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पाकिस्तान में है भगवान शिव का 1000 साल पुराना विशाल मंदिर, वहां ऐसे मनाते हैं महाशिवरात्रि का पर्व

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 March 2019, 13:12 IST

आज पूरा देश महाशिवरात्रि का पर्व मना रहा है. इस मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं भगवान शिव के एक मंदिर के बारे में जो हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में मौजूद है.  इस मंदिर में हर साल पाकिस्तान और हिंदुस्तान के लोग हर्षोल्लास के साथ महाशिवरात्रि का पर्व मनाते हैं लेकिन इस बार यहां ऐसा नजारा दिखाई नहीं दे रहा है.

बता दें कि भगवान शिव को समर्पित ये मंदिर पाकिस्तान के लाहौर से 280 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर बना हुआ है. इस मंदिर का नाम है कटासराज. इस मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन इस बार कोई श्रद्धालु इस मंदिर में भोलेनाथ के दर्शन के लिए नहीं पहुंच रहा. बताया जाता है कि भोलेनाथ का ये मंदिर 1000 साल से भी ज्यादा पुराना है. जो पाकिस्तान में सिंध प्रांत के चकवाल जिले में आता है.

दरअसल, पुलवामा हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया. इसके बाद भोले के भक्तों ने इस साल पाकिस्तान का वीजा नहीं लिया. बताया जाता है कि इससे पहले ऐसा 1999 के करगिल युद्ध और 2008 के मुंबई हमले के बाद हुआ था. इस मंदिर में आज भले ही श्रद्धालु नहीं पहुंच रहे हों लेकिन 1000 साल पुराने इस मंदिर को महाशिवरात्रि के लिए साफ किया गया है. भगवान शिव के इस मंदिर का प्रतिबिंद मंदिर के पास बने 150 फीट लंबे और 90 फीट चौड़े पवित्र सरोवर के पानी में साफ दिखाई देता है.

बता दें कि कुछ समय पहले तक इसके पास लगी सीमेंट की फैक्ट्रियां बोरवेल से पानी निकाल रही थीं, जिससे जमीनी पानी का स्तर लगातार कम होता जा रहा था और सरोवर सूखने के कगार पर पहुंच गया था. फिर सिंध के हिंदुओं की याचिका पर पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने सरोवर को ठीक करने के आदेश दिया.

यही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने यहां की फैक्ट्रियों पर 10 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया था. साथ ही फैक्ट्रियों को वहां से हटाने के विकल्प पर भी विचार करने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद पाक सरकार मंदिर को यूनेस्को की हैरिटेज लिस्ट में शामिल कराने की कोशिश कर रही है.

बता दें कि इंडो-पाक प्रोटोकॉल 1972 के अनुसार हर साल 200 भारतीय कटासराज जा सकते हैं. इसी के तरह हर साल हिंदू धर्म के अनुयायी महाशिवरात्रि के मौके पर इस मंदिर में जाते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण छठी शताब्दी से नौवीं शताब्दी के मध्य कराया गया था. ऐसी मान्यता है कि यह मंदिर महाभारत काल यानि त्रेतायुग में भी था.इस मंदिर से जुड़ी पांडवों की कई कथाएं भी यहां प्रसिद्ध हैं. यह भी मान्यता है कि पांडवों ने वनवास के समय यहां कुछ समय बिताया था.

ऐसी मान्यता है कि कटासराज मंदिर का कटाक्ष कुंड भगवान शिव के आंसुओं से बना है. कटासराज मंदिर के कटाक्ष कुंड के निर्माण के पीछे एक कथा है. कहा जाता है कि जब देवी सती की मृत्यु हो गई, तब भगवान शिव उन के वियोग में बहुत दुखी हुए और रोए उनके आंसुओं से एक नदी बन गई. जिससे दो कुंड बन गए. जिसमें से एक कुंड राजस्थान के पुष्कर नामक तीर्थ पर है और दूसरा पाकिस्तान के कटासराज मंदिर में मौजूद है.

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First published: 4 March 2019, 13:12 IST
 
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