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रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर गरमायी जम्मू कश्मीर की सियासत

सादिक़ नक़वी | Updated on: 25 December 2016, 9:11 IST
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QUICK PILL
  • शरणार्थियों के लिए भारत में कोई विशेष कानून नहीं है. ये शरणार्थी पूरी तरह से यूनाइटेड नेशंस हाई कमीशन फॉर रेफ्यूजीज (यूएनएचसीआर) की गाइडलाइन पर निर्भर हैं.
  • जम्मू में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों के बारे में कुछ स्थानीय गुट यह बात फैला रहे हैं कि यह सब एक षडयंत्र के तहत हो रहा है.

म्यांमार में अपने साथ हुए अत्याचार के चलते दर-बदर होकर जम्मू मे रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए यहां समस्या बढ़ती जा रही है. यहां के अलगाववादी गुट और नेशनल कांफ्रेंस सहित एक बड़ा राजनीतिक वर्ग हाल के दिनों में पश्चिम पाकिस्तान से भारत में आए शरणार्थियों को पहचान-पत्र देने के फैसले का विरोध कर रहा था. अब इन्हीं के साथ रोहिंग्या शरणार्थियों का विवाद भी उठ खड़ा हुआ है. शरणार्थियों के लिए भारत में कोई विशेष कानून नहीं है. ये शरणार्थी पूरी तरह से यूनाइटेड नेशंस हाई कमीशन फॉर रेफ्यूजीज (यूएनएचसीआर) की गाइडलाइन पर निर्भर हैं.

जम्मू में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों के बारे में कुछ स्थानीय गुट यह बात फैला रहे हैं कि यह सब एक षडयंत्र के तहत हो रहा है. जम्मू और कश्मीर की नेशनल पैंथर पार्टी के पूर्व सांसद भीम सिंह ने हाल ही में एक विदेशी न्यूज एजेंसी से कहा, 'यह बहुत बड़ा षडयंत्र है, और इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है. जम्मू में 23,000 से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान शरण ले चुके हैं. जम्मू में सभी, चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान चिंतित हैं. इस संबंध में एक राज्य स्तरीय शिष्टमंडल गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी मिला था और रोहिंग्या को लेकर अपनी चिंता जताई थी.'

जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों में मौजूदा सरकार में सबसे बड़ी आवाज़ राम माधव ने भी हाल ही में ऐसा बयान दिया मानो कुछ बड़ा अनर्थ हो गया हो. उन्होंने कहा, 'रोहिंग्या यूएन से पास ले रहे हैं और विभिन्न शहरों में फैल रहे हैं, इस ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए.'

राम माधव ने कहा, 'रोहिंग्या यूएन पास लेकर विभिन्न शहरों में फैल रहे हैं, इस ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए'

इससे पहले उन्होंने एक ट्वीट किया था कि श्रीनगर में यूनाइटेड नेशंस ऑब्जर्वर्स ग्रुप का दफ्तर 'अनावश्यक उत्तेजना' फैला रहा है. उन्होंने सलाह दी कि इसे जम्मू-कश्मीर से बाहर शिफ्ट कर दिया जाय.

देश के सुरक्षा प्रतिष्ठान भी रोहिंग्या के मुद्दे पर चर्चा करते रहे हैं और उन्हें सुरक्षा के नजरिए से संवेदनशील मानते हैं. खासकर जम्मू के लिहाज से जिसकी एक बड़ी सीमा  पाकिस्तान के साथ लगी हुई है और हमेशा अशांत रहती है. हालांकि आज तक रोहिंग्या ऐसी किसी वारदात या घटना में शामिल नहीं रहे हैं जिससे देश की आंतरिक या वाह्य सुरक्षा को कोई खतरा हो. असल में ये स्वयं पीड़ित हैं जो अपना सबकुछ लुटाकर यहां पहुंचे हैं. रोहिंग्या मुसलमानों को हिंसक बौद्ध जनता और म्यांमार की सेना ने अपने घरों से बेदखल कर दिया था.

