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दूसरी बीवी डॉट कॉम: मर्दवादी सोच का फितूर या कुछ और

लमट र हसन | Updated on: 26 June 2016, 8:14 IST

ब्रितानी नागरिक आजाद चायवाला जब 12 साल के थे तभी उन्होंने सोच लिया था कि वो एक से ज्यादा शादी करेंगे. करीब 22 साल की उम्र में चायवाला मिलेनियर (लखपति) बन गए. उसके कुछ समय बाद उन्होंने पहली शादी की. उसके बाद दूसरी शादी करने के लिए चायवाला को 10 साल लग गए.

चायवाला वेबसाइट-इंटरनेट से जुड़े कारोबारी हैं. उन्होंने करीब एक दर्जन वेबसाइटें बनाई हैं जिनपर करीब पांच करोड़ यूनिक विजिटर्स हर महीने आते हैं. पाकिस्तानी मूल के चायवाला ने जब इंटरनेट की मदद से दूसरी बीवी खोजने की कोशिश की तो उन्होंने निराशा हाथ लगी. फिर उन्होंने दूसरी बीवी तलाश करने वालों के लिए एक वेबसाइट बनाने का विचार किया.

महिला से ज्यादा पुरुष के लिए फायदेमंद है शादी

इसके बाद चायवाला ने सेकेंडवाइफ डॉट कॉम शुरू किया. यानी हिंदी में कहें तो दूसरी बीवी डॉट कॉम. इस वेबसाइट पर लोग दूसरी या उससे अधिक बीवियों की तलाश करते हैं.

33 साल के चायवाला खुद को 'सीरियस टेक एंटरप्रेन्योर' कहते हैं. उन्हें इस बात पर फक्र हैं कि उन्होंने बगैर किसी बड़ी डिग्री के सफलता हासिल की है. चायवाला बहुविवाह के बारे में लोगों की धारणा बदलना चाहते हैं.

चायवाला के मुताबिक, "मुस्लिम मर्दों के लिए एक से अधिक बीवी जरूरी है ताकि उन्हें तलाक या विवाहेत्तर संबंधों में फंसने से बचाया जा सके."

बहुविवाह सुन्नत है

चायवाला चाहते हैं कि सदियों पुरानी बहुविवाह प्रथा दोबारा शुरू हो. पैगंबर मोहम्मद ने एक से अधिक शादियां की थीं. इस्लामी परंपरा में पैगंबर मोहम्मद के अमल को सुन्नत माना जाता है.

उनकी वेबसाइट पर कुरान का एक उद्धरण लिखा आता है, "अपनी पसंद की महिलाओं से शादी करो, दो या तीन या चार लेकिन अगर तुम सबके संग न्यायोचित बरताव नहीं कर सकते तो बस एक शादी करो."

इस्लाम में केवल पुरुषों को बहुविवाह की इजाजत है, महिलाओं को नहीं. मुस्लिम महिला एक साथ दो या अधिक पुरुषों से शादी नहीं कर सकती.

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चायवाला ने नवंबर, 2014 में अपनी वेबसाइट शुरू की थी. अब तक 163 देशों के 25 हजार लोग इसके सदस्य बन चुके हैं. मालिकों के मुताबिक इनमें करीब 30 प्रतिशत सदस्य महिलाएं हैं. इतना ही नहीं उनकी वेबसाइट हर हफ्ते औसतन दो विवाह कराती है.

चायवाला एक डाक्यूमेंट्री के हवाले से दावा करते हैं कि ब्रिटेन में करीब 20 हजार परिवारों ने बहुविवाह किया है.

कई शादी करने का ख्याल

आजाद चायवाला

चायवाला कहते हैं, "12 साल की उम्र में मुझे पता चल गया था कि मैं कई शादियां करूंगा... किशोरावस्था में मैं लोगों से कहता था कि मेरी कई बीवियां और 20 बच्चे होंगे. 22 साल की उम्र में मैंने पहली शादी की. मेरी बीवी और ससुराल वालों को मेरी भविष्य की योजना पता थी."

