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कोफी अन्नान : घाना से निकलकर जिनेवा तक का यादगार सफर

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 August 2018, 17:05 IST

पूर्व संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान का 80 साल की उम्र में शनिवार को निधन हो गया. दुनियाभर के नेताओं ने अन्नान के निधन पर शोक व्यक्त किया. इससे पहले अन्नान के ट्विटर हैंडल पर एक आधिकारिक बयान साझा किया गया. "बेहद दुःख के साथ अन्नान परिवार और कोफी अन्नान फाउंडेशन ने घोषणा की है कि संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कोफी अन्नान की छोटी की बीमारी के बाद 18 अगस्त शनिवार को निधन हो गया.

संयुक्त राष्ट्र में काम कर चुके कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा- सुनकर गहरा झटका लगा कि मेरे दोस्त और गुरु का निधन हो गया. आखिरी बार हमने बात की थी और उन्होंने 2022 में केरल आने के मेरे निमंत्रण स्वीकार कर लिया था. वह इतने फिट थे कि मुझे कोई संदेह नहीं था कि वह वक्त से पहले चले जायेंगे. शरूर ने कहा ''मैंने एक बड़े भाई को खो दिया है. अन्नान भारत के प्रशंसक, विकासशील दुनिया की आवाज़, अंतर्राष्ट्रीयता का एक पैरागोन और मानवता का एक उदाहरण थे. यूएन महासचिव एंटोनियो ग्युटेरेस ने अपने वक्तव्य में कहा- ''कोफी अन्नान अच्छे मार्गदर्शक थे. उनके निधन की खबर सुनकर गहरा दुःख हुआ''.

कोफ़ी अन्नान का जन्म 8 अप्रैल 1938 को गोल्ड कोस्ट (वर्तमान देश घाना) के कुमसी नामक शहर में हुआ. 1954 से 1957 तक कोफ़ी अन्नान ने मफिन्तिस्म स्कूल में शिक्षा ली. अन्नान 1957 में फ़ोर्ड फ़ाउन्डेशन की दी छात्रावृत्ति पर अमेरिका गए. वहां 1958 से 1961 तक उन्होंने मिनेसोटा राज्य के सन्त पौल शहर में मैकैलेस्टर कॉलेज में अर्थशास्त्र की पढ़ाई की और 1961 में उन्हें स्नातक की डिग्री मिली. 1961 में अन्नान ने अंतरराष्ट्रीय संबंध में जिनेवा के ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंटरनैशनल स्टडीज़ से डीईए की डिग्री की. उन्होंने 1971 से जून 1972 में ऐल्फ़्रॅड स्लोअन फ़ॅलो के तौर पर एमआईटी से मैनेजमेंट में एमएस की डिग्री प्राप्त की.


1962 में कोफ़ी अन्नान ने संयुक्त राष्ट्र की संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन के लिए एक बजट अधिकारी के रूप में काम शुरू कर दिया. वे विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ 1965 तक रहे. 1965 से 1972 तक उन्होंने इथियोपिया की राजधानी अद्दीस अबाबा में संयुक्त राष्ट्र की इकॉनोमिक कमिशन फ़ॉर ऐफ़्रिका के लिये काम किया. वो अगस्त 1972 से मई 1974 तक जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के लिये प्रशासनिक प्रबंधन अधिकारी के तौर पर रहे. 1973 की अरब-इज़राइली जंग के बाद मई 1974 से नवंबर 1974 तक वो मिस्र में शांति अभियान में संयुक्त राष्ट्र द्वारा कार्यरत असैनिक कर्मचारियों के मुख्य अधिकारी (चीफ़ पर्सौनेल ऑफ़िसर) के पद पर कार्यरत रहे. उसके बाद उन्होंने संयुक्त राष्ट्र छोड़ दिया और घाना लौट गए.

1976 में वे संयुक्त राष्ट्र में कार्य करने हेतु जिनेवा लौट गए. 1980 में वे संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायोग के उप-निदेशक नियुक्त हुए. 1984 में वह संयुक्त राष्ट्र के बजट विभाग के अध्यक्ष के रूप में न्यू यॉर्क वापिस आए. 1987 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र के मानव संसाधन विभाग और 1990 में बजट एवं योजना विभाग का सहायक महासचिव नियुक्त किया गया. मार्च 1992 से फ़रवरी 1993 तक वे शांति अभियानों के सहायक महासचिव रहे. मार्च 1993 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र का अवर महासचिव नियुक्त किया गया और वे दिसम्बर 1996 तक इस पद पर कार्यरत रहे.

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First published: 18 August 2018, 16:52 IST
 
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