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भारत की शिकायत लेकर जापान पहुंचा विश्व व्यापार संगठन के पास, ये है पूरा मामला

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 May 2019, 13:28 IST

जापान ने मोबाइल फोन, बेस स्टेशन और राउटर पर भारत की ड्यूटी को लेकर विश्व व्यापार संगठन में शिकायत की है. जापान का कहना है कि भारत ने अपने 'मेक इन इंडिया' अभियान के बाद कहा था कि वह अपने घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए तमाम टैक्स को कम करेगा. जापान का कहना है कि भारत कुछ सामानों पर WTO द्वारा तय की गई दरों से ज्यादा ले रहा है.

जापान ने WTO में अपनी शिकायत में कहा है कि भारत ने विश्व व्यापार संगठन की सदस्यता की शर्तों में कहा था कि इन वस्तुओं पर आयात शुल्क शून्य प्रतिशत है लेकिन भारत ने मोबाइल फोन और बेस स्टेशनों पर 20% टैरिफ लागू किया है जबकि अन्य उत्पादों पर 10%, 15% और 20% टैरिफ लगाया. यूएन-डब्ल्यूटीओ के संयुक्त उपक्रम इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर द्वारा प्रदान किए गए व्यापार डेटा में दिखाया गया है कि जापान ने भारत के मोबाइल फोन आयात में 2011 में 53 मिलियन डॉलर और 2012 में 43 मिलियन डॉलर का योगदान दिया. 

भारत के मोबाइल फोन आयात पर फ़िलहाल चीन का कब्ज़ा है. 2018 में कुल 5.7 बिलियन डॉलर के स्विफ्ट और राउटर के भारत के आयात पर चीन और वियतनाम का कब्ज़ा था, जबकि जापान से आयात 52 मिलियन डॉलर था, जो भारतीय आयात बाजार का 1 प्रतिशत से भी कम है.

डब्ल्यूटीओ के नियमों के तहत, भारत के पास विवाद को निपटाने के लिए 60 दिन का समय है, लेकिन उसके बाद जापान डब्ल्यूटीओ को यह मांग कर सकता है कि कि भारत टैरिफ नियमों को तोड़ता है, तो एक सहायक पैनल गठित किया जाये.

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प भी भारत पर इम्पोर्ट  ड्यूटी को लेकर निशाना  साध चुके हैं. ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका भारत से होने वाले आयात पर कोई टैक्स नहीं लगाता है जबकि भारत अमेरिकी उत्पादों पर 100 फीसदी टैक्स लगा रहा है. ट्रम्प ने अमेरिकी मोटर साइकिल  हार्ले डेविडसन का उदाहरण भी दिया था. 

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First published: 15 May 2019, 12:03 IST
 
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