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इंडोनेशिया: दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश के लोग क्यों रखते हैं हिन्दू नाम?

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 June 2018, 11:55 IST

इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश हैजहां के दौरे पर इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैंइंडोनेशिया में भले ही सबसे अधिक मुस्लिम रहते होंलेकिन यहां की संस्कृति लगभग भारत की संस्कृति से मिलती जुलती है.

इस देश में हिंदू आबादी दो फीसदी से भी कम है. बावजूद इसके इस देश में हर चीज पर हिंदू संस्कृति की छाप देखने को मिलती है. इस देश में हिंदू देवी-देवताओं की तो पूजा होती ही है यही नहीं यहां की भाषा पर भी भारत का प्रभाव देखने को मिलता है.

इंडोनेशिया का प्रमुख द्वीप जावा है. ये द्वीप पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है. इस द्वीप पर इंडोनेशिया की लगभग 60 फीसदी आबादी रहती है. 13वीं से 15वीं शताब्दी के बीच यहां माजापाहित नाम का हिंदू साम्राज्य होता था. इसीलिए यहां की संस्कृति, भाषा और भूमि पर हिंदू संस्कृति की झलक देखने को मिलती है. यहां हर जगह आपको संस्कृत भाषा के शब्द दिखाई दे जाएंगे.

यही नहीं इंडोनेशिया में जगहों और लोगों के नाम तक संस्कृत के शब्दों से मिले-जुले होते हैं. यहां कई मुस्लिम लोगों के नाम विद्या, प्रिया, कृष्णा, विसनु मिल जाते हैं, दरअसल, संस्कृत जावानीज भाषा का हिस्सा बन चुकी है. इंडोनेशियाई और जावानीज भाषा में संस्कृत के बोध वाले कई शब्द मिल जाएंगे.

बता दें कि इंडोनेशिया की भाषा को 'बहासा इंदोनेसिया' कहा जाता है. उनकी भाषा पर संस्कृत का काफी प्रभाव दिखता है. यही नहीं इंडोनेशिया के महान नेता सुकर्णो का नाम भी महाभारत के किरदार कर्ण से ही लिया गया है.

सुकर्णो के पिता कर्ण के किरदार से बहुत ज्यादा प्रभावित थे, लेकिन महाभारत के युद्ध में कर्ण ने गलत लोगों का पक्ष लिया था इसीलिए उन्होंने अपने बेटे का नाम सु यानि (good)+ कर्णो रखा. बता दें कि इंडोनेशिया के पांचवीं राष्ट्रपति का नाम भी मेघावती सुकार्णोपुत्री था.

यहां के लोग अपने धर्म और संस्कृति को अलग-अलग रखते हैं और इसे अपनी संस्कृति का ही हिस्सा मानते हैं. इंडोनेशिया के लोग एक 'नेम इज ए विश' को फॉलो करते हैं. इसका मतलब है वे अपने बच्चे का वह नाम रखते हैं जिस रूप में वे उन्हें देखना चाहते हैं.

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बता दें, प्राचीन काल में इंडोनेशिया के इतिहास में कई बड़े और प्रभावशाली हिंदू साम्राज्य हुए. जिनका प्रभाव आज भी इस देश की संस्कृति पर बना हुआ है. सातवीं सदी में व्यापार के कारण इंडोनेशिया में शक्तिशाली श्रीविजया साम्राज्य पनपा. 13वीं सदी के अंत में पूर्वी जावा में हिंदू मजापहित साम्राज्य की स्थापना हुई थी. बाद में इंडोनेशिया में इस्लाम की शुरुआत हुई.

इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर कई हिंदू और बौद्ध मंदिर हैं. हमारे देश की तरह यहां भी कठपुतली का चलन हैं. योग्याकार्ता में कठपुतली बनाने का काम करने वाले वायुदि सहस्त्रदिनामा जावा को 'सहिष्णुता का शहर' कहते हैं. दूसरे लोगों की तरह वह भी रोजा रखते हैं और कठपुतलियां बनाते हैं. वायुदि बताते हैं कि मेरे लिए धर्म और संस्कृति अलग-अलग चीजें हैं.

उनके कामकाज की जगह पर राम, सीता और घटोत्कच की कृतियां भी हैं जिन्हें भैंस की खाल से बनाया गया है. वो कहते हैं इन्हें गाय की खाल से नहीं बनाया जाता, क्योंकि हम हिंदुओं का सम्मान करते हैं और उनके लिए यह पवित्र पशु है. बता दें कि इंडोनेशिया एक धर्म सहिष्णुता देश हैं. यहां के मुसलमानों और हिंदुओं के मन में दूरियां नहीं है.

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First published: 1 June 2018, 11:51 IST
 
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