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पाकिस्तान में एक और भारतीय कैदी की मौत

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 April 2016, 13:18 IST

20 साल से ज्यादा वक्त से पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय कैदी किरपाल सिंह की रहस्यमय हालात में मौत हो गई है. किरपाल सिंह जासूसी के आरोप में लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद थे.

आरोप है कि 50 साल के किरपाल 1992 में वाघा बॉर्डर पार करके पाकिस्तान में दाखिल हो गए थे. जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था. कोट लखपत जेल में सरबजीत सिंह भी उनके साथ कैद रह चुके थे.

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सीरियल ब्लास्ट में शामिल होने का आरोप

किरपाल सिंह पर आरोप था कि वो पाकिस्तान के फैसलाबाद रेलवे स्टेशन पर हुए सीरियल बम धमाकों में शामिल था. कोर्ट ने किरपाल को जासूसी और आतंकवाद का दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई थी.

जेल अधिकारियों के मुताबिक किरपाल को बैरक में मृत पाया गया. जिसके बाद शव को लाहौर के जिन्ना अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. जेल प्रशासन का ये भी कहना है कि किरपाल ने कैदियों से सीने में दर्द की शिकायत की थी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की असली वजह सामने आ सकेगी. इस मामले में मजिस्ट्रेट ने कुछ कैदियों के बयान भी दर्ज किए हैं.

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बरी होने के बावजूद सजा बरकरार

किरपाल सिंह पंजाब के गुरदासपुर के रहने वाले थे. लाहौर की अदालत ने उन्हें धमाकों के आरोपों से बरी कर दिया था. इसके बावजूद अज्ञात वजहों से उनकी फांसी की सजा को खत्म नहीं किया गया.

वहीं किरपाल की बहन जगीर कौर का कहना है कि गरीबी की वजह से उनका परिवार किरपाल की रिहाई की आवाज नहीं उठा सका. किरपाल की बहन के मुताबिक 24 साल तक किरपाल की रिहाई का इंतजार किया गया

लेकिन कामयाबी नहीं मिली. इससे पहले 2013 में लाहौर की इसी कोट लखपत जेल में भारतीय कैदी सरबजीत सिंह पर दो पाकिस्तानी कैदियों ने हमला कर दिया था. अस्पताल में इलाज के दौरान सरबजीत की मौत हो गई थी.

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First published: 12 April 2016, 13:18 IST
 
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