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कुलभूषण जाधव विवाद: अंतरराष्ट्रीय अदालत में आज भारत-पाक आमने-सामने

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 May 2017, 11:12 IST

पाकिस्तान में कथित जासूसी के मामले में कुलभूषण जाधव को दी गई फांसी की सज़ा के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में आज से सुनवाई होने जा रही है. दोनों देश 18 साल बाद अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पहली बार आमने-सामने होंगे. कुलभूषण को फांसी की सज़ा पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने सुनाई है और वो फिलहाल पाकिस्तान की जेल में बंद हैं.

कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगाने के लिए भारत ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था, जहां से इस फांसी पर रोक लगा दी गई थी. अब 15 मई से इस पर आईसीजे में सुनवाई शुरू हो रही है. भारत ने कोर्ट से अपील की है कि कुलभूषण को सुनाई गई सज़ा पर पाकिस्तान तुरंत अमल न करे और उन्हें अपनी बात कहने का हर संभव विकल्प मुहैया कराया जाए. 

फ़ैसला मानने को पाक बाध्य नहीं!

द्विपक्षीय मामलों पर भारत अंतरराष्ट्रीय अदालत को मान्यता नहीं देता है लेकिन एक अलग समझौते पर भारत और पाकिस्तान दोनों ने दस्तख़त किए हैं. इसके मुताबिक अगर देश के किसी नागरिक के साथ किसी दूसरे देश में कोई नाइंसाफी होती है या बुरा सुलूक होता है तो वो अंतरराष्ट्रीय कोर्ट की शरण में जा सकते हैं.

वहीं इंडियन एक्सप्रेस के वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का कोई फ़ैसला आता भी है, तो पाकिस्तान इसे मानने के लिए बाध्य नहीं होगा.

माना जा रहा है कि कुलभूषण मामले में भारत की पिछले दरवाज़े से होने वाली कोशिशों में कोई कामयाबी नहीं मिल रही थी. लिहाज़ा, अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाज़ा खटखटाया गया है. इसके ज़रिए पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव तो ज़रूर बनाया जा सकता है, लेकिन कुलभूषण मामले में सीधी राहत मिलने के आसार नहीं लगते.

फाइल फोटो

क्या है कुलभूषण जाधव विवाद?

पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षा बलों ने 3 मार्च, 2016 को बलूचिस्तान से कुलभूषण जाधव को गिरफ्तार किया. पाकिस्तान का दावा था कि जाधव बलूचिस्तान और कराची में आतंकवाद फैलाने का काम कर रहे थे.

वहीं, भारत का दावा था कि जाधव को अगवा किया गया है. गिरफ्तारी के बाद भारतीय उच्चायोग ने दर्जनों बार उनसे मिलने की इजाजत मांगी थी. लेकिन पाकिस्तान ने सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों को दरकिनार करते हुए इसकी इजाजत नहीं दी. 10 अप्रैल 2017 को अचानक खबर आई कि पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा दे दी है.

कुलभूषण जाधव को फांसी मिलने के बाद भारत ने इस मसले पर कड़ा रुख़ अपनाया था. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में कहा था कि जाधव को छुड़वाने के लिए भारत किसी भी हद तक जाएगा. भारत ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त को कई बार तलब कर जाधव से मिलने की इजाजत मांगी थी. भारत की सरकार जाधव को बचाने के लिए पाकिस्तान की कानूनी व्यवस्था में मौजूद विकल्पों पर भी गौर कर रही थी.

बलूचिस्तान में जासूसी का आरोप

10 अप्रैल को पाकिस्तान के सैन्य मुख्यालय रावलपिंडी से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया, "भारतीय रॉ एजेंट/नेवल ऑफिसर 41558Z कमांडर कुलभूषण सुधीर जाधव उर्फ हुसैन मुबारक पटेल को 3 मार्च, 2016 को बलूचिस्‍तान के मश्‍केल क्षेत्र से काउंटर इंटेलिजेंस ऑपरेशन के जरिए गिरफ्तार किया गया था. उसे पाकिस्तान में जासूसी करने और गड़बड़ी फैलाने वाली गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में पकड़ा गया था."

आईएसपीआर के बयान में कहा गया है, "उन्होंने एक मजिस्ट्रेट कोर्ट के सामने ये स्वीकार किया है कि रॉ की योजना के तहत जासूसी और गड़बड़ी की गतिविधियों के साथ ही पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ते हुए उसे अस्थिर करने की कोशिश की थी. बलूचिस्तान और कराची में कानून व्यवस्था और शांति को बरकरार रखने वाली एजेंसियों के रास्ते में जाधव ने रोड़ा अटकाया."

पाकिस्तान हमेशा ये कहता रहा है कि कुलभूषण जाधव भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के एजेंट हैं. हालांकि भारत पाकिस्तान के आरोपों को नकारता आया है. भारत ने कुलभूषण जाधव को इंडियन नेवी का रिटायर्ड ऑफिसर माना है. इससे पहले पाकिस्तानी जांच एजेंसियों ने कुलभूषण जाधव का एक 6 मिनट का वीडियो भी जारी किया था.

First published: 15 May 2017, 11:12 IST
 
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