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47 लोगों को मृत्युदंड सऊदी राजशाही के पतन की शुरुआत हो सकती है

पिनाक रंजन चक्रवर्ती | Updated on: 4 January 2016, 23:23 IST
QUICK PILL
  • बीते सप्ताह सऊदी अरब की अलग-अलग जेलों में एक ही दिन 47 दोषियों को गोली मारकर और सिर कलम करके सामहूिक सजा-ए-मौत दी गई.
  • तमाम घटनाएं और सऊदी शासकों द्वारा उठाए जा रहे कदम उनके भविष्य और अस्तित्व पर सवालिया निशान खड़ा करते हैं.

बीते शनिवार सऊदी अरब सरकार ने 21वीं सदी का सबसे वीभत्स रिकॉर्ड स्थापित करते हुए एक दिन में 47 कैदियों को जान से मारने की आधिकारिक तौर पर घोषणा की. इनमें से मिस्र और चाड के दो दोषियों को छोड़कर बाकी सभी सऊदी अरब के नागरिक थे.

वहाबी इस्लाम के सबसे सख्त नियमों को आदर्श मानने वाले इस अतिरूढ़वादी मुल्क में इनका पालन और क्रियान्वयन जरूरी है. सऊदी सरकार ने दावा किया कि उन्होंने देश भर की तमाम जेलों के अंदर आतंकवाद के दोषियों को गोली मारकर और सर कलमकर मौत के घाट उतार दिया.

इन सभी लोगों को मौत के घाट उतारने के बाद वहां के गृह मंत्री ने कुरआन के हवाले से एक बयान जारी कर कहा, "अल्लाह और उसके रसूलों के खिलाफ युद्ध छेड़ने और देश में शरारत करने वालों की जान लेना या उन्हें सलीब पर चढ़ाना या उनके हाथ और पैरों को काट देने से ही इसकी भरपाई होगी. 

मारे गये लोगों में शिया मौलवी अल-निम्र भी

इन मारे गए दोषियों में जाने-माने असंतुष्ट सऊदी शिया मौलवी शेख निम्र अल-निम्र समेत तीन अन्य शिया नेता शामिल थे. बाकी सभी सुन्नी थे.

यह शिया नेता बार-बार सऊदी अरब के शाही परिवार को चुनौती दे रहे थे. 2012 में इनकी गिरफ्तारी के बाद इन्हें सांप्रदायिक संघर्ष और राजद्रोह के लिए उकसाने का दोषी पाया गया था.

सऊदी अरब का महत्वपूर्ण तेल खजाना पूर्वी प्रांत में स्थित है जहां 20 लाख प्रभावी अल्पसंख्यक शिया आबादी रहती है. लंबे समय से सऊदी शिया सरकार द्वारा भेदभाव और उत्पीड़न की शिकायत करते आ रहे थे. ईरान के साथ सऊदी अरब की प्रतिद्वंदिता के चलते इन लोगों पर दोतरफा वफादारी का संदेह किया जाता था. 

ईरान बनाम सऊदी

इन सजाओं ने पहले से ही आंतरिक संघर्ष से जूझ रहे मिडिल ईस्ट के तमाम देशों में एक तेज हलचल मचा दी है. इनमें लीबिया, सीरिया, इराक, यमन शामिल हैं.

इस संबंध में ईरान का विरोध प्रदर्शन सबसे ज्यादा तेज है. ईरान ने इन हत्याओं की निंदा की है. उसने विरोध स्वरूप तेहरान में तैनात सऊदी राजदूत को तलब किया. साथ ही एक बयान जारी कर कहा कि सऊदी अरब को इस कार्य के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. 

ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अली खामनेई ने अपनी वेबसाइट पर एक तस्वीर पोस्ट की है. जिसमें उन्होंने सऊदी सरकार की तुलना इस्लामिक स्टेट (आईएस) से करते हुए कहा कि खुदा उन्हें सजा देगा.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का हवाला देते हुए ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी ने घोषणा की, "अपने राजनीतिक और धार्मिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए भाषण देने वाले शेख निम्र जैसी शख्सियत की जान लेने से केवल गहरी नासमझी और लापरवाही का पता चलता है."

तेहरान में विरोध प्रदर्शन के दौरान सऊदी दूतावास के बाहर ईरानी प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा लग गया. इनमें से कुछ ने दूतावास में घुसकर फर्नीचर और दूसरे सामान नष्ट कर कई कमरों में आग लगा दी. मशाद स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास भी क्षतिग्रस्त हुआ और सऊदी झंडे को जला दिया गया. हालांकि इसमें कोई भी घायल नहीं हुआ. ईरानी सरकार ने शांति की अपील करते हुए प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करते हुए कुछ को गिरफ्तार भी किया.

सऊदी ने भी उम्मीद के मुताबिक जैसे को तैसे वाली प्रतिक्रिया दिखाई. सऊदी ने घोषणा की कि उन्होंने ईरान के राजदूत को तलब किया और तीखे शब्दों वाला एक विरोध पत्र सौंप दिया. उन्होंने सऊदी के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की ईरान को सख्त चेतावनी दी. 

