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जानिए मोदी के विदेश दौरों पर पाकिस्तानी मीडिया की प्रतिक्रिया

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 June 2016, 19:29 IST
(जंग डेली)

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छह दिवसीय पांच देशों की यात्रा दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रही है. लेकिन बुधवार को अमेरिकी संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बाद पाकिस्तान की मीडिया ने इसके होने वाले प्रभावों, पाकिस्तान को न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में शामिल न करने संबंधी तमाम बातों को सामने लाते हुए तमाम तरह की बातें लिखी.

जाहिर है कि नरेंद्र मोदी के अफगानिस्तान, कतर, स्विटजरलैंड, अमेरिका और फिर मैक्सिको के विदेश दौरे से पाकिस्तान में असहजता है. इस बात की संभावनाएं पैदा की जा रही है कि अगर भारत एनएसजी में शामिल हो जाता है तो इसका दक्षिण एशिया क्षेत्र में क्या प्रभाव पड़ेगा.

पाकिस्तान मीडिया के एक तबके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा और इस दौरान किए जा रहे प्रयासों को पाकिस्तान को घेरने की एक साजिश के रूप में बताया. साथ ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ सरकार से कहा गया कि वो भी शांत ना बैठें और भारत की इस कोशिश का पुरजोर जवाब देते हुए कदम उठाएं.

जानिए मोदी के भाषण और वैश्विक एकता पर दिए गए उनके विचारों के बाद क्या कहता है पाकिस्तान का मीडियाः

  • पाकिस्तान के डेली टाइम्स की खबर की मानें तो पाकिस्तान भी अब एनएसजी का सदस्य बनने के लिए लॉबीइंग करने में जुट गया है. 
  • बृहस्पतिवार को द न्यूज में छपी खबर में बताया गया कि एक पत्रकार वार्ता में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के सलाहाकार सरताज अजीज ने कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ सभी झगड़ों और शिकायतों के समाधान करने को वार्ता करने की दिशा में देख रहा है. वहीं, उन्होंने अफगानिस्तान पर अमेरिकी ड्रोन हमले की भी निंदा की.
  • इसी अखबार के संपादकीय में लिखा गया है कि गुजरात में मुसलमानों की हत्या में भूमिका के लिए जिस व्यक्ति को अमेरिका द्वारा प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई थी, आज उसके साथ अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और अधिकांश कांग्रेस के लोग हैं.
  • जंग अखबार ने मोदी-ओबामा की तस्वीर को पहले पन्ने पर छापने के साथ ही लिखा है कि एनएसजी सदस्यता पर भारत को मिला अमेरिका का समर्थन.
  • पाकिस्तान के डॉन अखबार की मानें तो भारत-अमेरिका के बीच समझौते से भारत को परमाणु ईंधन को सैन्य इस्तेमाल के लिए जुटाने और पाकिस्तान पर बढ़त बनाने की ताकत मिल सकती है. इतना ही नहीं यह भी लिखा गया कि अमेरिका की भारत को एनएसजी सदस्यता दिलाने की उत्सुकता वैश्विक परमाणु व्यवस्था में इस 'असमान व्यवहार' से पाकिस्तान पर होने वाले प्रभाव को नकारा जा रहा है.
  • वहीं, एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने लिखा कि अमेरिका के लिए भारत परमाणु कार्यक्रम के नागरिक इस्तेमाल और सैन्य हथियारों के लिहाज से विशाल बाजार है. यही कारण है जिसके चलते अमेरिका पाकिस्तान का समर्थन कर रहा है कि वो एनएसजी का सदस्य बने. 
First published: 9 June 2016, 19:29 IST
 
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