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जंगल बचाने को इस शख्स ने की अनूठी पहल, उलटे कदमों से कर रहा है 800 किलोमीटर का सफर

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 July 2019, 12:35 IST

21वीं सदी में जंगलों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है. जिसके चलते पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और पृथ्वी पर प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ गया. अपने पर्यावरण को बचना के लिए तमाम लोग कई तरह की मुहिम चलाते हैं. लेकिन इंडोनेशिया के एक शख्स ने जो मुहिम चलाई है वह काबिले तारीफ है. क्यों कि पर्यावण को जंगलों को बचाने के लिए इस दौर में किसी का इस तरह नई मुहिम चलाना नामुमकिन है. बावजूद इसके मेजी बेस्तोनी नाम का ये शख्स ऐसी मुहिम चला रहा है.

दरअसल, इंडोनेशिया के रहने वाले 46 साल के मेदी बेस्तोनी ईस्ट जावा के डोनों गांव से राजधानी जकार्ता तक का सफर उल्टे पांव चलकर तय कर रहे हैं. जहां से ये दूरी 800 किलो मीटर है. इस यात्रा के जरिए उनका मकसद लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरुक करना हैमेदी देश के जंगलों को बचाने के लिए इस तरीके से लोगों को जागरूक करना चाहते हैं. इस यात्रा को पूरा करने में उन्हें 150 से ज्यादा घंटे लगेंगे. अगर इस दूरी को गाड़ी से तय किया जाए तो ये महज 10 घंटे लगते हैं.

मेदी ने अपना ये सफर बीती 18 जुलाई को शुरु किया था. मेदी घर से एक बैग और तीन लाख रुपए लेकर यात्रा पर निकले है. उन्हें उम्मीद है कि वह देश के स्वतंत्रता दिवस 17 अगस्त तक जकार्ता पहुंच जाएंगे. जहां वह नेशनल पैलेस में राष्ट्रपति जोको विदोदो से मुलाकात कर पाएंगे. साथ ही वह राष्ट्रपति विदोदो को माउंट विलिस पर एक पौधा भी लगाने को देंगे. जिससे देश के लोग भी ये पौधा लगाएं.

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मेदी का कहना है कि 1970 के मुकाबले इंडोनेशिया के जंगलों में पेड़ों की संख्या आधी रह गई है. हर साल कागज, प्लाईवुड और पाम ऑयल के लिए लाखों हेक्टेयर पेड़ों की कटाई की जाती है. बता दें कि ये सिर्फ इंडोनेशिया में ही देखने को नहीं मिल रहा बल्कि पूरी दुनिया में इस तरह का नजारा देखने को मिल रहा है.

बता दें कि मेदी हर दिन करीब 30 किमी पैदल चलते हैं. इस दौरान वह सिर पर जापानी हैट पहनते हैं, जिसके ऊपर उन्होंने प्लास्टिक की पाइप से बना एक बड़ा हैट जोड़ा हुआ है. इसी पर एक रियर व्यू वाला शीशा लगाया है, जिससे उन्हें अपने आस-पास की चीजें आसानी से दिखाई देती हैं. मेदी का कहना है कि सुरक्षा को देखते हुए वह रात के समय मस्जिदों, पुलिस स्टेशन और सिक्योरिटी चेकपोस्ट पर रुकते हैं.
मेदी लंच और डिनर सड़क किनारे बने फूट स्टॉल्स पर करते हैं. मेदी का कहना है कि उन्हें यह सफर तय करने में 30 से 40 दिन लगेंगे. बता दें कि मेदी की उल्टे पैरों वाली ये कोई पहली यात्रा नहीं है. इससे पहले वह साल 2016 में पर्यावरण मुहिम के लिए ही उल्टे पैर जावा प्रांत की यात्रा कर चुके हैं.

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First published: 27 July 2019, 12:11 IST
 
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