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

अमेरिका चाहता है कि दोनों मुल्क कूटनीतिक समाधान की तलाश और आपसी बातचीत जारी रखें. लेकिन सांप्रदायिक नफरत से बिगड़े माहौल में इसे कोई भी सुन नहीं रहा है.

इससे पहले, अमेरिका ने खानापूर्ति से लगने वाला एक बयान जारी करके सऊदी अरब से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और शांतिपूर्ण विरोध करने वालों का सम्मान करने के लिए कहा था.

कई मानवाधिकार संगठनों ने अल-निम्र पर लगाए गए आरोपों की आलोचना की है. साथ ही यह भी आरोप लगाया कि सऊदी शासन शिया आबादी को इसलिए निशाना बना रहा है ताकि उसके ख़िलाफ़ किसी तरह का विरोध न पनप सके.

इस कार्रवाई के चलते शिया बहुसंख्यक मुल्क इराक के साथ सऊदी के संबंधों में भी खटास आने की संभावना प्रबल हो गई है.

शिया उग्रवादी संगठन हिज़्बुल्लाह ने इस कार्रवाई की निंदा की है. उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सऊदी अरब को ब्लैकलिस्ट करने का आह्वान किया है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के कार्यालय द्वारा कहा गया कि सऊदी अरब में की गई इस कार्रवाई से उन्हें "गहरी निराशा" हुई है. उन्होंने बढ़ते सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए इन क्षेत्रों के  नेताओं से चर्चा के लिए कहा. 

दूसरी तरफ सऊदी के पड़ोसी और सहयोगी मुल्क बहरीन ने आधिकारिक तौर पर इस कार्रवाई का समर्थन किया है.

सऊदी में भी अल-निम्र को मौत की सजा देने के विरोध में शियाओं ने मार्च किया. इस्लामी मुल्कों और यहां तक कि भारत के जम्मू-कश्मीर में इसके खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन किया गया.

अल सऊद के परिवार के अस्तित्व पर सवाल

इस दुनिया में केवल सऊदी अरब ही ऐसा देश है जिसका नाम एक परिवार (अल सऊद) पर रखा गया और अब तक इस देश पर यह खानदान एक जागीर के रूप में शासन करता आया है.

दुनिया के दूसरे सबसे बड़े तेल भंडार के साथ सऊदी अरब दुनिया का 20 फीसदी तेल नियंत्रित करता है. इस प्राकृतिक संपदा ने इस साम्राज्य को दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक बना दिया है. इस देश की राजशाही के मूल स्वभाव में ही तानाशाही है जो दुनिया में इसे सबसे ज्यादा कठोर कानूनों वाला मुल्क बनाती है. महिलाएं इसकी सबसे ज्यादा शिकार बनती हैं.

जब से आईएस ने अपने आतंकियों से अल सऊद खानदान पर हमला करने के लिए कहा है तब से सऊदी सत्ताधारी घबराहट के कई संकेत दे चुके हैं. इसी कड़ी में बीते सप्ताह सामूहिक सजा-ए-मौत की कार्रवाई शामिल है. 

किंग सलमान (जिन्होंने पिछले साल जनवरी में शाह अब्दुल्ला की मौत के बाद सत्ता संभाली थी) ने शक्ति का प्रयोग करने के लिए युवा और ढीठ राजकुमारों को चुना. 

सऊदी शासन का यह कदम उस वक्त और ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है जब तेल की कीमतें कम होने के साथ ही उसके वित्तीय संसाधनों भी गिरावट आ रही है. इस वक्त शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता उनके अस्तित्व को बचाना है. जहां अंदरूनी विरोध अब बढ़ना ही है, ऐसे में इनका अस्तित्व कब तक रहेगा इसका केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है.

सऊदी अरब के अमेरिका के साथ बहुत घनिष्ठ संबंध हैं. यह मुल्क अमेरिका के लिए कभी न खत्म होने वाला ईंधन का एक स्रोत सरीखा है.

अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र यानी भारत को सहिष्णुता और मानवाधिकार पर उपदेश देता है, लेकिन इस सामूहिक सजा-ए-मौत की कार्रवाई के बाद भी अल सऊद परिवार से वो मधुर संबंध बनाए हुए है. 

अल-निम्र को मृत्युदंड देने ने मध्य पूर्व में एक नए सांप्रदायिक संघर्ष की शुरुआत हो सकती है. जिसमें सबसे प्रमुख भूमिका में सुन्नी सऊदी अरब और शिया ईरान होंगे.

First published: 4 January 2016, 23:23 IST
 
पिनाक रंजन चक्रवर्ती @catchnews

फ़ेलो, ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन, दिल्ली. भारत के पूर्व विदेश सचिव, बांग्लादेश के पूर्व भारतीय उच्चायुक्त और थाईलैंड में पूर्व भारतीय राजदूत रह चुके हैं.

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