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क्या हिलेरी क्लिंटन की मदद कर रहा गूगल?

साहिल भल्ला | Updated on: 13 June 2016, 7:54 IST
QUICK PILL
  • गूगल पर हिलेरी क्लिंटन के बारे में कुछ भी खोजने पर उसका ऑटोकंप्लीट फंक्शन उनके बारे में केवल अच्छे परिणाम ही दिखा रहा है. वहीं याहू और बिंग पर हिलेरी क्लिंटन से जुड़ी नकारात्मक खबरें भी सामने आ रही है.
  • 7 जुलाई को जूलियन असांज ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा था कि गूगल हिलेरी क्लिंटन के प्रचार में सीधे शामिल हो गया है. असांज अभी भी इक्वाडोर दूतावास में हैं. 
  • क्लिंटन के बारे में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए असांज ने कहा कि गूगल के सीईओ एरिक स्मिट ने क्लिंटन के प्रचार अभियान को चलाने के लिए एक कंपनी बनाई है.

हिलेरी क्लिंटन के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए चल रहे प्रचार अभियान और गूगल के ऑटोकंप्लीट फंक्शन में क्या समानता है? दोनों ही हिलेरी क्लिंटन के पक्ष में बात करते दिखाई दे रहे हैं. कम से कम यूट्यूब पर 9 जून को पोस्ट किए गए सोर्सफीड वीडियो में यह बात साबित होती है.

वीडियो के मुताबिक गूगल क्लिंटन के बारे में सर्च किए जाने पर उनसे जुड़ी अधिकांश सकारात्मक खबरें सामने रख रहा है. गूगल दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन है. वहीं दूसरे सर्च इंजन मसलन बिंग और याहू पर क्लिंटन के नाम से कुछ भी खोजने पर कई जानकारियां सामने आ रही हैं जिनमें से कई हिलेरी क्लिंटन की आलोचनाओं से जुड़ेे हुए हैं.

जब आप हिलेरी क्लिंटन क्रि टाइप करेंगे तो याहू और बिंग पर हिलेरी क्लिंटन क्राइम के नतीजे आएंगे. जब आप हिलेरी क्लिंटन इन टाइप करेंगे तो वहां आपको हिलेरी क्लिंटन इनडाइटेड से जुड़े नतीजे आएंगे.

लेकिन जब आप गूगल पर हिलेरी क्लिंटन क्रि टाइप करेंगे तो सर्ज इंजन आपको उनके क्राइम रिफॉर्म से जुड़े लिंक को सामने रखेगा. वहीं हिलेरी क्लिंटन इन टाइप करेंगे तो यह आपको हिलेरी क्लिंटन और इंडियाना से जुड़े नतीजे सामने रखेगा. ऑटोकंप्लीट रिजल्ट आपको हिलेरी क्लिंटन के उस नकारात्मक निकनेम के बारे में जानकारी नहीं देगा जिसे ट्रंप ने इस्तेमाल किया था.

तो यह पूरा मामला है क्या? क्या गूगल के यूजर्स याहू और बिंग के मुकाबले हिलेरी के पक्ष में हैं? शायद नहीं. अगर आप गूगल के ट्रेंड के बारे में देखेंगे तो आपका पता चलेगा कि हिलेरी क्लिंटन इनडाइटमेंट ऑटोकंप्लीट में लिए गए सर्च कीवर्ड इंडियाना, इंडिया और इंडिपेेंडेंट से ज्यादा पॉपुलर है.

7 जुलाई को जूलियन असांज ने कहा था, 'गूगल हिलेरी क्लिंटन के प्रचार में सीधे शामिल हो गया है.' असांजे अभी भी इक्वाडोर दूतावास में हैं. असांज ने कहा कि गूगल हिलेरी क्लिंटन की मदद कर रहा है. 

क्लिंटन के बारे में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए असांज ने कहा कि गूगल के सीईओ एरिक स्मिट ने क्लिंटन के प्रचार अभियान को चलाने के लिए एक कंपनी बनाई है.