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप (आईसीजी) की रिपोर्ट

इस समूह के सदस्यों के इंटरव्यू के आधार पर इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप (आईसीजी) ने एक रिपोर्ट जारी की है. उसके अनुसार रोहिंग्या का एक संगठन जिसके शीर्ष 20 लोगों का सउदी अरब से संबंध है. सभी रोहिंग्या प्रवासी हैं या फिर उनकी विरासत रोहिंग्या है. ये सभी बांग्लादेश, पाकिस्तान और थोड़े बहुत भारत के हिस्सों में भागकर आ गए हैं. किसी वारदात में स्‌पष्ट रूप से इनका कोई हाथ नहीं रहा है. लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक हो सकता है कुछ रोहिंग्या भारत में असमाजिक गतिविधि में शामिल हों.

रिपोर्ट कहती है कि इसी संभावना को आधार बना कर हमले की वैधता पाने के लिए, इन समूहों ने फतवा जारी कर दिया. उनमें से कुछ हो सकता है, भारत से आए हों. सऊदी अरब, पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश सहित रोहिंग्या प्रवासी. भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान के लिए यह एक और सिरदर्द हो सकता है और इससे वास्तविक शरणार्थियों के लिए बसर करना मुश्किल हो जाएगा.

यूएनएचसीआर के अनुसार, इस बीच माधव की अपनी सरकार ने 'रोहिंग्या से सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं जताई.' यूएनएचसीआर की नीतिगत सहयोगी इप्शिता सेनगुप्ता ने कैच को बताया कि 'सरकार की ओर से कोई अधिकारिक सूचना नहीं है.'

देश में बिना प्रामाणिक दस्तावेज के आने के करण 400 रोहिंग्यों को नजरबंद किया गया है

उन्होंने माधव के ट्वीट पर भी टिप्पणी देने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि 'यूएनएचसीआर सरकार के साथ सरोकार रखती है, राजनेताओं के साथ नहीं.' उन्होंने कहा कि भारत सरकार उनके साथ उदार और सहयोगात्मक रही है.

आपराधिक गतिविधियों में रोहिंग्या नहीं के बराबर हैं. एक शेख मोहम्मद पर 2014 के बर्धवान विस्फोट में शामिल होने का आरोप था, पर यह पुष्ट नहीं हो सका कि वे  रोहिंग्या हैं. हाल में बिहार पुलिस ने मुस्तफा कमाल और मोहम्मद सलीम को बंगाल से जम्मू जाते हुए पकड़ने का दावा किया और उन्होंने 'मंजूर' किया कि वे 'जम्मू-कश्मीर में भारत विरोधी तत्वों के संपर्क में हैं.' कहा जा रहा है कि दोनों रोहिंग्या हैं. इनके चलते सबसे सभी शरणार्थियों के प्रति संदेह पैदा होगा, जबकि वे पहले से ही बेहद दुखी औऱ परेशान हैं.

देश में बिना प्रामाणिक दस्तावेज के आने के करण 400 रोहिंग्यों को नजरबंद किया गया है, पर ज्यादातर को विदेशी अधिनियम 1946 के अधीन. सेनगुप्ता ने कहा कि सरकार उन्हें यूएनएचसीआर के पास जाने में मदद कर रही है ताकि उन्हें शरणार्थी पास मिल सके. सेनगुप्ता ने आगे कहा, 'शरणार्थियों को आतंकवाद से जुड़ा माना जा रहा है, जबकि वे पीड़ित हैं, अपराधी नहीं.'

यूएनएचसीआर के मुताबिक इस देश में शरण पाने के बाद भी रोहिंग्या शरणार्थी महफूज नहीं हैं. रिपोर्ट थी कि 20 शरणार्थियों से ज्यादा को मथुरा, उत्तरप्रदेश से बंधुआ मजदूरी से छुड़ाया गया था.

रोहिंग्या सबसे ज्यादा भारत में शरण लेना पसंद करते हैं, फिर भी उनमें से ज्यादातर बांग्लादेश और दक्षिणपूर्व एशियाई राष्ट्रों में शरण ले रहे हैं. इप्शिता सेनगुप्ता के मुताबिक देश में रोहिंग्या की आबादी में कोई 'असामान्य बढ़ोत्तरी' नहीं देखी गई है.

वर्तमान में भारत में म्यांमार से 19,727 शरथार्थी हैं, यूएनएचसीआर के हाल के आंकड़ों के मुताबिक ये सभी रोहिंग्या नहीं हैं. सबसे ज्यादा जम्मू में हैं- 5100. काफी आबादी मेवात, हरियाणा, हैदराबाद, तेलंगाना, और दिल्ली में मदनपुर खादर, कालिंदी कुंज और शहीन बाग में भी रहती है.

First published: 25 December 2016, 9:11 IST
 
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