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चीन के अमित शाह से मिलिए, सबसे ताकतवर राष्ट्रपति शी के पीछे है इनका दिमाग

सुनील रावत | Updated on: 12 March 2018, 16:57 IST

चीन ने एक संवैधानिक संशोधन कर राष्ट्रपति पद के लिए टर्म लिमिट को ख़त्म कर दिया है. इस रूल के बाद चीन में यह संभव हो गया है जिससे शी जिनपिंग जिंदगीभर चीन के राष्ट्रपति बने रह सकते हैं. चीन में यह बदलाव यह दर्शाता है कि कैसे वह शी को अमेरिकी राष्ट्रपति से ज्यादा ताकतवर बनाना चाहता है. शी ने बीते दिनों दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचने पर मजबूर किया है.

शी के पीछे किसका दिमाग 

शी जिनपिंग की इस रणनीति के पीछे प्रोफेसर से राजनेता बने वांग हुनिंग का दिमाग माना जाता है. वांग शी के अलावा चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के दो पिछले दो महासचिवों और चीनी राष्ट्रपतियों जियांग जेमिन और हू जिन्ताओ के स्पीच भी लिख चुके हैं. चीन के लिए शी का सपना कई मायनों में सशक्तीकरण करना है. वांग ने चीन के पूर्व राष्ट्रपति जियांग जेमिन के 'तीसरे प्रतिनिधित्व' और हू जिन्ताओ के "विकास के वैज्ञानिक सिद्धांत" का मसौदा तैयार किया था.

हर विदेश यात्रा में रहते शी के साथ 

वांग शी के साथ सभी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं में साथ रहते हैं. वांग को अब चीन का अमित शाह भी कहा जाने लगा है. वांग शी शीनपिंग के साथ उसी तरह हैं जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अमित शाह हैं. अगर शाह का काम मोदी के लिए चुनावी गणित बनाना और चुनाव जीतने के लिए रणनीतियों को तैयार करना है, तो वांग में भी चीन में गरीबी उन्मूलन से लेकर भ्रष्टाचार और दुनिया के सामने शी को मजबूत साबित करने में महत्वपूर्ण काम किया है.

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वांग 1980 के दशक में अमेरिका से अपने प्रारंभिक शैक्षिक कैरियर को पूरा करके आये. वह शक्ति प्रयोग करने की क्षमता और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के लिए एक्सपर्ट माने जाते हैं. दिसंबर 2017 में चौथ विश्व इंटरनेट सम्मेलन में वांग का भाषण सुनने लायक था. 

चीन के इन कामों के पीछे शी  का दिमाग 

शी के राष्ट्रपति रहते भ्रष्टाचार के आरोपी कई नेताओं को सलाखों के पीछे डाल दिया गया. शी के राज में असंतोष के लिए कोई जगह नहीं है, मीडिया और नागरिक समाज पर भारी सेंसर लगा हुआ है. पार्टी में शी का कोई उत्तराधिकारी नहीं होने के कारण 2023 तक उनके सत्ता में रहने का इरादा पहले ही सामने आ चुका है.

शी यह संकेत देना चाहते हैं कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति से कहीं ज्यादा ताकतवर हैं. शी अपने बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के अंतर्गत कई देशों में राजमार्गों, बंदरगाहों, रेलवे के निर्माण में अरबों डॉलर का निवेश कर चुके हैं. हालांकि भारत ने इस पहल का विरोध किया है, लेकिन चीन 100 से अधिक देशों के समर्थन का दावा करता है.

चीन पाकिस्तान में 50 अरब डॉलर से अधिक की बुनियादी सुविधाओं वाली परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है और एक महत्वपूर्ण श्रीलंकाई बंदरगाह उसने लीज पर ले लिया है. यही नहीं चीन अब नेपाल को इंटरनेट सेवाएं मुहैया कराने के लिए भी कह रहा है. .मालदीव में भी उसकी कई प्रमुख परियोजनाएं चल रही हैं.

First published: 12 March 2018, 16:49 IST
 
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