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जब भारतीयों की रक्षा के लिए अफगान गर्वनर ने उठाई बंदूक

रुची कुमार | Updated on: 5 January 2016, 20:54 IST

अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ खत्म हो गई है. मुठभेड़ में सभी आतंकवादियों के मारे जाने की खबर है. हमले के दौरान भारतीय दूतावास की सुरक्षा में अफगान के बल्ख प्रांत के गवर्नर अता मोहम्मद नूर बंदूक उठाकर चर्चा में आ गए हैं.

अता एक पूर्व मुजाहिदीन हैं. इंटरनेट पर अाई तस्वीरों में नूर को एक राइफल लिए और निशाना साधते देखा जा सकता है. वह मजार-ए-शरीफ स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर सैनिकों से बात करते नजर आते हैं.

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25 घंटे तक चली मुठभेड़ सभी आतंकवादियों के मारे जाने के साथ सोमवार रात खत्म हो गई. इन आतंकवादियों ने दूतावास में घुसने की कोशिश की थी. तीन आतंकवादी जहां रविवार रात मारे गए थे, वहीं बाकी आतंकियों को सोमवार रात तक मार गिराया गया.

इस घटना की जानकारी देने के लिए अफगानिस्तान में भारतीय राजदूत अमर सिन्हा ने ट्वीट किया. जिसमें उन्होंने गर्वनर अता का भी नाम लिया. उनका ट्वीट था, 'विशेष बलों द्वारा मजार में अभियान जारी है. भीषण लड़ाई जारी है. गवर्नर अता खुद निगरानी कर रहे हैं. दूतावास में सभी सुरक्षित हैं.'

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पूर्व मुजाहिदीन नूर को सैनिक प्रशिक्षण मिला था और वह जमियत-ए-इस्लामी के रेजिसटेंस कमांडर थे. जमीयत-ए-इस्लामी रूस के खिलाफ बनाए गया राजनीतिक मोर्चा था. बाद में वह अहमद शाह मसूद के नार्दन एलायंस के कमांडर बने जो अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ लोहा लेने के लिए बनाई गई थी. इस संगठन को 90 के दशक में भारत ने समर्थन दिया था.

नूर ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है, ''हमलोग बैठकर फुटबॉल मैच देख रहे थे. भारत और अफगानिस्तान के बीच साउथ एशियन एसोसिएशन फुटबॉल चैंपियनशिप का फाइनल जारी था. जब हम जीत का इंतजार कर रहे थे अचानक मजार के पास भारतीय दूतावास के नजदीक गोली चलने की आवाजें आई.''

हमला शुरू होने के बाद प्रांतीय पुलिस प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय के मुखिया भी नूर का साथ देते नजर आए. अधिकारियों के अनुसार इस हमले में दो नागरिक और सुरक्षा बलों के छह जवान जख्मी हुए हैं. इस हमले में किसी जवान के मरने की खबर नहीं है लेकिन एक जवान बेहद गंभीर रुप से घायल है.

First published: 5 January 2016, 20:54 IST
 
रुची कुमार @RuchiKumar

Ruchi Kumar is an Indian journalist living in Kabul with her cat Bukhari. On most days, she reports on the ongoings in the region. Rest of the time, she reads, writes and wanders around Kabul looking for people who will tell stories.

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