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बहरहाल, अगले एक दशक तक उनकी एक ही बीवी रही. चायवाला कहते हैं, "...मैं डिजिटल युग में रहता था जहां मुझे बर्गर से लेकर बाथटब तक ऑनलाइन मिल जाता है... लेकिन मेरे टेक एंटरप्रेन्योर होने का क्या फायदा अगर मैं अपनी विशेषज्ञता का इस मुश्किल के हल के लिए न इस्तेमाल कर पाऊं."

चायवाला को यकीन था कि उनकी तरह और भी लोग दूसरी बीवी खोज रहे होंगे. वो कहते हैं, "इसीलिए हमने सेकेंडवाइफ डॉट कॉम लॉन्च किया और उसकी सफलता के बाद पॉलीगैमी डॉट कॉम."

चायवाला कहते हैं, "पोर्नोग्राफी, हुक ऐप, स्ट्रीप क्लब, एक्स्ट्रा मैरिटल वेबसाइट जैसे विकृत प्रयोगों के तौर पर पॉलीगैमी पहले से ही समाज में मौजूद है... लेकिन इन सबका समाज और परिवार पर बहुत बुरा असर होता है. पॉलीगैमी से परिवार एकजुट रहता है और बड़ा और मजबूत बनता है."

नाम या बदनाम

इस तरह की वेबसाइट से क्या मुस्लिम समुदाय की बदनामी नहीं होती? इसपर चायवाला कहते हैं, "अगर गे मुस्लिम डॉट कॉम जैसी वेबसाइट होती तो क्या इससे मुसलमानों का नाम होता?" 

चायवाला कहते हैं, "मैं इसे लेकर सहज हूं. मैं मुस्लिम हूं और मैं हर किसी से इसे लेकर सहज होने की अपील करता हूं. अपने अस्तित्व या कर्मों को न्यायोचित ठहराने की कोई जरूरत नहीं. आप किसे खुश करना चाहते हैं? अल्लाह को या उसके बंदों को? बदनामी जैसी कोई चीज नहीं होती, हर तरह का प्रचार अच्छा है."

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चायवाला कहते हैं कि उनकी बेबसाइट पर 'बीवियों के लिए विंडो-शॉपिंग' करना संभव नहीं. वो कहते हैं, "इसमें सेंध लगाना मुश्किल है. महिलाएं इसपर मुफ्त में रजिस्टर कर सकती हैं. जबकि पुरुषों को भुगतान करना पड़ता है. पैसे देने के बाद भी पुरुषों को सभी महिलाओं की तस्वीरें और परिचय उपलब्ध नहीं हो जाता. उन्हें बातचीत शुरू करनी पड़ती है..."

हालांकि चायवाला मानते हैं कि दूसरी मैचमेकिंग वेबसाइट की तरह उनकी वेबसाइट में भी कुछ खामियां हैं. चायवाला कहते हैं, "हम लोगों के दिल और दिमाग पर नियंत्रण नहीं कर सकते. कुछ संदिग्ध महिलाएं सदस्य बन जाती हं तो कुछ मर्द महिला बनकर..."

आधुनिक समाज की मुश्किलें

चायवाला मानते हैं कि आधुनिक समाज में विषमलिंगी होना मुश्किल हो गया है. वो कहते हैं, "यहां कई तरह के प्रलोभन हैं और कई मर्दों के लिए खुद पर काबू रखना मुश्किल हो जाता है. मुझे यकीन है कि बहुविवाह जन्मजात गुण है."

वो दावा करते हैं कि हर धर्म में बहुविवाह की अनुमति दी गई है लेकिन पिछले सौ सालों में इसे लेकर धारणा बदली है और बहुविवाह एक बार फिर लोकप्रिय हो रहा है.

