Home » इंटरनेशनल » Kamal Haasan objects to censorship at Harvard
 

ऑक्सफोर्ड यूनियन में कमल हसन ने सेंसरबोर्ड को लताड़ा

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 February 2016, 23:16 IST

दिग्गज सिने अभिनेता कमल हसन ने सेंसर बोर्ड की उपयोगिता पर अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि वह सेंसरशिप के खिलाफ हैं. हसन सेंसरबोर्ड की भूमिका सिर्फ सर्टिफिकेट देने वाली संस्था के रूप में देखते हैं. ज्यादा से ज्यादा यह वैधानिक चेतावनी के लिए फिल्मों को मजबूर कर सकती है.

सेंसर बोर्ड में सुधार के लिए गठिन समिति के सदस्य कमल हसन हार्वर्ड विश्वविद्यालय में बीते सप्ताहांत आयोजित भारतीय सम्मेलन में सेंसरशिप और लोकतंत्र पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे.

हार्वर्ड के छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सेंसर करना या कैंची चचलाना गलत है. पहले तो मैं यह साफ करना चाहूंगा कि सेंसर के खिलाफ जारी अभियान एक सुधारवादी कदम है. इसलिए अब इसे सेंसर बोर्ड बिल्कुल नहीं कहा जाना चाहिए. वह एक सर्टिफिकेशन बोर्ड हैं. 

सहिष्णुता इसलिए है क्योंकि आप इसे बर्दाश्त कर रहे हैं

कमल नेे पाइरेसी को भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक गंभीर संकट मानते हुए आरोप लगाया कि काले धन को बढ़ावा देने के लिए जानबूझकर कोशिशें की जा रही हैं. 

उन्होंने कहा कि सरकार को भारतीय फिल्म उद्योग के साथ सम्मानित और मर्यादित बर्ताव करना चाहिए. उन्होंने कहा, "फिल्म के टिकट की अधिकतम कीमत तय करने के मुद्दे पर उद्योग से अधिकांश लोग यह कह रहे हैं कि सरकार को इसे तय करने का कोई हक नहीं है. हमसे भी अन्य उद्योगों की ही तरह बर्ताव करें. हम आपको दिखा देंगे कि हम भी आईटी की ही तरह बेहतरीन हैं. यदि वे थोड़ा सा बदलाव करें तो हम भी जनता के लिए हजारों करोड़ रुपये का योगदान दे सकेंगे. "

वहीं, भारत में असहिष्णुता की फैलती खबरों के संबंध में एक छात्र के सवाल का जवाब देते हुए  कमल ने कहा कि देश को विभाजित होने से बचाने के लिए सभी समुदायों को एक दूसरे को स्वीकार करने की जरूरत है. एकता और अखंडता को बनाए रखने के प्रयास किए जाने चाहिए.

उन्होंने कहा, "मैं सहिष्णुता शब्द के खिलाफ हूं. एक दोस्त को बर्दाश्त नहीं स्वीकार करें. आप सबकुछ क्यों बर्दाश्त करें? यह विचार होता कि आप स्वीकार करें या अस्वीकार. आखिर आप किसी को क्यों बर्दाश्त करेंगे. असहिष्णुता इसलिए है क्योंकि आप इसे बर्दाश्त कर रहे हैं. बर्दाश्त मत कीजिए. मुसलमानों या हिंदुओ को नागरिक की तरह एक-दूसरे को स्वीकार करना चाहिए. मुसलमानों की स्वीकार कीजिए क्योंकि तिरंगे से हरे रंग को बाहर नहीं निकाला जा सकता."

First published: 8 February 2016, 23:16 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी