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भारतीय मछुआरों की हत्या के मामले में इटली के नौसैनिकों को सुप्रीम कोर्ट ने दी सशर्त जमानत

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 February 2017, 8:24 IST
(फाइल फोटो )

केरल में दो भारतीय मछुआरों की हत्या के मामले में आरोपी इतालवी मरीन मैसिमिलियानो लाटोर को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों इतालवी मरीन को सशर्त जमानत दे दी. 

इटली सरकार की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने हेग कोर्ट का फैसला आने तक दोनों इतालवी मरीन मैसिमिलियानो लाटोर और सल्वाटोर जिरोन को इटली में रहने की मोहलत दी है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इतालवी मरीन सल्वाटोर जिरोन को कुछ शर्तों के साथ इटली जाने की इजाज़त दी थी. इस आदेश के बाद जिरोन हेग कोर्ट का फैसला आने तक अपने देश इटली में रह सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि हेग कोर्ट का फैसला आने तक हर तीन महीने में केंद्र हेग की ट्रिब्यूनल की कारवाई की प्रगति रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार, मरीन और मछुआरों के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद ये आदेश दिया.

क्या है मामला?   

गौरतलब है कि समुद्री तेल टैंकर 'एनरिका लेक्सी' पर सवार इटली के दो नौसैनिकों ने फरवरी 2012 में केरल के तट से परे दो मछुआरों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. दोनों नौसैनिकों को गिरफ्तार कर लिया गया था.

मैसिमिलियानो लाटोर और सल्वाटोर जिरोन नाम के दो नौसेनिकों को 2012 में ही हत्या के आरोप में ग़िरफ़्तार कर लिया गया था. हालांकि इन नौसेनिकों का कहना था कि उन्होंने दो भारतीय मछुआरों वैलेंटीन और अजेश बिंकी को समुद्री डाकू समझ कर गोली चलाई थी.

इटली उसी समय से मैसीमिलैनो लातोरे और सल्वातोर जिरोन नामक इन दोनों मरीनों की स्वदेश वापसी की कोशिश कर रहा है. इसमें से एक नौसेनिक लातोरे इलाज के बहाने इटली जाने में सफल रहा और बाद में भारत लौटने से इनकार कर दिया.

भारत की सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में लातोरे को चिकित्सकीय आधार पर जमानत दी थी. अब इटली की सरकार का कहना है कि बीमारी के चलते वो मरीन को वापस नहीं भेज सकती. इसके बाद भारत ने दूसरे मरीन गिरोन को स्वदेश भेजने से मना कर दिया. इसे लेकर दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे.

इटली का कहना है कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में हुई थी, इसलिए भारत को उन पर मुकदमा चलाने का कानूनी अधिकार नहीं है इसलिए इसका फैसला हेग कोर्ट में होना चाहिए.

First published: 28 September 2016, 5:42 IST
 
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