मुस्लिमों के बहुविवाह के लिए वेबसाइट को मिली सफलता के बाद चायवाला ने गैर-मुस्लिमों के बहुविवाह के लिए पॉलीगैमी डॉट कॉम वेबसाइट शुरू की.

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चायवाला कहते हैं, "ये सचमुच वापसी कर रहा है. इसे कई मुख्यधारा के टीवी शो, रियलिटी डॉक्यूमेंट्री और हमारी वेबसाइट से बढ़ावा मिल रहा है. लोगों को इस मुद्दे पर सामने आने का हौसला मिल रहा है."

पॉलीगैमी डॉट कॉम इस साल जनवरी में लॉन्च हुई. अब तक 91 देशों के पांच हजार लोग इसके सदस्य बन चुके हैं.

बहुविवाह आखिर है क्या? इसपर चायवाला कहते हैं, "जब किसी के एक से अधिक बीवी हो और इसका मतलब धोखा देना या दो विवाह कत्तई नहीं होता. ये एक चुनाव, एक जीवनशैली है जिसे दुनिया में हजारों लोग अपनाते हैं... आम तौर पर एक व्यक्ति की कई बीवियां होती हैं...सभी बीवियां आपस में दोस्त होती हैं और सबके संग समान बरताव किया जाता है."

तो क्या पॉलीगैमी डॉट कॉम पर कोई महिला भी बहुविवाह कर सकती है? वो अपने पहले पति के साथ रहते हुए दूसरे या तीसरे पति से शादी कर सकती है? कैच के ईमेल से पूछे गए इस सवाल पर चायवाला ने कहा, "माफ कीजिए, हम पॉलीगैमी डॉट कॉम पर ये सेवा नहीं देते."

आलोचना की परवाह नहीं

चायवाला को इस बात की परवाह नहीं है कि लोग उनके बारे में क्या कहते हैं, न ही इस बात की कि बहुत से समाज में बहुविवाह स्वीकार्य नहीं है. 

वो कहते हैं, "आदमी के बनाए कानून के संग जैसा अक्सर होता है कि उससे बचने के तरीके भी मिल जाते हैं. हमारे ज्यादातर यूजर्स अमेरिका और ब्रिटेन से हैं. ये लोग अपने धार्मिक और सामुदायिक नियमों के तहत विवाह करते हैं...आखिर आप किससे प्यार करते हैं या किससे नहीं करते हैं या आप किसके संग जिंदगी गुजारना चाहते हैं इसके लिए राज्य द्वारा दिया गए कागज के टुकड़े की जरूरत नहीं होती..."

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चायवाला कहते हैं, "कुछ लोग सोचते हैं कि बहुविवाह महिलाओं के लिए नहीं है. मैं भी शुरू में सेकेंडवाइफ डॉट कॉम पर महिलाओं की भागीदारी देखकर हैरान रह गया था. सेकेंडवाइफ कुल सदस्यों की 30 प्रतिशत और पॉलीगैमी डॉट कॉम पर 35 प्रतिशत सदस्य महिलाएं हैं."

वो याद दिलाते हैं कि शादीशुदा या कमिटेड लोगों की डेटिंग वेबसाइट एश्ले मैडिसन का लीक डेटा से पता चला था कि उसमें केवल पांच प्रतिशत महिला सदस्य हैं.

फिलहाल, चायवाला अपनी समय की धारा में बेबसाइट को मिलती सफलता से उत्साहित हैं लेकिन ये तो वक्त ही बताएगा कि समय की धारा को उलटी तरफ मोड़ने में कितने सफल होंगे?

First published: 26 June 2016, 8:14 IST
 
लमट र हसन @LamatAyub

Bats for the four-legged, can't stand most on two. Forced to venture into the world of homo sapiens to manage uninterrupted companionship of 16 cats, 2 dogs and counting... Can read books and paint pots and pay bills by being journalist.

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