तान ने 29 सितम्बर की स्ट्राइक के बाद भी यह एहसास नहीं होने दिया कि उसपर किसी तरह का दबाव या पाबंदी थोपी गई है. भारतीय सेना के सूत्रों की मानें तो पिछले कुछ महीने में पाकिस्तान ने 115 बार युद्धविराम का उल्लंघन किया है. इनमें से आधे से ज्यादा '60' उल्लंघन सर्जिकल स्ट्राइक्स के बाद हुए. सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने पाकिस्तान की ओर से लगातार गोलाबारी में बढ़ोतरी की बात कही है और इसे पाक की भड़काने वाली कार्रवाई करार दिया है. सीमापार से हो रही गोलीबारी की टाइमिंग और जगहों पर ग़ौर किया जाए तो यह कोई रूटीन अभ्यास नहीं दिखता. 

जगह

सीमापार से भारी गोलाबारी के ज़्यादातर मामले जम्मू सेक्टर में मेंधर-अखनूर, आरएसपुरा, साम्बा और अरनिया के निचले इलाकों में हुई हैं. यहां काफी बड़ा हिस्सा रिहाइशी है और इमारतें भी बनी हुई हैं. अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पार सुंदरबनी जैसे इलाके भी भारी गोलीबारी के शिकार बने हैं.

हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान कश्मीर में कोई बड़ी गोलाबारी नहीं कर रहा. मेंधर और तंगधार के ऊपर वाले इलाके काफी शांत हैं. इस समय घाटी में एलओसी के आर-पार ज्यादा हरकत नहीं हो रही. 

समय

पाकिस्तान ने इससे पहले साल के इन दिनों में भारत पर इतनी भारी गोलीबारी कभी नहीं की थी. तार्किक रूप से नवंबर के शुरुआत में ही निशाना बना कर की जा रही इस गोलाबारी के पीछे दो ही सम्भावनाएं नजर आती हैं. 

पहला तो यह कि पाकिस्तान भारतीय सेना का ध्यान बंटाकर भारी हिमपात से सभी दर्रे बंद हो जाने और कश्मीर तक पहुंच के सभी रास्ते रुक जाने से पहले, खासकर उत्तरी सेक्टर में, आतंकियों को अंदर धकेल देना चाहता है. 

दूसरा यह कि मौजूदा सेनाध्यक्ष राहिल शरीफ अपना कार्यकाल बढ़वाने के लिए भारत के साथ तनाव बढ़ाना चाहते हैं. इस मकसद के लिए वह जंग तक थोपने के लिए तैयार हैं. वे तख्तापलट करके शासन की बागडोर भी अपने हाथ में ले सकते हैं. 

हालांकि सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी का मानना है कि ये दोनों ही अनुमान गलत व अदूरदर्शी हैं. उन्होंने कहा, 'जहां तक सीमापार से हो रही गोलाबारी की जगहों का मामला है, पाकिस्तानी सेना को हमारी सेना का ध्यान बंटाने के लिए, दक्षिण में गोलाबारी करने की जरूरत नहीं है. 

जैसा कि हमने कारगिल के मामले में देखा, आतंकवादी भीषण सर्दी के दिनों में भी घुसपैठ कर सकते हैं और ऊंचाई वाले इलाकों में कब्जा करके बैठ सकते हैं. इसके अलावा उरी के बाद एलओसी पर तैनात सैनिक टुकड़ियां काफी सतर्क हैं. यहां तक कि पाकिस्तानी सेना भी भली-भांति जानती है कि इस तरह वह किसी का भी ध्यान नहीं भटका सकेगी.

भारी गोलाबारी को राहिल शरीफ के रिटायरमेंट से जोड़कर देखने पर उन्होंने कहा कि यह तो बहुत ही सामान्य-सा अनुमान है. मैं नहीं समझता कि यह दो और दो को जोड़ने जितना आसान है. यह जाहिर तौर पर शरारतपूर्ण और असामयिक है. गोलाबारी के इस तौर-तरीके के पीछे कुछ और ही योजना है जिसका हम जल्द पता लगाएंगे. 

अन्य संकेत

ऐसी भी खबरें है कि उसपार, एलओसी के नजदीक रहने वाले किसानों ने इधर के किसानों से बात कर कहा है कि वे अपनी फसल की कटाई तुरंत कर लें क्योंकि अगले दो महीनों में यहां सीमा के उस पार से कुछ न कुछ हो सकता है. 

पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम ( बीएटी ) को भी कई बार एलओसी के काफी नजदीक आते देखा गया है. बीएटी में पाकिस्तानी सेना के जवान और आतंकवादी शामिल हैं. बीएटी टीमों को पहली बार बुधवार को सांबा में सीमा के निकट देखा गया जहां एक घटना में भारतीय सेना का एक बंदूकची मारा गया और 8 स्थानीय भारतीय ग्रामीण जख्मी हो गए थे.

इन संकेतों का अर्थ हरेक व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकता है लेकिन सेना के अंदर इस बात पर सहमति दिखाई देती है कि पाकिस्तान की ओर से एक बड़ा हमला सम्भावित है. एक बात यह भी मानी जा रही है कि यह बड़ा हमला न केवल अंतर्राष्ट्रीय सीमा या एलओसी के आर-पार हो सकता है, बल्कि भारत के किसी शहर या कस्बे को भी निशाना बनाया जा सकता है.

हो सकता है कि हमलावर भारत से दूर, विदेशों में भारतीय मिशनों पर हमले की योजना बना रहे हों.

First published: 31 October 2016, 2:35 IST
 
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