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ये लड़की 6 दिन तक लड़ती रही खतरनाक घाटी से, इस उम्मीद ने बचाई जान

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 June 2018, 15:12 IST
(ABC News)

कहते हैं जिंदा रहने की एक उम्मीद इंसान को हर मुश्किल से बाहर निकाल लेती है. ऐसा ही कुछ हुआ साउथ कोरिया की एक लड़की के साथ. जो अपनी मां से मिलने और अपने घर के आरामदायक बिस्तर पर सोने की ख्वाहिश लिए चार दिन तक जंगली में बहती ठंडे पानी के बीच बिना कुछ खाए पिए जिंदा रही. इस लड़की ने अपनी कहानी 'टेल ऑफ सर्वाइवल इन ऑस्ट्रेलिया बुश' के साथ साझा की है.

दरअसल, साउथ कोरिया की 25 साल की जोही हान ऑस्ट्रेलिया घूमने गई थीं. एक दिन उत्तरी क्वींसलैंड में फोटो खींचने के दौरान हान का पैर फिसल गया और वो गहरी घाट में गिर गई. जहां तेज रफ्तार ठंडा पानी बह रहता है. हालांकि घाटी में गिरने से हान किसी तरह बच गईं. लेकिन वो बुरी तरह घायल हो चुकी थीं. निकलने का कोई रास्ता नहीं था. ऐसे में उन्होंने सोचा कि क्या वो मरने जा रही हैं.

हान ने हिम्मत नहीं हारी. जोही हान हर पल अपने मां-बाप से मिलने की सपना देखती रहती. वो सोचती कि एक दिन वो अपने मां-बाप से जरूर मिलेंगी और अपने घर के गर्म बिस्तर आराम से सोएंगी. ये ख्याल उन्हें इसलिए आते थे क्योंकि जहां हान फंसी हुई थी वहां का पानी का तापमान काफी कम था और ये कई बार शून्य डिग्री सेल्सियस तक हो जाता था.

हान इस भयानक घाटी में 6 दिनों तक बिना कुछ खाए पिए जिंदा रहीं. 6 दिन बार रेस्क्यू टीम ने हान को बचा गहरी घाटी से ढूंढ निकाला. रेस्क्यू टीम के एक सदस्य के मुताबिक हान 1 जून को अपने दोस्तों से ये कहकर लापता हो गई थीं कि वो माउंट टायसन पर चढ़ने जा रही हैं. गुरुवार को रेस्क्यू टीम ने हान को बचा लिया.

हान ने ऑस्ट्रेलिया के ब्रॉडकास्ट कोर्पोरेशन को बताया कि गिरने के बाद वो कई घंटे तक बेहोश रहीं. रात के जब हान जागी तो उन्होंने खुद को एक ढलान पर पाया. हान बताती है कि वहां कुछ नहीं कर सकती थी. वो एक ऐसी ढलान थी जहां जरा सा हिलना मेरी जान लेने के लिए काफी था.

जोही हान बताती है कि, "मैं बार-बार यही सोच रही थी कि क्या मैं मरने जा रही हूं? लेकिन मैं जीना चाहती थी. मुझे खाने की जरूरत थी, मैं खाना चाहती और मैं लोगों को दोबारा देखना चाहती थी. मैं अपने मां-बाप के बारे में बार-बार सोच रही थी." इतनी ऊंचाई से गिरने बाद भी हान के ज्यादा चोट नहीं आई.

 

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इस दुर्घटना में जोही हान के कुछ दांत टूट गए और शरीर पर कई जगह चोटें आई. वो बताती हैं कि उन्हें हर रात खतरनाक ठंडी रात का सामना करना पड़ा. लेकिन वो हर रात यही सोचती कि एक दिन उन्हें घर का खाना मिलेगा और आरामदायक बिस्तर.

इन्हीं कुछ ख्वाहिशों ने हान को हिम्मत दी और वो एक झरने के पास तक पहुंच गईं. जहां उन्हें पानी पिया और मदद के लिए आवाज लगाई. हान बताती है कि जब उन्हें रेस्क्यू टीम ने बताया तो उन्हें एहसास नहीं हो रहा था कि वो दोबारा जमीन पर पैर रखने वाली हैं.

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First published: 10 June 2018, 15:12 IST
 
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