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चौतरफा हो सकता है हमला, जापान ने भी चीन की तरफ मोड़ी अपनी खतरनाक मिसाइलें

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 June 2020, 13:23 IST

जहां एक तरफ पूरी दुनिया कोरोना वायरस महामारी से जूझ रही है और इस वायरस को फैलाने का आरोप चीन पर लगा रही है वहीं चीन इस मौके का फायदा अपनी विस्तारवादी नीतियों को आगे बढाकर उठा रहा है. चीन का सीमा विवाद सिर्फ भारत के साथ ही नहीं बल्कि अन्य देशों के साथ भी उभर रहा है. 15 जून को लद्दाख की गलवान घाटी में भारत के साथ झड़प के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव बढ़ गया है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार चीन, दक्षिण चीन सागर में अपनी गतिविधियों के अलावा, जापान और ताइवान के क्षेत्रों पर भी कब्ज़ा करना चाहता है. एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जापान ने इसके मद्देनजर 'ड्रैगन' को जवाब देने के लिए अपनी मिसाइलों को चीन की ओर सीमा पर तैनात कर दिया है.

एशिया समाचार की एक रिपोर्ट के अनुसार जापान अपनी वायुसेना ताकत बढ़ा रहा है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन के युद्ध के इरादों के मद्देनजर जापान अपनी वायु रक्षा में वृद्धि कर रहा है. जापान इस साल जून तक चार सैन्य ठिकानों पर पैट्रियट पैक-3 एमएसई एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम को तैनात करेगा. यूएस-जापान न्यूज के अनुसार "पीएसी -3 एमएसई किसी भी हिट-टू-किल को काउंटर करने में सक्षम है. जापान में तैनात वर्तमान पैट्रियट PAC-3 की अधिकतम सीमा 70 किमी है और PAC-3 MSE के नए संस्करण में इसे बढ़ाकर 100 किमी कर दिया गया है.


ऐसा माना जा रहा है कि चीन पर चौतरफा हमला किया जा सकता है. अमेरिका भी लगातार चीन को चेतावनी देता आया है. बीते दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन को कोरोना वायरस फैलाने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार माना था. दिसंबर 2017 में अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने अमेरिका और इसके सहयोगी देशों के लिए पैट्रियट एडवांस्ड कैपेबिलिटी -3 और पीएसी-3 मिसाइलों को वितरित करने के लिए 944 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट किया था. भारतीय सशस्त्र बलों को प्रोत्साहन के रूप में केंद्र ने रविवार को 500 करोड़ का फंड हथियारों के अधिग्रहण के लिए दिया है. उड़ी हमले और पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट हवाई हमलों के बाद सशस्त्र बलों को इसी तरह की वित्तीय शक्तियां दी गईं.

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एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने "तीनों सेवाओं के वाइस चीफ को जो भी कमियां या आवश्यकता महसूस होती है, उसे भरने के लिए आवश्यक फास्ट ट्रैक प्रक्रियाओं के तहत आवश्यक हथियार प्रणालियों का अधिग्रहण करने के लिए प्रति प्रोजेक्ट 500 करोड़ रुपये तक की वित्तीय शक्तियां दी गई हैं."लद्दाख में चीन के साथ झड़प के बाद भारतीय वायुसेना ने अपने फ्रंटलाइन लड़ाकू विमानों को तैनात किया है, जिसमें Su-30MKI, Mig-29UPG और नए AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर शामिल हैं. लेह में CH-47 चिनूक हेवी लिफ्ट हेलीकॉप्टर भी तैनात किए गए हैं.

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First published: 22 June 2020, 13:09 IST
 
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