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असहनीय दर्द से छुटकारा पाने को मांगी मौत की इजाजत और मनाई पार्टी

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 24 July 2016, 15:33 IST
(फेसबुक)

लाइलाज बीमारी से जूझती एक 14 साल की किशोरी को इतना असहनीय दर्द झेलना पड़ता है, जिसकी कोई इंतहा नहीं. इसके बावजूद उसने इतने साल जिंदगी की खूबसूरती को देखा. लेकिन अब जब दर्द सहने की उसकी क्षमता जवाब दे गई तो उसने स्वैच्छिक मौत का रास्ता चुना. दर्द से छुटकारा पाने के लिए अब अपनी मौत का खुशी-खुशी इंतजार कर रही इस किशोरी ने इससे पहले एक जोरदार पार्टी मनाई.

यह मामला है अमेरिका के विस्कॉन्सिन का जहां रहने वाली 14 वर्षीय किशोरी जेरिका बॉलेन जब केवल आठ माह की ही थीं को एक गंभीर बीमारी से पीड़ित पाया गया. डॉक्टरों ने जेरिका को स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी टाइप 2 का रोगी बताया और तब से उसके 30 से ज्यादा ऑपरेशन हो चुके हैं  और दिन में वो 12 घंटे वेंटिलेटर पर बिताती है. 

अगस्त के अंत में मौत की योजना बनाने वाली जेरिका के सम्मान में उनकी मां और मित्रों ने शुक्रवार को एक पार्टी आयोजित की. 'जे का लास्ट डांस' नामक इस आयोजन में उनके दोस्त, रिश्तेदार समेत तमाम लोग पहुंचे और खूब मस्ती की. जेरिका की ख्वाहिश के मुताबिक ही एप्पलटन के द ग्रैंड मेरिडन को पीले-काले रंग में सजाया गया था और वहां आने वाले हर मेहमान के लिए खाने-पीने के ढेरों इंतजाम थे. 

इतना ही नहीं बीच में एक बड़ा सा डांस फ्लोर बना हुआ था जहां जेरिका और उसके दोस्तों ने जमकर यादगार डांस किया. इस रात को और ज्यादा यादगार बनाने के लिए जेरिका को प्रॉम क्वीन का ताज पहनाया गया. हालांकि खुशियां मनाते, नाचते-गाते यह सभी लोग अपनी हंसी के पीछे एक भारी गम को छिपाए हुए थे.

बता दें कि इस जेनेटिक बीमारी से जूझने वाली जेरिका को असहनीय दर्द झेलना पड़ता है. हाल ही में जेरिका का एक ऑपरेशन हुआ था जिसके बाद से उसका दर्द इतना बढ़ गया कि उसने मौत का रास्ता चुनने का फैसला लिया. 

एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में जेरिका ने कहा, "मैं बहुत पहले से ही इसके लिए तैयार थी. उस सर्जरी के बाद मैंने कुछ देर खामोशी से बैठने के बाद सोचा, 'क्या मैं यह अपने लिए कर रही हूं या अपने परिवार के लिए?' फिर मैंने महसूस किया कि यह मैं अपने परिवार के लिए कर रही हूं."

जेरिका के मां जेन बॉलेन ने काफी पहले अपनी बेटी से यह वादा किया था कि उसे दर्द से छुटकारा दिलाने के लिए वो उसकी कोई भी ख्वाहिश पूरी करने को तैयार हैं. लेकिन इसके बाद जेरिका द्वारा लिया गया फैसला मान लेना इतना आसान नहीं था.

जेन ने कहा, "यदि उसे इससे शांति मिलती है तो मुझे इससे जुड़कर शांति पाने का रास्ता ढूंढ़ना होगा. अन्य लोगों की तुलना में उसने अपनी जिंदगी के 14 साल का वक्त दिया है. वो अब फैसला लेने के लिए परिपक्व है. यह उसका शरीर और उसका दर्द है."

तमाम डॉक्टरों से संपर्क करने के बाद जेन ने अपनी बेटी को इतनी लंबी आयु देने में मदद की और वो भी पूरी खुशी के साथ. वो भी तब जब वो कभी घिसट, चल या दौड़ नहीं सकती थी.

लेकिन हकीकत को दरकिनार भी नहीं किया जा सकता और जेन को पता है कि उनकी बेटी उनसे दूर जाने वाली है. इसलिए जेन ने फैसला किया कि वो अपनी बेटी को इससे पहले हर खुशी देंगी और इन गर्मियों में वो जो चाहेगी करेंगी. 

इसके बाद गर्मियां खत्म होने के बाद अगस्त के आखिरी में जेरिका को वेंटिलेटर से हटा दिया जाएगा. हालांकि यह बताना असंभव है कि बिना वेंटिलेटर के जेरिका कितने दिन तक जीवित रह सकेगी, लेकिन जेन को उम्मीद है कि जेरिका का दर्द ज्यादा लंबे वक्त तक नहीं रहेगा. 

जेरिका का कहना है कि उसने जो यह फैसला लिया है उस पर वो काफी खुश भी है और दुखी भी. यह फैसला लेते वक्त आंखें आंसुओं से भर गई लेकिन फिर लगा कि अब तो एक अच्छी जगह जाना है. इसके बाद यह दर्द भी नहीं सहना होगा. 

अपनी पूरी जिंदगी में दर्द के बावजूद खुश रहती आईं जेरिका कहती हैं, "मुझे आश्चर्य होता है कि क्यों भगवान ने मुझे यह बीमारी दी और मुझे पता है कि मैं कभी इसका जवाब भी नहीं पा सकूंगी. लेकिन लगता है भगवान ने मुझे इसलिए चुना क्योंकि मैं मजबूत हूं."

First published: 24 July 2016, 15:33 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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