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इंडोनेशिया में सुनामी का भूवैज्ञानिक भी नहीं लगा सके अंदाजा, शुरुआती जानकारी के लिए मांगी माफी

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 December 2018, 9:51 IST

इंडोनेशिया की सुंडा स्ट्रेट के आसपास के इलाकों में शनिवार रात सुनामी के बाद कम से कम 43 लोगों की मौत और 584 के घायल होने खबर है. यह सुनामी इतनी खतरनाक थी कि भूवैज्ञानिक भी इसका पहले अंदाजा नहीं लगा सके, जिससे कि लोगों को अलर्ट किया जा सके.

Nugroho ने अपने प्रारंभिक संदेश के लिए भी माफी मांगी है जिसमे उसने कहा था कि लहर एक सुनामी नहीं थी. अधिकारियों ने कहा था कि यह एक ज्वार-भाटा था और जनता से नहीं घबराने की अपील की थी. नुग्रोहो ने बाद में कहा कि शुरू में इस कारण का पता लगाना मुश्किल था क्योंकि भूकंप नहीं आया था. अगर हमसे कोई प्रारंभिक त्रुटि हुई तो हमें खेद है,"

 इस सुनामी में कई लोगों के लापता होने की खबर है. सुनामी इतनी खतरनाक थी कि कई घर क्षतिग्रस्त हो गए. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार सूनामी और जावा द्वीपों के बीच के तटीय इलाकों में स्थानीय समयानुसार रात 9.30 बजे (भारतीय समयानुसार रात 8 बजे) आयी. देश की भूवैज्ञानिक एजेंसी अप्रत्याशित सुनामी के कारणों का पता लगाने के लिए काम कर रही है.

 

समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, ज्वालामुखी 'अनक क्रकटोआ' के विस्फोट के बाद भूस्खलन के कारण सुनामी इतनी खतरनाक रूप में साने आयी. अनक क्राकाटोआ ने 1883 में 36,000 लोगों की जान ले ली थी और यह दुनिया भर में महसूस की गई थी. अनक क्राकाटोआ सुंडा जलडमरूमध्य में एक छोटा सा द्वीप है.

2004 में 26 दिसंबर को हिंद महासागर सूनामी के बाद भूकंप से 13 देशों में 226,000 लोगों की जान ले ली, जिसमें इंडोनेशिया में 120,000 से अधिक लोग शामिल थे. 1883 में क्रैकटाऊ के विस्फोट से सुनामी की एक श्रृंखला में 36,000 से अधिक लोग मारे गए.

पांडेयलांग में आपदा न्यूनीकरण एजेंसी के प्रमुख एंडन परमाना ने बताया कि मेट्रो टीवी पुलिस, बेंटन प्रांत के तंजुंग लेसुंग में पीड़ितों को सहायता प्रदान कर रही है, जो कि राजधानी जकार्ता से दूर एक लोकप्रिय पर्यटक नहीं है, क्योंकि आपातकालीन कर्मचारी नहीं पहुंचे थे.

First published: 23 December 2018, 9:37 IST
 
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