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भारत ने दिया सार्क देशों को उपहार, इसरो ने किया साउथ एशिया सैटेलाइट लॉन्च

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 May 2017, 18:53 IST

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) ने शुक्रवार को एक और महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल करते हुए सार्क सैटेलाइट को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से प्रक्षेपित किया. शांति का संदेश लेकर यह सैटेलाइट अंतरिक्ष के लिए रवाना किया गया. इसरो द्वारा GSLV-F09 रॉकेट के जरिये 2,230 किलोग्राम के दक्षिण एशिया सैटेलाइट GSAT-9 की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग की गई.

इसरो द्वारा इस सार्क सैटेलाइट के सफल प्रक्षेपण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दक्षिण एशियाई सैटेलाइट की लॉन्चिंग पर देश को गर्व है. यह ऐतिहासिक अवसर है और GSAT-09 की लॉन्चिंग से दक्षिण एशिया की प्रगति और बढ़ेगी.

 

न केवल पीएम मोदी बल्कि सार्क राष्ट्रों के अध्यक्षों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इस सफल प्रक्षेपण पर शुभकामनाएं दीं. अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, भूटान के राष्ट्राध्यक्ष समेत 6 देशों के प्रमुखों ने इस अवसर बधाई दी. अशरफ घानी ने कहा कि इस प्रक्षेपण से क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा.

 

इस सैटेलाइट लॉन्च के बाद इसरो के वैज्ञानिकों ने एक दूसरे को बधाई दी. दरअसल यह उपग्रह भारत द्वारा सार्क देशों के लिए उपहार के तौर पर दिया गया है. इसे भारत की स्पेस डिप्लोमेसी में बड़ी उड़ान मानी जा रहा है. इसके जरिए पाकिस्तान को छोड़कर बाकी साउथ एशियाई देशों को कम्युनिकेशन की सुविधा मिलेगी.

इस मिशन में अफगानिस्तान, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका शामिल हैं. इस प्रोजेक्ट पर 450 करोड़ रुपयए का खर्च आया है. इस उपग्रह का जीवनकाल 12 वर्षों का होगा. तीन साल में बना यह 2,230 किलो वजनी उपग्रह पूरी तरह संचार उपग्रह है.

 

सरकार की माने तो यह उपग्रह टेलीकम्यूनिकेशन और प्रसारण संबंधी सेवाओं जैसे- टीवी, डीटीएच, वीसैट, टेलीएजुकेशन, टेलीमेडिसिन और आपदा प्रबंधन सहयोग को संभव बनाएगा. साथ ही इस उपग्रह में भागीदार देशों के बीच हॉट लाइन उपलब्ध करवाने की भी क्षमता है. बता दें कि दक्षिण एशियाई देशों का क्षेत्र भूकंप, चक्रवातों, बाढ़, सुनामी आदि के लिहाज से संवेदनशील है, इसलिए यह आपदा के समय पर उपयोगी संवाद लिंक स्थापित करने में भी मदद कर सकता है. 

आठ सदस्य देशों वाले सार्क समूह में पाकिस्तान भी शामिल है. मगर पाक ने भारत के इस उपहार को लेने से मना कर दिया है. इस परियोजना में सार्क के बाकी सातों देश भारत, श्रीलंका, भूटान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और मालदीव शामिल हुए.

भारत ने दक्षिण एशिया उपग्रह के जरिये अपने वैदेशिक कूटनीति में बड़ा दांव लगाया है. इस परियोजना से भारत अंतरिक्ष में अपने लिए एक अलग स्थान बना लेगा. इस उपग्रह से भारत के पड़ोसी देशों को अंतरिक्ष आधारित प्रौद्योगिकी के बेहतर इस्तेमाल में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

First published: 5 May 2017, 18:53 IST
 
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