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मोदी को तीसरी क्रांति का नेता कहने वाले इजराइल के पूर्व राष्ट्रपति शिमोन पेरेज का निधन

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:46 IST
(फाइल फोटो)

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता इजराइल के पूर्व राष्ट्रपति शिमोन पेरेज़ का निधन हो गया है. 93 साल की उम्र में उन्होंने अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांसें लीं. दो हफ्ते पहले ही स्ट्रोक के बाद से वह अस्पताल में भर्ती थे.

शिमोन पेरेज को इजराइल और फलस्तीनियों के बीच हुई अहम संधि के लिए भी जाना जाता है. अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल में इजराइल और फलस्तीनियों के बीच हुई ऑस्लो संधि में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी.

इस संधि के बाद पेरेज को 1994 में यासिर अराफात और इत्जाक रॉबिन के साथ संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. वो इजराइल के जन्म से लेकर बाद के दौर में सियासी रूप से सक्रिय रहे.

इजराइल के संस्थापकों में से एक शिमोन पेरेज ने देश का तकरीबन हर प्रमुख प्रभार संभाला था. 1948 में इजराइल बनने के बाद वे दो बार देश के प्रधानमंत्री और एक बार राष्ट्रपति बने.

इजराइल के इतिहास के गवाह

इजराइल के पूर्व राष्ट्रपति शिमोन पेरेज 1953 में रक्षा मंत्रालय संभालने वाले सबसे कम उम्र के डायरेक्टर-जनरल थे. उस वक्त वे महज 29 साल के थे. इसके छह साल बाद 1959 में वे मंत्री भी बने. तब से लेकर अभी तक वे इतिहास के एक समूचे अध्याय के गवाह रहे हैं.

इस्राइल के पूर्व राष्ट्रपति शिमोन पेरेज का पीएम नरेंद्र मोदी पर दिया बयान काफी चर्चित रहा था. दो साल पहले पेरेज ने दिल्ली में कहा था कि नरेंद्र मोदी भारत में तीसरी क्रांति का नेतृत्व कर रहे हैं.

पेरेज ने कहा था, "पहली क्रांति का नेतृत्व महात्मा गांधी किया था और दूसरी क्रांति का जवाहरलाल नेहरू ने. अब नरेंद्र मोदी की अगुआई में भारत में तीसरी क्रांति की शुरुआत हो गई है."

पीएम मोदी के मुरीद पेरेज

नवंबर 2014 में पीएम मोदी से मुलाकात करने वाले पेरेज ने कहा, "मैं आपके प्रधानमंत्री से मिला और वह ‘तीसरी क्रांति’ ला रहे हैं. पहली महात्मा गांधी, जिन्हें मैं पैगम्बर कहूंगा, ने शुरू की. उसके बाद जवाहरलाल नेहरू ने इस बात को सुनिश्चित किया कि कैसे सतत भारत का आधार बनाया जाए. उन्होंने ऐसा कुछ किया जो असामान्य है. रूस से पंच वर्षीय योजना ली और एमआईटी (अमेरिकी मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी) से भी ग्रहण किया."

पेरेज ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा, "इसके बाद प्रधानमंत्री (मोदी) आए जिनका भारत को लेकर व्यापक अनुभव और ज्ञान है और गांधी की भावना तथा नेहरू के व्यवहारवाद को मिलाकर ‘तीसरी क्रांति’ शुरू की. यूं हमें नैतिक निर्णय नहीं देना चाहिए, फिर भी हम भारत को नई ऊंचाइयों पर ला सकते हैं."

First published: 28 September 2016, 9:49 IST
 
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