''गूगल के सीईओ एरिक स्मिट ने क्लिंटन के प्रचार अभियान को चलाने के लिए एक कंपनी बनाई है''

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक स्मिट ने 2015 में एक वेबसाइट बनाई थी. वेबसाइट का नाम द ग्राउंडवर्क डॉटकॉम था. हालांकि अभी भी यह वेबसाइट खाली है. स्मिट भले ही गूगल से अलग काम कर रहे हो लेकिन ग्राउंडवर्क को क्लिंटन को व्हाइट हाउस में पहुंचाने के लिए बनाया गया था.

ब्रेटबार्ट ने कहा, 'क्लिंटन के कैंपेन में ग्राउंडवर्क सबसे ज्यादा भुगतान पाने वाली कंपनी है जिसे तीसरी तिमाही में 136,131 डॉलर जबकि 2015 के पहले नौ महीनों में उसे 313,349 डॉलर का भुगतान किया गया. इसके बाद दूसरे नंबर पर ब्लू वोल्फ ग्रुप रही.'

क्वार्ट्ज ने इससे भी अधिक चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. क्वार्ट्ज के मुताबिक, 'अरबपति एरिक स्मिट ने चुपचाप एक स्टार्टअप बनाई ताकि क्लिंटन को राष्ट्रपति बनाने में मदद दी जा सके. यह सिलिकॉन वैली और डेमोक्रेेटिक के बीच के गठजोड़ को बताता है.'

रिपोर्ट्स के मुताबिक 2016 में हिलेरी को चुनाव जिताने के लिए इस कंपनी को बनाया गया था. ग्राउंडवर्क का मुख्यालय क्लिंटन के कैंपेन मुख्यालय से महज कुछ ही दूरी पर है.

क्लिंटन के लीक हुए ईमेल में गूगल के कई कर्र्मचारियों का नाम शामिल है. जेरेड कोहेन का नाम इस सूची में बार बार आता है. कोहेन गूगल में आईिडया के हेड हैं. कोहेन की टीम अल जजीरा के साथ काम कर रही थी ताकि सीरिया में सत्ता बदलाव को पूरा किया जा सके. असांजे ने बताया था कि गूगल का ओबामा प्रशासन के साथ गहरा संबंध है.

असांजे ने कहा था, 'गूगल वह कंपनी है जो किसी भी व्यक्ति के मुकाबले सबसे ज्यादा व्हाइट व्हाइस का भ्रमण करती है. पिछले चार सालों में एक हफ्ते में करीब एक बार गूगल व्हाइट हाउस गई.' हालांकि गूगल ने इससे इनकार किया है.

गूगल जो कर रही है वह अवैध नहीं है. यह एक अनियंत्रित इंडस्ट्री है और गूगल इसके केंद्र में है. गूगल एक निजी कंपनी है और वह कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र है. निश्चित तौर पर वह पहले दुनिया की बड़ी आबादी के लिए काम करेगी लेकिन इससे पहले वह अपने हितधारकों के लिए काम करना पसंद करेगी क्योंकि यह पब्लिक ट्रेडेड कंपनी है.

बड़े स्तर पर गूगल अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर अमेरिकी जनता को किसी एक उम्मीदवार के बारे में सोचने के लिए पे्ररित कर रही है. 

गूगल के अधिकांश यूजर्स उसके सर्च परिणाम पर आंख मूंद कर भरोसा करते हैं. यह बड़ी समस्या है. लेकिन यह ऐसा कुछ है जो जल्दी नहीं बदलने जा रहा है. 

First published: 13 June 2016, 7:54 IST
 
साहिल भल्ला @IMSahilBhalla

Sahil is a correspondent at Catch. A gadget freak, he loves offering free tech support to family and friends. He studied at Sarah Lawrence College, New York and worked previously for Scroll. He selectively boycotts fast food chains, worries about Arsenal, and travels whenever and wherever he can. Sahil is an unapologetic foodie and a film aficionado.

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