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पठानकोट हमला: पाकिस्तान का संयुक्त जांच दल दिखावा तो नहीं?

सुहास मुंशी | Updated on: 13 January 2016, 8:15 IST
QUICK PILL
  • पठानकोट हमले के लिए पाकिस्तान ने संयुक्त जांच दल (जेआईटी) बनाया है. इसमें सेना समेत सभी प्रमुख विभाग शामिल हैं. पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार पाक सेना प्रमुख की भी इस फैसले में रजामंदी है.
  • कूटनीतिक विश्लेषक पाकिस्तान के इस फैसले पर बंटे हुए हैं. कुछ को लगता है कि पाक को प्रतिक्रिया के लिए वक्त देना चाहिए तो वहीं कुछ विशेषज्ञों को लगता है कि पाकिस्तान को इससे आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई करनी होगी.

पाकिस्तान ने पटानकोट हमले की जांच के लिए संयुक्त जांच दल (जेआईटी) बनाकर पहली बार स्पष्ट संदेश दिया है कि वो भारत के संग वार्ता जारी रखना चाहता है. पाकिस्तान चाहता है कि दोनों देशों के विदेश सचिवों के बीच होने वाली बातचीत रद्द न हो. फिलहाल इस बातचीत का भविष्य अधर में है.

इस संयुक्त जांच दल में पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ब्यूरो, मिलिट्री इंटेलिजेंस और आईएसआई सभी शामिल हैं. अगर ये फैसला प्रतीकात्मक हो तो भी इसका महत्व है क्योंकि पाकिस्तान ने पहली बार इसमें सेना को शामिल किया है. पाकिस्तान ने अभी तक इस बात से इनकार नहीं किया है कि पठानकोट हमले में उसके नागरिक शामिल नहीं थे.

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भारत को अभी तक इसकी आधिकारिक सूचना नहीं दी गयी है लेकिन पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार पाक प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने जेआईटी की घोषणा करने से पहले गृह मंत्री चौधरी निसार अली ख़ान, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) नासिर ख़ान जंजुआ, पीएम के विदेश नीति सलाहकार सरताज अज़ीज़, पीएम के विदेश नीति के विशेष सहायक तारिक फातमी और वित्त मंत्री इशाक़ डार से रायमशविरा किया था.

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार पठानकोट हमले की जांच के लिए टीम बनाने से पहले पाक पीएम ने सेना प्रमुख से बात की थी

खबरों के अनुसार नवाज़ ने पाक सेना के प्रमुख राहिल शरीफ़ से भी इस मसले पर चर्चा की. माना जा रहा है कि इस फैसले में पाक सेना प्रमुख की भी रजामंदी है.

भारत के विदेश मंत्रालय ने शर्त रखी थी कि 15 जनवरी को प्रस्तावित विदेश सचिवों के बीच होने वाली वार्ता तभी होगी जब पठानकोट हमले पर भारत द्वारा दी गयी जानकारी पर पाकिस्तान कोई कार्रवाई करेगा.

जेआईटी के गठन और सियालकोट, बहावलपुर और गुजरांवाला में संदिग्ध ठिकानों पर छापे से पाकिस्तान ये संदेश देना चाहता है कि वो पहल करने के लिए तैयार है.

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पिछले कुछ दशकों में शायद ये पहली बार हुआ होगा कि पाकिस्तान ने भारत में हुए आतंकी हमले की जांच के लिए टीम बनायी गयी है. इस दौरान भारत में जो हमले हुए हैं उनमें साल 2005 में हुआ दिल्ली धमाका(70 लोग मरे) और मुंबई ट्रेन धमाका (209 लोग मरे) तथा साल 2008 में मुंबई हमला (171 लोग मरे) शामिल हैं.

कई भारतीय कूटनीतिज्ञ पाक सरकार के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं लेकिन वो इसे लेकर थोड़े सशंकित हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि इस बात को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है कि इस जांच का क्या नतीजा होगा. या फिर ये जांच किस स्तर तक जाएगी.

पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त जी पार्थसारथी कहते हैं, "इस जांच का नेतृत्व आईबी के निदेशक करेंगे. अब ये देखना है कि उनके पास जांच के लिए कितना अधिकार है, क्या इस मामले में वो सैन्य अधिकारियों से पूछताछ कर सकेंगे? अभी इसपर कोई टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी. मैं इस बारे में कोई अंदाजा नहीं लगाना चाहता कि ये अपना छवि बचाने की कोशिश है या आतंकवाद पर लगाम लगाने की कोशिश की."

कुछ भारतीय कूटनीतिक जानकार मानते हैं कि पाकिस्तान को पठानकोट हमले पर ठोस कार्रवाई करनी होगी

पूर्व राजनयिक राकेश सूद मानते हैं कि पाकिस्तान के इस कदम से वार्ता को दोबारा पटरी पर लाने में मदद मिलेगी. वो कहते हैं, "दोनों देश वार्ता करने में इच्छुक लग रहे हैं. पाकिस्तान का ये कदम उसी दिशा में उठाया गया एक कदम प्रतीत होता है."

पूर्व राजनयिक और राजनीतिक टिप्पणीकार विवेक काटजू मानते हैं कि पाक का ये कदम महज प्रतीकात्मक है. काटजू मानते हैं कि जब तक पाकिस्तान जैश-ए-मोहम्मद के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं करता जेआईटी बनाने का कोई ख़ास मतलब नहीं है.

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काटजू कहते हैं कि अगर पाकिस्तान भारत और विश्व की चिंताओं को गंभीरता से लेता है तो उसे अपने एनएसए को भारत भेज कर जेआईटी की जांच के नतीजे साझा करना चाहिए.

हालांकि कुछ आलोचक कहते हैं कि अगर भारत पाकिस्तान से जांच के परिणाम मांगेगा तो उसे भी अपनी जांच की प्रगति पर जवाब देना होगा. खुद भारत अब तक इस हमले की जांच में बहुत आगे नहीं बढ़ सका है.

रिसर्च एंड एनालिसिस(रॉ) के पूर्व प्रमुख सीडी सहाय का मानना है कि पाकिस्तान को प्रतिक्रिया के लिए समय देना चाहिए.

सहाय कहते हैं, "हमारी जांच भी अभी शुरू ही हुई है. अभी हमने एसपी सलविंदर सिंह से पूछताछ शुरू की है. अगर पाकिस्तान भारत से मामले के संदिग्धों का नाम मांगेगा तो भारत क्या जवाब देगा? जाहिर है हमें भी और समय चाहिए. इसलिए हमें ये ध्यान में रखना चाहिए कि पाकिस्तान ने इस मामले का संज्ञान लेने काफी तत्परता दिखायी."

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First published: 13 January 2016, 8:15 IST
 
सुहास मुंशी @suhasmunshi

He hasn't been to journalism school, as evident by his refusal to end articles with 'ENDS' or 'EOM'. Principal correspondent at Catch, Suhas studied engineering and wrote code for a living before moving to writing mystery-shrouded-pall-of-gloom crime stories. On being accepted as an intern at Livemint in 2010, he etched PRESS onto his scooter. Some more bylines followed in Hindustan Times, Times of India and Mail Today.

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